चुनाव आयोग यूपी के उत्साहजनक रुझान से प्रसन्न है

चुनाव आयोग यूपी के उत्साहजनक रुझान से प्रसन्न है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मसौदा सूची पर दावे -आपत्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों का रुझान भले ही अब तक ठंडा रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लेकर राजनीतिक दलों का भारी रुझान देखने को मिल रहा है।

अकेले इस राज्य में अब तक राजनीतिक दलों ने साढ़े आठ हजार आपत्तियां दर्ज कराई है। इनमें भाजपा, बसपा, सपा व कांग्रेस सभी शामिल है। राजनीतिक दलों के इस रुझान से उत्साहित चुनाव आयोग ने जरूरत पड़ने पर इन राज्यों में दावे-आपत्तियों की समय-सीमा और भी बढ़ाने के संकेत दिए है।

किस राज्य ने कितनी आपत्तियां कराईं दर्ज?

इस बीच आयोग ने राजनीतिक दलों के रुझान न दिखाने के बाद भी पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा सहित उन सभी पांच राज्यों में मसौदा सूची पर आपत्तियों को दर्ज कराने की अवधि 19 जनवरी तक बढ़ा दी है। इन राज्यों में दावे-आपत्तियों की समय-सीमा 15 जनवरी को खत्म हो गई थी।

आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में मसौदा सूची को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अब तक आठ आपत्तियां दर्ज कराई गई है। इनमें तृणमूल कांग्रेस की ओर से सिर्फ तीन, सीपीएम ने दो, भाजपा, बीएसपी और फारवर्ड ब्लाक ने एक- एक आपत्ति दर्ज कराई है।

इसी तरह से छत्तीसगढ़ में कुल 228 आपत्तियां दर्ज हुईा यह सभी भाजपा की ओर दर्ज कराई गई है, जबकि काग्रेस ने एक भी आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। तमिलनाडु में भी कुल 293 आपत्तियां दर्ज हुई है। यह भाजपा, एआईडीएमके व डीएमके ने दर्ज कराई है।

अकेले भाजपा ने दर्ज कराईं 4846 आपत्तियां

आयोग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक दर्ज हुई साढ़े आठ हजार आपत्तियों में 8442 नाम जोड़ने के लिए है, जबकि 98 काटने के लिए है। इनमें भी सबसे अधिक 4846 आपत्ति अकेले भाजपा ने दर्ज कराई है, वहीं सपा ने भी अब तक करीब 21 सौ आपत्तियां दर्ज कराई है। बसपा ने 963 , कांग्रेस ने 574 और आप ने 77 आपत्तियां दर्ज कराई है।

यह स्थिति तब है जब उत्तर प्रदेश में छह फरवरी तक दावे-आपत्तियों दर्ज की जा सकती है। आयोग की मानें तो उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की आपत्तियों को लेकर भागीदारी उत्साह बढ़ाने वाली है। वह चाहता है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से छूटे नहीं। यह प्रक्रिया उसी का हिस्सा है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा समय में एसआइआर का काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग पर तीखे प्रहार करते हुए राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का गंभीर आरोप लगाया है। उत्तर बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रवाना होने से पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर राज्य में अल्पसंख्यक, आदिवासी, मतुआ और राजवंशी समुदायों के वोटरों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

ममता ने विशेष रूप से मालदा जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लगभग 90,000 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने इसे एक बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि आम लोगों के साथ-साथ अमर्त्य सेन और कवि जय गोस्वामी जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम भी इस प्रक्रिया की चपेट में आ रहे हैं।

बेलडांगा में हिंसा के लिए भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों पर लगाया आरोप

मुख्यमंत्री ने राज्य में हालिया तनाव की घटनाओं के पीछे भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में प्रवासी मजदूर की मौत के बाद भड़की हिंसा और समुद्रगढ़ में रेल अवरोध का जिक्र करते हुए उन्होंने जनता से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। ममता ने स्पष्ट किया कि यद्यपि समुदायों में व्याप्त गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर अत्याचार हो रहे हैं और बंगाल में अशांति फैलाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि राज्य सरकार इन सभी मामलों पर नजर रख रही है और पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक के कार्यालय में हुई ईडी की छापेमारी और उसके बाद उपजे कानूनी विवाद पर भी ममता बनर्जी ने अपनी बेबाक राय रखी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंगाल पुलिस की एफआईआर पर रोक लगाने और मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उन्हें जेल भेजने की धमकियां दी जा रही हैं।

उन्होंने केंद्र को चुनौती देते हुए कहा कि वह केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए वह मरने को भी तैयार हैं। ममता बनर्जी ने इन धमकियों को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए जोर दिया कि बंगाल में हिंसा फैलाने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा और वह किसी भी उकसावे के बावजूद राज्य की शांति भंग नहीं होने देंगी।

घुसपैठियों की पहचान से डरी हुई है तृणमूलः भाजपा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए आरोपों पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के दावों को ‘भ्रामक और तुष्टीकरण की राजनीति’ करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल फर्जी और अवैध मतदाताओं को सूची से बाहर करना है।

भाजपा का आरोप है कि मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या और घुसपैठियों के नाम अवैध रूप से शामिल किए गए हैं। जब चुनाव आयोग इन नामों की छंटनी कर रहा है, तो तृणमूल कांग्रेस अपना ‘वोट बैंक’ खिसकता देख घबरा गई है।

नियमों के तहत हो रहा है सत्यापनः आयोग

इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन और नोटिस के नहीं हटाया जा रहा है।

मालदा में 90,000 नामों को हटाने की चर्चा पर आयोग का कहना है कि यह संख्या केवल उन डेटा विसंगतियों की हो सकती है जिनकी जांच चल रही है, न कि उन्हें हटाने का अंतिम निर्णय। आयोग ने दोहराया कि मृत मतदाताओं, एक से अधिक स्थान पर पंजीकृत लोगों और स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों के नाम हटाना एक रूटीन प्रक्रिया है, जिसे सुदृढ़ लोकतंत्र के लिए अनिवार्य माना जाता है।

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