उनके लिए जिंदगी और मौत का चुनाव था-उद्धव ठाकरे
महायुति पर धमकाने, जबरदस्ती और अपहरण का आरोप लगाया
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे की प्रतिक्रिया सामने आई है। शनिवार को उन्होंने चुनावों को लेकर महायुति पर जोरदार हमला किया और धमकाने, जबरदस्ती और बेमिसाल राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया।
उन्होंने 15 जनवरी के नगर निगम चुनावों को एक अजीब मुकाबला बताया, जिसे उनके विरोधियों ने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई के तौर पर लड़ा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन ने जीत हासिल करने के लिए कोई भी तरीका नहीं छोड़ा।
हर तरह का दबाव डाला गया’
उन्होंने कहा, “यह चुनाव बहुत अजीब था। ऐसा लग रहा था कि यह उनके लिए जिंदगी और मौत का चुनाव था। उन्होंने कैश देने से लेकर हमारे उम्मीदवारों को किडनैप करने तक हर तरीका अपनाया। उन्होंने उम्मीदवारों पर नॉमिनेशन वापस लेने का दबाव डाला।”
शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष ने वोटिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि उन्हें नागरिकों से वोटर लिस्ट से नाम गायब होने की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर नतीजे हैरान करने वाले थे और जमीनी स्तर की उम्मीदों से मेल नहीं खाते थे।
‘एग्जिट पोल पर भी था शक’
ठाकरे ने कहा, “ये नंबर कहां से आए? क्या ये किसी पार्टी ऑफिस से आए थे? गिनती से पहले ही नंबर टीवी पर दिख रहे थे। भविष्य में कोई ईवीएम नहीं होगी और सीधे नतीजे घोषित किए जाएंगे। मुझे वोटर्स से कई शिकायतें मिली हैं कि वोटर लिस्ट से उनके नाम गायब थे। कई जगहों पर नतीजे चौंकाने वाले हैं। मुझे एग्जिट पोल्स पर शक था।”
‘जमीन पर हमारी पार्टी की मजबूती पता चलती है’
बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के महायुति गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद, ठाकरे ने कहा कि नतीजों से जमीन पर शिवसेना (UBT) की मजबूती पता चलती है। कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिशों के बावजूद मजबूती से खड़े रहने वाले वोटरों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, “वोटर लोकतंत्र के रक्षक हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग डरे नहीं उन्होंने दिखाया कि शिवसेना UBT की ताकत बरकरार है।
उद्धव ठाकरे ने मांगी माफी
ठाकरे ने उन नागरिकों का दिल से शुक्रिया अदा किया जिन्होंने शिव शक्ति गठबंधन का साथ दिया। उन्होंने सभी इलाकों में प्रचार न कर पाने के लिए माफी भी मांगी।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सालों से जिस चीज की ख्वाहिश थी वह आखिरकार पूरी हो गई। बीजेपी अब भारत की सबसे अमीर निकाय (बीएमसी) पर कंट्रोल करने और अपना मेयर बनाने के लिए तैयार है। वहीं, तीन दशकों तक मुंबई पर राज करने वाला ठाकरे परिवार का कंट्रोल खत्म हो गया है।
227 सदस्यों वाली बीएमसी के लिए जो बहुमत का आंकड़ा चाहिए होता है वह महायुति ने पार कर लिया है। बीजेपी ने 89 सीटों पर जीत हासिल की है तो शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने 29 सीटें जीती हैं। चूंकि बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है तो ऐसे में बड़े फैसलों के लिए उसे शिंदे की सेना की मदद चाहिए होगी।
विपक्षी दलों का हाल
उद्धव-राज ठाकरे गठबंधन ने 71 सीटें जीतीं (उद्धव की शिवसेना ने 65 और राज ठाकरे की एमएनएस ने 6)। शहर के मराठी इलाकों में ज्यादातर वार्ड उनके पास रहे। कांग्रेस 24 सीटें जीत पाई। 2017 में कांग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं। इस बार उसने अपने एमवीए सहयोगियों, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन नहीं किया था।
दूसरी ओर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने शानदार प्रदर्शन किया। अपनी सीटों की संख्या 2 से बढ़ाकर 8 कर ली और उन वार्डों में समाजवादी पार्टी को हराया जहां अल्पसंख्यकों के वोट ज्यादा थे।
किस पार्टी का कितना वोट शेयर?
बीजेपी को 21.6% वोट मिले, उसके बाद शिवसेना (यूबीटी) को 13.2% वोट मिले। शिवसेना (शिंदे) को 5% और कांग्रेस को 4.4% वोट मिले। कुल मिलाकर, ऐसा लगता है कि वोटर्स ने ‘ट्रिपल-इंजन सरकार’ की अपील पर भरोसा किया है। इसमें केंद्र, राज्य और शहर तीनों ही बीजेपी के पास होंगे। साथ ही, बीजेपी के हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को ठाकरे गठबंधन के मराठी पहचान और गौरव (अस्मिता) पर फोकस की तुलना में जनता के बीच ज्यादा समर्थन मिला।
मुंबई का मेयर कौन?
बीजेपी विधायक और स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि मेयर बीजेपी का होगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा, “सत्ता और मेयर के पद से ज्यादा, हमारी दिलचस्पी मुंबईकरों की जिंदगी में बदलाव लाने में है।”
मराठी वोटरों पर ठाकरे परिवार की पकड़ बनी रही
बीएमसी चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त जीत के बावजूद, ठाकरे परिवार ने अपने मुख्य मराठी वोट पर अच्छी पकड़ बनाए रखी और शिंदे की सेना से बेहतर प्रदर्शन करते हुए दोगुनी से ज्यादा सीटें जीतीं।
सेंट्रल मुंबई (दादर, लालबाग, परेल, सेवरी और वर्ली) के पारंपरिक मराठी गढ़ ठाकरे भाइयों के साथ रहे। उदाहरण के लिए, वर्ली में शिंदे के समधन सरवणकर शिवसेना (यूबीटी) के निशिकांत शिंदे से हार गए।
बीजेपी को शिंदे की जरूरत
शानदार प्रदर्शन के बावजूद, बीजेपी को अभी भी अपने सहयोगी एकनाथ शिंदे की जरूरत है। शिंदे अपनी सौदेबाजी की काबिलियत के लिए जाने जाते हैं और वे स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन जैसे अहम पदों की मांग कर सकते हैं। यह कमेटी नगर निकाय के लिए अहम फाइनेंशियल फैसले लेती है।
इस फैसले का असर इस चुनाव से आगे तक जाएगा। एक राष्ट्रीय पार्टी का तीनों लेवल की सरकारों पर दबदबा होने से, क्षेत्रीय पार्टियों के लिए प्रासंगिक बने रहना और बीजेपी के बढ़ते दबदबे को चुनौती देना और भी मुश्किल हो जाएगा।
बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
नतीजों से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। राज और उद्धव इस चुनाव के बाद भी साथ रह सकते हैं। बीजेपी के लिए शिंदे ज्यादा मजबूत सहयोगी बनकर उभरे हैं, जिससे अजित पवार की लंबे समय की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। अपने चाचा शरद पवार के साथ गठबंधन करने के बाद भी, वह अपने गढ़ पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी से हार गए।
हालांकि शिवसेना (यूबीटी) मुंबई में अपने पारंपरिक गढ़ों को बचाने में कामयाब रही, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि उसने बड़े MMR क्षेत्र में अपनी पकड़ खो दी है। कई लोगों का मानना है कि अगर कांग्रेस पार्टी गठबंधन में शामिल होती तो ठाकरे गठबंधन मुंबई में और भी बेहतर प्रदर्शन करता।

