असुरों के आतंक को ईश्वर सदैव संहार करते है- मालती

असुरों के आतंक को ईश्वर सदैव संहार करते है- मालती

श्रीनारद मीडिया, जीरादेई, सीवान (बिहार):

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जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है, तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर उनका संहार किया है। जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर- को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। यह बातें कथा वाचिका मालती मंजरी ने प्रखंड क्षेत्र के भरौली मठ में चल रहे श्री मारुति नंदन महायज्ञ में आयोजित श्री रामकथा के दौरान मंगलवार को व्यक्त की।

 

उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इन्कार कर दें, लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। कथावाचिका ने श्रीराम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया।

 

चारों ओर मंगल गान होने लगे। सैकड़ों की संख्या में प्रभु श्री राम के जन्म का प्रसंग ग्रामीणों ने सुना। जहां भक्तों की भारी भीड़ रही , भक्तो ने भक्ति भाव से भगवान की कथा का रसास्वादन किया। कथावाचिका ने रामजन्म कथा के कई मनमोहक प्रसंग का वर्णन किया।

 

उन्होंने कथा में बताया कि असत्य से सत्य की ओर , अंधकार से प्रकाश की ओर , पाप से पुण्य की ओर भगवान का भजन हम सभी को करना अनिवार्य है।कथावाचिका ने बताया भगवान का जन्म नहीं हुआ , वह प्रकट हुए। रामचरितमानस , रामायण कहती है भए प्रगट कृपाला , दीन दयाला कौशल्या हितकारी। प्रभु श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे गए। भगवान अपने अंशों के साथ प्रकट हुए।

 

 

राम जन्म होते ही अयोध्या नगरी में खुशियां मनाई जाने लगी। मंगल गीत गाए जाने लगे। चक्रवती अयोध्या नरेश राजा दशरथ अपने हाथों से बहुमूल्य रत्नों को दान करने लगे। उनके घर में एक नहीं बल्कि चार बेटों ने जन्म लिया। राम जन्म की कथा सुन पांडाल में मौजूद महिला पुरुष भाव विभोर हो गए। इस अवसर आचार्य अरविन्द मिश्रा ,डा राजन मान सिंह , डिवाइन इंस्टीच्यूट के निदेशक सुभाष प्रसाद ,डा कृष्ण कुमार सिंह,ई राजकिशोर सिंह ,रामेश्वर सिंह ,हरिकांत सिंह , विजय सिंह ,जितेंद्र सिंह ,विकास सिंह , रामा जी सिंह ,सहित काफ़ी संख्या मेँ श्रीराम भक्त उपस्थित थे.

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