माननीय बिहार में दोबारा चुनाव कराई जाए-प्रशांत किशोर
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रिजल्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी की ओर से चुनाव परिणाम कैंसिल करके फिर चुनाव कराने की मांग की है। जेएसपी की याचिका मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुर्यकांत की बेंच में शुक्रवार के लिए लिस्ट है। याचिका में चुनाव से ठीक पहले और चुनाव के दौरान वोटरों के खाते में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नाम पर 10-10 हजार ट्रांसफर करने के एनडीए सरकार के फैसले को गैरकानूनी और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया है।
2025 में बिहार में बड़े बदलाव का दावा करने वाले प्रशांत किशोर को जनता ने नकार दिया। उनकी पार्टी जन सुराज को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली। पराजय की समीक्षा के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के दौरान महिलाओं के खाते में दस-दस हजार की राशि भेजकर वोटरों को प्रभावित किया गया।
अब जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। रिट याचिका दायर कर पार्टी ने इसे संविधान की धारा 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन, असंवैधानिक और मॉ़डल कोड ऑफ कंडक्ट का खुला उल्लंघन बताते हुए चुनाव परिणाम को अवैध बताया है। कहा गया है कि चुनाव के ऐलान के बाद डीबीटी का लाभ देना घुसखोरी और भ्रष्ट आचरण के समान है।
जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के सेक्शन 123 के तहत चुनाव आयोग को धारा 324 से प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए। याचिका को शुक्रवार को सुनवाई के लिए लिस्ट पर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता आदित्य सिंह इस मामले में जन सुराज का पक्ष रखेंगे। तर्क दिया गया है कि बिहार सरकार ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बाद 6 अक्टूबर 2025 को और उसके बाद भी सत्ता की शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। सरकार ने फ्री एंड फेयर इलेक्शन के सिद्धांतों के खिलाफ जाते हुए मतदाताओं के खाते में पैसे भेजकर लाभ पहुंचाया। चुनाव आयोग ने इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गयी है कि चुनाव के संभावित ऐलान के छह माह पहले सत्ताधारी दलों द्वारा लोक लुभावन योजनाओं पर रोक लगाया जाना चाहिए।
यह भी आरोप लगाया गया है कि बिहार सरकार की यह पूर्व नियोजित योजनाा थी, जिसका मकसद गलत तरीके से बड़े पैमाने पर वोटरों को प्रभावित करके वोट हासिल करना था। मतदान केंद्रों पर 1 लाख 80 हजार जीविका की लाभुक महिलाओं को तैनात किया गया जिन्हें 10 हजार का लाभ और दो लाख देने का आश्वासन दिया गया था। यह बिहार सरकार का एक भ्रष्ट तरीका है जिससे पूरे बिहार चुनाव नतीजों को सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में किया गया।र इसलिए इस चुनाव के नतीजे को रद्द घोषित कर फिर से चुनाव कराया जाना चाहिए।

