कुत्तों के काटने से कैंसे बचे?

कुत्तों के काटने से कैंसे बचे?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने पूछा कि कुत्तों के कारण आम लोगों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत क्षेत्रों के लिए है।

पीठ ने सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालत परिसरों के भीतर आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है और उन्हें वहां से हटाने पर क्या आपत्ति हो सकती है।

सुनवाई के दौरान………..

  • बहस में आवारा कुत्तों के फेवर में पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि जो कुत्ता काटे उसकी नसबंदी की जा सकती है।
  • इस पर कोर्ट ने कहा, अब तो बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं।
  • इस बीच सिब्बल ने कहा, जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी ने नहीं काटा। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया- ‘आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।’
  • कोर्ट ने कहा कि कुत्तों से दुर्घटनाओं का खतरा भी होता है। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते।
  • कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 2018 में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे। ये ठीक से लागू क्यों नहीं हुए। नियमों के पालन में देरी से जनता को नुकसान नहीं होना चाहिए।
  • सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल (NALSAR, हैदराबाद के लिए) ने कहा कि इस यूनिवर्सिटी में एक एनिमल लॉ सेंटर है। इसमें एनिमल प्रोटेक्शन में मास्टर्स कोर्स और पीजी डिप्लोमा भी है। एनिमल प्रोटेक्शन के संबंध में इसका हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ MoU है। हमारी जांच में ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो पहले कोर्ट के सामने नहीं रखे गए थे।

    शिक्षण संस्थानों में आवारा कुत्तों पर डेटा –

    • भारत में कुत्तों की आबादी 5 करोड़ 25 लाख है, जरूरी शेल्टर की संख्या (प्रति सुविधा 200 कुत्ते) 77347 है।
    • प्रति कुत्ते के लिए जरूरी फंक्शनल शेल्टर 40 वर्ग फुट है।
    • एक कुत्ते को खिलाने का रोजाना का खर्च 40 रुपये है।
    • 1.54 करोड़ कुत्तों को खिलाने का खर्च 61 करोड़ 81 लाख रुपए होगा।
    • एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 194,412 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन काम नहीं कर रहा है।
    • खराब शौचालय की सुविधा, पीने के पानी की कमी, जब ऐसी खराब सुविधाएं हैं, यह मुमकिन नहीं है कि स्कूल बाड़ लगाने के लिए फंड दे पाएंगे।
    • सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने दलील देते हुए कहा कि सवाल यह नहीं है कि DU या सुप्रीम कोर्ट कैंपस में कुत्तों की जरूरत है या नहीं। लेकिन कुत्ते एक सच्चाई हैं। सवाल यह है कि वे इंसानों को नुकसान कैसे न पहुंचाएं और इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका क्या है।
    • सुप्रीम कोर्ट: हम आज सबकी बात ध्यान से सुन रहे हैं क्योंकि ऐसी शिकायतें आई हैं कि कई लोगों की बात नहीं सुनी जा रही है। सिब्बल: एक प्रक्रिया है जिसके तहत रेबीज के मुद्दे से निपटा जाना चाहिए। AWB ने एक SOP जारी की है जो ABC नियमों के खिलाफ है। राज्य उस SOP का पालन कर रहे हैं। उस SOP में कई निर्देश अवैज्ञानिक हैं। सिब्बल: लोग कुत्तों को उसी जगह खाना खिलाते हैं जहां वे होते हैं। वे शेल्टर होम नहीं जाएंगे। कुत्तों को हटाने से काम नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट: कई NGO शेल्टर में जाकर खाना खिला सकते हैं।
    • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तो फिर कुत्तों की भी काउंसलिंग होना चाहिए

      सिब्बल: हां, लेकिन कुछ दिन पहले एक हादसा हुआ था। अगर कोई ऐसा कुत्ता है जो शरारती है और किसी को काट सकता है, तो आप एक सेंटर को कॉल करें, उसे ले जाया जाएगा, उसकी नसबंदी की जाएगी और उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा।

      कोर्ट: बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं।

      सिब्बल: मुझे यकीन है कि यह हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया है।

      अगर दर्द है, तो इसका मतलब ये नहीं कि हमें क्रूर होना पड़ेगा।

      जस्टिस नाथ: बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते।

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