कैसे पहचानें बच्चे को गेम की लत है या नहीं?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

साहिबाबाद टीला मोड़ थाना क्षेत्र की भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के दूसरे दिन आज बृहस्पतिवार को भी स्थानीय निवासियों का जमावड़ा है। अपनी तीन बेटियों को खोने वाले पिता चेतन कुमार ने पछतावा जताते हुए कहा कि मेरी सरकार से मांग है कि देश में कोरियन कंटेंट को बंद किया जाना चाहिए। कोई नाटक, ड्रामा, वीडियो व चैनल सभी पर रोक लगनी चाहिए। इंडिया में बिल्कुल न चलें। मेरे बच्चों के अलावा किसी का बच्चे को इसकी लत न पड़े। बच्चों को मोबाइल उपलब्ध कराना मेरी गलती थी। फोन के जरिए वह कोरियन पर्सनैलिटी से जुड़े।
किशोरों में कब आती है सुसाइडल टेंडेंसी?
इस स्थिति में बच्चे ‘डिल्यूजन्स’ यानी वास्तविकता से परे भ्रम और ‘ओवर वैल्यूड आइडियाज’ का शिकार हो जाते हैं, जहां उन्हें अपना विचार या गेम का टास्क जीवन से भी बड़ा लगने लगता है। तर्क शक्ति की कमी होने के कारण वे इस मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पाते, जो उन्हें सुसाइड जैसे आत्मघाती कदम की ओर धकेलता है।
गाजियाबाद के तीनों लड़कियों के सुसाइड वाले केस में देखें तो एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान लड़कियों के पिता ने बताया कि उनकी बेटियां इस गेम और कोरियाई संस्कृति के प्रति इस कदर जुनूनी थीं कि वे इसे अपनी जान से ऊपर मानने लगी थीं। यह बच्चों में डिल्यूजन और ओवरवैल्यूड आइडियाज का एक सबसे अच्छा उदाहरण है।
बच्चियों की मौत पर क्या बोले पिता?
चेतन कुमार ने बृहस्पतिवार को फिर मीडियाकर्मियों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरियन ऑनलाइन गेम, मूवीज और वेब सीरीज जैसे कंटेंट पर प्रतिबंध लगाया जाए। बच्चियों के सुसाइड पर उन्होंने कहा, “उनका सुसाइड करने का जिम्मेदार केवल कोरियन सामग्री है। सभी अपने बच्चों पर जरूर ध्यान दें। मैं कम ध्यान दे पाया। बच्चों को मोबाइल उपलब्ध कराना मेरी गलती थी। फोन के जरिए वह कोरियन पर्सनैलिटी से जुड़े।”
चेतन ने आगे कहा, “मुझे डॉक्टर ने भी बताया था कि मेरे बच्चों के अलावा भी बीते माह सात बच्चों ने कोरियन ड्रामा देखकर सुसाइड किया है। मेरे बच्चों ने भी सुसाइड नोट में कहा है कि लो छुड़ा लिया तुमने कोरिया।” पिता ने तीन शादियों व कर्जे को लेकर कहा कि बच्चों को इन चीजों की समझ नहीं थी।
उल्लेखनीय है कि भारत सिटी सोसायटी में मंगलवार देर रात दो बजे तीन नाबालिग लड़कियों ने इमारत की नौवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। इन बच्चियों को ऑनलाइन गेमिंग और कोरियाई कंटेंट देखने और उसे फॉलो करने की लत थी, लेकिन दो हफ्ते पहले पिता ने जब मोबाइल ले लिया तो तीनों तनाव में रहने लगी थी।
घर में बिखरी पड़ी तस्वीरें।
सुसाइड नोट में बच्चियों ने लिखा है कि वो कोरियन कल्चर से प्यार करती हैं और वो उसके बिना नहीं रह सकती। लड़कियों ने पिता से कोरिया जाने की इच्छा भी जताई थी, इस पर पिता ने उन्हें डांट लगाई थी।
सोसायटी के बच्चों में डर का माहौल
इससे पहले, बच्चियों के पिता चेतन कुमार अपनी तीन पत्नियों के साथ घर पर मौजूद हैं और दरवाजा बंद किया हुआ था। बच्चियों के माता-पिता सोसायटी निवासियों और मीडिया से बात नहीं कर रहे थे। कोई घर जा रहा है तो दरवाजा नहीं खोल रहे थे। बुधवार देर रात तीनों शवों का दिल्ली निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना के बाद से सोसायटी के बच्चों में डर का माहौल है। आज कई बच्चे स्कूल नहीं गए।
मोबाइल जांच से खुलेंगे कई राज
पुलिस आज एक बार फिर पूछताछ के लिए चेतन के घर पहुंची है। साथ ही पुलिस टीम द्वारा कब्जे में लिए गए बच्चियों के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट भी आज आ सकती है। इससे मामले में कई और सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे
माता-पिता कैसे पहचानें लत के खतरनाक लक्षण?
- हिंसक व्यवहार और गुस्सा: फोन छीनने या गेम बंद करने पर बच्चे का अत्यधिक गुस्सा करना, चिड़चिड़ा हो जाना और यहां तक कि माता-पिता पर हाथ उठाना या मारपीट करना।
- गहरा अवसाद और अकेलापन: मोबाइल पास न होने पर बच्चे का बुरी तरह उदास हो जाना और उसे आसपास की किसी भी गतिविधि या खेल में रुचि न रहना।
- दैनिक दिनचर्या और खान-पान में लापरवाही: गेम में इस कदर खो जाना कि बच्चा समय पर नहाना, अपनी पसंद का खाना खाना और व्यक्तिगत स्वच्छता जैसी जरूरी चीजों को भी नजरअंदाज करने लगे।
- क्या बच्चों को फोन नहीं देना ही सही तरीका है?
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