
प्रौद्योगिकी वह सेतु है जो देश को प्रगति, समाज को चेतना और साहित्य को संवेदना से जोड़ता है। ”
इस धरती पर मानव ईश्वर की सबसे खूबसूरत रचना है । ईश्वर ने मानव को सोचने, समझने और नया करने की शक्ति दी है । मानव अपने जरूरतों के अनुसार नई खोज, नया आविष्कार , कुछ न कुछ नया सृजन करते रहता है । और विकास के पथ पर अग्रसर रहता है ।
समय के साथ- साथ मानव की ज़रूरतें भी बदलती है; तरीके बदल जाते हैं। हमारी सोच बदल जाती है और मानव कुछ न कुछ नया करते रहता है।
आज के परिपेक्ष्य में प्रौद्योगिकी हमारे विकास में बहुत महत्वपूर्ण हो गई है।प्रौद्योगिकी हमारी सभ्यता की प्रगति की आधारशिला बन गई है। जैसे-जैसे विज्ञान और तकनीक का विकास हुआ, वैसे- वैसे देश, समाज और साहित्य की दिशा में परिवर्तन आया और दशा भी बदल गई।
आज प्रौद्योगिकी मशीनों, उपकरणों तक सीमित नहीं है। हमारी सोच, हमारे विचार, हमारी अभिव्यक्ति का रूप और तरीके भी बदल गये हैं ।
देश के विकास में प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण है।
“प्रौद्योगिकी राष्ट्र को गति देती है, विकास को दिशा देती है और समाज को एक दूसरे से जोड़ती है। “आधुनिक संचार के साधन, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल लेन- देन, वैज्ञानिक अनुसंधान ने राष्ट्र को मजबूत, सशक्त और आत्मनिर्भर बना दिया है।
ई -गवर्नेंस , ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल लेन- देन/ भुगतान आदि ने हमें अधिक पारदर्शी, तेज, स्मार्ट आधुनिक और सुविधाजनक बना दिया है।
आज गांव और शहर की दूरी कम हो गई है। अंतर्देशीय पत्र, लिफाफे, पोस्ट कार्ड की जगह मोबाइल मैसेज ने ले ली है।
समाज आधुनिक, सरल और अधिक जागरूक हो गया है।मोबाइल, इन्टरनेट, सोशल मीडिया ने हमें आपस में जोड़ कर और पास ला दिया है।
कुछ ही पलों में ज्ञान विश्व के कोने-कोने में पहुँच जाता है।प्रौद्योगिकी ने रोजगार के नए अवसर खोले हैं।समाज को अपनी परंपराओं, मूल्यों और विचारों को और परिष्कृत करने का मौका दिया है।
प्रौद्योगिकी ने साहित्य के क्षेत्र में नए आयाम खोले हैं।आज ई- पुस्तकें, ब्लॉग, वेबसाइट, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से हमारा साहित्य विश्व के हर पटल पर हर जगह उपलब्ध है।लेखन, प्रकाशन, और पाठन- तीनों अधिक सरल और सुलभ हो गए हैं। नई साहित्यिक विधाओं का जन्म हुआ है। हमारी रचनात्मक अभिव्यक्ति बढी है ।
“आधुनिक तकनीक के बिना आधुनिक राष्ट्र की कल्पना अधूरी है ।”आज प्रौद्योगिकी ने देश को सशक्त, समाज को जागरूक और साहित्य को समृद्ध बनाया है। ।अगर इसका संतुलित उपयोग किया जाय तो प्रौद्योगिकी मानव विकास का प्रभावशाली साधन सिद्ध हो सकता है ।”प्रौद्योगिकी प्रगति का माध्यम है,मूल्य उसकी आत्मा।

