ट्रंप टैरिफ अवैध घोषित होने से भारत को मिल सकती है राहत
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने का बाद से भारत में अमेरिका विरोधी भावना का लहर दौड़ गई है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल न खरीदे लेकिन भारत ने ट्रंप को दो टूक शब्दों कहा कि भारत अपनी जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदता रहेगा। भारत के इसी रुख से नाराज होकर ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया।
ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने के बाद ही भारत में अमेरिका विरोधी लहर तेज होने लगी है। इसके परिणामस्वरूप, पेप्सी, कोका-कोला, सबवे, केएफसी, मैकडॉनल्ड्स जैसी अमेरिकी मल्टीनेशन कंपनियों के बहिष्कार का खतरा बढ़ गया है।
भारतीय अमेरिकी उत्पादों का विरोध करें- स्वामी रामदेव
योग गुरु स्वामी रामदेव ने ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के विरोध में भारतीयों को सभी अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, “पेप्सी, कोका-कोला, सबवे, केएफसी या मैकडॉनल्ड्स के काउंटरों पर एक भी भारतीय नहीं दिखना चाहिए। इसका व्यापक बहिष्कार होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो अमेरिका में हाहाकार मच जाएगा। जिससे अमेरिका में मंहगाई बढ़ जाएगी और ट्रंप को टैरिफ वापस लेना पड़ेगा।”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आने लगी है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का क्रेडिट न मिलने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्तों को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका का रवैया देखने के बाद भारत ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, अब खबर सामने आ रही है कि भारत, अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी हाथ पीछे खींच सकता है।
भारत सशक्त होकर उभरेगा- स्वामी रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि जहां तक चुनौतियों का प्रश्न है तो चुनौतियां तो नए अवसर देती हैं। भारत को पहले करके दुनिया के दूसरे देशों में एक्सपोर्ट शुरू करना चाहिए, जो अमेरिका के साथ कमी हुई है। इस कारण लोगों की नौकरियां जाएंगी तो हमें नए रोजगार पैदा करने चाहिए। सरकार को मैन्युफेक्चरिंग, टैक्स, जीएसटी में छूट देकर उद्यमियों को राहत देनी चाहिए। मैं आश्वस्त हूं कि भारत इस परिस्थिति से और भी सशक्त होकर उभरेगा।
नए वर्ल्ड ऑर्डर से होगा डॉलर का मुकाबला- स्वामी रामदेव
स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत, रूस, चीन, मिडिल ईस्ट के कुछ देश और यूरोप के देश मिलकर नया वर्ल्ड ऑर्डर बनाएंगे और वो डॉलर का मुकाबला कर पाएंगे। डॉलर आधी कीमत का रह जाएगा जिस दिन भारत, रूस, चीन और कुछ देश इकट्ठे हो जाएंगे। ये भारत के लिए एक चुनौती भी है और अवसर भी है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार- स्वामी रामदेव
योगगुरू ने कहा कि जब चीन मजबूती से खड़ा हो गया तो अमेरिका को पीछे हटना पड़ा, उसी तरह आज भारत मजबूत देश है, दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था है और आने वाले 20-25 सालों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। भारत आज विश्व का सबसे बड़ा बाजार ही नहीं बल्कि मैन्युफेक्चरिंग हब बनने की क्षमता रखता है।
ट्रंप के दावों को किया खारिज
एनडीटीवी से बातचीत के दौरान देश के पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने कई बड़े दावे किए हैं। उनका कहना है कि ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदकर भारत तगड़ा मुनाफा कमा रहा है। हालांकि, ट्रंप का यह बयान महज एक राजनीतिक स्टंट है, आर्थिक वास्तविकता कुछ और ही है।
रूस से तेल खरीदने पर भारत को कितना मुनाफा?
सुभाष गर्ग के अनुसार, रूस से तेल खरीदने पर भारत को साल भर में 2.5 बिलियन डॉलर (तकरीबन 2.22 लाख करोड़) की बचत हो रही है। ट्रंप इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं और भारत पर टैरिफ लगाने के लिए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
रूस से तेल का गणित समझाते हुए पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि रूस से भारत 3-4 डॉलर (264-352 रुपये) प्रति बैरल के हिसाब से तेल खरीदता है। ट्रंप इसे राजनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमास कर रहे हैं। मगर सच तो यह है कि भारत वैश्विक कीमत के अंतर्गत की रूस से तेल खरीद रहा है और इसमें किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन नहीं किया गया है।
ट्रेड डील पर क्या बोले पूर्व वित्त सचिव?
भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर बात करते हुए , नई दिल्ली ने पहले ही हाथ पीछे खींच लिए हैं। सुभाष गर्ग के अनुसार, इतने टैरिफ के साथ कोई व्यापार नहीं करना चाहेगा। मगर, भारत ने औपचारिक रूप से दरवाजे बंद नहीं किए हैं।
सुभाष गर्ग का कहना है कि ट्रेड डील पर अमेरिका की शर्तें काफी सख्त थीं। खासकर कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं को लेकर भारत समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिका चाहे जितना भी दबाव बना ले, भारत देश के किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
चीन से रिश्ते सुधारने की दी सलाह
चीन के साथ भारत के रिश्तों पर बात करते हुए सुभाष गर्ग कहते हैं कि चीन से आने वाले सभी निवेशों पर पाबंदी लगाना हमारी सबसे बड़ी गलती रही है। चीनी निवेशकों के लिए बाजार खोलकर हम अन्य देशों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं।