स्वदेशी फाइटर जेट तेजस अनेकों खूबियों से लैस है,कैसे?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

दुबई एयर शो के दौरान भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस क्रैश कर गया। भारतीय वायु सेना ने इस हादसे में पायलट की मौत की पुष्टि की है। हादसा क्यों हुआ, इसके लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। यह अपने देश में बना बहुत ही बेहतरीन हल्का लड़ाकू विमान है और इसका विदेश में एक अंतरराष्ट्रीय एयर शो में इस तरह से गिरना निश्चित तौर पर बहुत बड़ झटका है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में बना यह एक बेहतरीन लड़ाकू विमान हैं और इसे दुनिया के कई और देश भी खरीदना चाहते हैं।
सिंगल सीटर,सिंगल इंजन फाइटर जेट
स्वदेश में बना तेजस (Tejas LCA Mk1A) एक हल्का लड़ाकू विमान है। यह एक सिंगल सीटर और सिंगल इंजन फाइटर जेट है। वैसे भारतीय वायु सेना दो सीटों वाले ट्रेनर वेरिएंट का भी इस्तेमाल करती है। भारतीय नौसेना भी दो सीटों वाले वेरिएंट का उपयोग करती है। यह बहुत ही फुर्तिला फाइटर जेट है।
पिछले महीने भरी है आधिकारिक उड़ान
तेजस एमके1ए ने पिछले महीने ही नासिक में अपनी पहली आधिकारिक उड़ान भरी थी। मिग-21 के रिटायर होने के बाद तेजस एलसीए को भारतीय वायु सेना के लिए बहुत बड़ी ताकत माना जा रहा है। यह 2,222 किमी की रफ्तार से 52 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है।
मल्टी रोल फाइटर जेट है तेजस एलसीए
तेजस एमके1ए 4.5 पीढ़ी का मल्टी रोल फाइटर जेट है। मतलब, यह हवा, जमीन और समुद्र सभी जगहों पर हमला करने में सक्षम है। तेजस एमके1 पहले से एयरफोर्स की सेवा में है, लेकिन नया वाला ज्यादा एडवांस वर्जन है। यह छोटे रनवे पर भी आसानी से लैंड और टेकऑफ करने में सक्षम है।
पहले वाले तेजस से ज्यादा एडवांस
भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस एमके1ए पहले वाले वेरिएंट से काफी बेहतरीन है। क्योंकि, इसमें नए एवियोनिक्स आर्किटेक्चर का इस्तेमाल हुआ है, इसके रडार ज्यादा एडवांस हैं। यही नहीं, इसे बार-बार इंधन के लिए जमीन पर आने की जरूरत भी नहीं है और यह हवा में ही इंधन भरे जाने की क्षमता से लैस है।
तेजस एमके-2 पर भी चल रहा काम
भारत तेजस एमके1ए से आगे तेजस एमके-2 पर भी काम कर रहा है। 2026 में इसका पहला परीक्षण होने की संभावना है। इसकी पहली उड़ान उसी साल के आखिर में या 2027 की शुरुआत में होने की संभावना है। इसकी डिजाइन इस तरह की जा रही है कि दुश्मन के फाइटर जेट को पीछा करके तबाह कर देगा।
ऑल-वेदर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है तेजस
कलाबाजी दिखाने में माहिर है तेजस लड़ाकू विमान
तेजस का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम कलाबाजी दिखाने में माहिर है. इस विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से बना हुआ है, जो इसे धातु की तुलना में बहुत हल्का और मजबूत बनाता है. . इसके भीतर सेंसर तरंग रडार लगा है, जो दुश्मन के विमान से लेकर जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल पास आने की खबर देने में सक्षम है.
तेजस MK1 पहले से ही भारतीय वायुसेना के पास था, तेजस MK1A इसका एडवांस वर्जन है. इसे नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ये और भी ज्यादा ताकतवर हो गया है.
तेजस लड़ाकू विमान कब बना?
एयरक्राफ्ट का आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था. तेजस सीरीज का उत्पादन 2007 में शुरू हुआ था. तेजस की पहली यूनिट का निर्माण 1 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना ने किया था. वहीं 1 अप्रैल 2020 को तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन का निर्माण हुआ.
तेजस का एडवांस वर्जन कब आएगा?
वहीं तेजस Mk1 का एडवांस वर्जन जल्द ही भारतीय वायुसेना को मिलने वाला है. तेजस Mk2 भी जल्द ही भारतीय वायुसेना में शामिल होगा. 4.5 पीढ़ी का मल्टी रोल फाइटर जेट है, इसमें जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-414 इंजन फिट किए जाएंगे. यह स्वदेशी उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार से लैस होगा. तेजस- Mk2 हवा से हवा से मार करने वाली अस्त्र-एमके-2 मिसाइल, हवा से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस एनजी, एंटी रेडिएशन मिसाइल रूद्रम-2 और Meteor जैसी BVRAAM जैसी मिसाइलों से लैस होगा.

