क्या जन सुराज’ के परम-प्रणेता प्रशांत किशोर बिहार के नवयुग चाणक्य है? 

क्या जन सुराज’ के परम-प्रणेता प्रशांत किशोर बिहार के नवयुग चाणक्य है? 

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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सीवान जिले में सदैव आपका शानदार सुस्वागत एवं सादर अभिनंदनपूर्ण सुश्रेष्ठतम् अभिवादन है! हे हमारे परम प्रिय, सुयोग्य,सुकर्मठ,सुश्रेष्ठ, शुचितामय राजनय के सच्चे पुरोधा,सुपुरूषार्थी आदि सद्-गुणों से सुसंपन्न लोकप्रिय जननायक ! सीवान की पावन धरा पर यहां के ‘बहु-जन-गण-मन’ का आपको कोटिश: सादर साधुवाद और नमन है..!

परंतु, आपके इस अभिनंदन क्रम में ही आपके आत्मसातिक विशेष उन प्रासंगिक बातें का सर्वसमाज के प्रायः’सर्वजन-मन’ के समक्ष सुचिंतन व ‘आत्म-मंथन’ हेतु पुनर्उल्लेखित है..! जो यह कि देश की आजादी के दौर से ही हरहाल में बहु-बदहाल व फटेहाल बिहार,अपनी बहु-दुर्दशा के कारण विगत अनेक दशकों से सिसकता ही रहा है..!

बहु-जनकथित बात यह भी कि ‘पिछड़ेपन से अभिशप्त बिहार’ के कर्णधार नवयुवकगण व नवयुवतियां भी अब अपनी सुशिक्षा, उच्च सुशिक्षा ,रोजगार , स्वरोजगार व नौकरियों हेतु विगत कई दशकों से देश के प्रायः प्रदेशों और विदेशों में भी पलायन को मजबूर हैं..! जबकि इस निर्धनतम् प्रदेश की गरीब बहुतेरी ‘जनता-जनार्दन’ सदैव अपनी विडंबनापूर्ण दुर्भाग्य को ही कोसने पर सदा विवश है !

वस्तुत: बिहार को विकसित प्रदेश बनाने हेतु आपके सद्प्रयासों के सापेक्ष व निहितार्थ बिहार के ‘बहु-जन-गण-मन’ के सुविचारों एवं शुभाकांक्षाओं के निमित सीवान जिले के प्रायः ‘बहु-गण-जन’भी सुसक्ततापूर्ण, पूरी सुकर्मठता व नेक-ईमानदारी के साथ सदैव सहर्ष आपके साथ हैं !

आपकी शुचितापूर्ण राजनीतिक सद्-सोच, आपकी राजनीतिक प्रवीणता, सुस्पष्ट सुनीति, ‘जाति-धर्म व हिंसा’ की राजनीति से बिहार को मुक्ति, ‘राजनीति का अपराधीकरण’ और ‘अपराधियों के राजनीतिकरण’ की क्षुद्र व हिंसक राजनीतिक-कूटनीतिक की अब तिलांजलि, ‘भ्रष्टाचार व माफिया राज’ का दु:खांत, जनकथित यह भी कि निरंकुशता के घोर शिकार अफसरशाही राज का समापन आदि के साथ ही बिहार के सर्वसमाज हेतु समुचित विकास हेतु बिहार के दशकों से बेहद हलकान ‘आम व खास’ सर्वसमाजजन की निरंतर प्रगति के निमित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सुविचारों से सुप्रभावित और

‘भारत के सुभाग्य’ हेतु भारतीय संविधान के श्रद्धेय सम्माननीय परम प्रमुख पुरोधा-पुरोहित जनक श्रीयुत् बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी के सुविचारों को आत्मसाती स्वरूप ‘बिहार में जनता का सुन्दर राज’ की पूर्ण परिकल्पनातीत ‘ जन सुराज’ के सबल सूत्रधार व सुकर्मठ परम कर्णधार, सीवान की पावन सुभूमि पर बारंबार सदैव सादर आपको नमस्कार है!

*सीवान की इस ‘पावन धरा’ से आपको सादर साक्षात्कार कराते हुए मेरा मन बहुत ही अति-हर्षित हो रहा है! कितना नाम गिनाऊं..! फिर भी इस ‘पावन-पूण्य-सुभूमि’ की सुहृदयमयी देश के अनेक सुश्रेष्ठ सच्चे वीर सपूतों की पावन-परम कुछेक ‘बानगी की बात’बताता हूं! यह वह ‘सुधरा’ है, जहां सदियों से ‘विश्व-बंधुत्व’ का ‘सुनारा’ ‘जन-जन’ के ‘मन-मनसा’ में सदैव गुंजायमान रहा है..! यह पावन धरती है!

स्वतंत्रत भारत के प्रथम राष्ट्रपति व भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद और महान स्वतंत्रता सेनानी व कौमी एकता के मसीहा मौलाना मजहरूलहक साहब का और अनेक सुश्रेष्ठ वीरों-सपूतों का.. ! यह पावन भूमि देशरत्न राजेन्द्र बाबू की ‘सुजन्म-सुकर्म’ की रही है तो आजादी की लड़ाई के दौरान ‘हक साहब’के सुकर्म की श्रेयस्कर सुभूमि का गौरवशाली शानदार इतिहास का सुसाक्षी भी सीवान जिला रहा और है!

स्वतंत्रता संग्राम के सशक्त-सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी और ‘ब्रिटिश शासन-सरकार’ के विरूद्ध और अंग्रेजों द्वारा पश्चिमी चंपारण की काफी उर्वरा भूमि-खेतों पर व्यापक रूप में ‘निलहा खेती’ कराकर वहां की समग्र भूमि को ऊसर बनाने की अंग्रेजियत ‘नीति-नीयत’ का पुरजोर-जोरदार विरोध करने के निहितार्थ ‘महात्मा गांधी जी’ को यहीं से ‘स्वतंत्रता-संग्राम’ का बिगुल बजाने हेतु आमंत्रित-आह्वानवित करने वाले हमारे परम पुरोधा बाबू ब्रज किशोर नारायण जी की भी ‘सीवान’ ‘सुजन्म-सुकर्म’ की ‘महिमा-मंड़ित’ करने वाली ‘सुधा-धरा’ है!

अमर शहीद बाबू उमाकांत सिंह जी, बाबू फुलेना प्रसाद जी आदि अनेकशः सच्चे वीर सपूतों और अनेक बेहद नेक परम मनीषियों का भी यह ‘सुजन्म-सुकर्म’ की अमृत-स्वरूप व ‘धर्म-निरपेक्ष’ और महती भाईचारा का सदैव संदेशक ‘साक्षी-प्रतीक’ इस सुधरा पर ‘पुनःश्च’ और बारंबार आपका सुस्वागत, अभिनंदन, अभिवादन और सादर साधुवाद है..!

आभार- धनंजय मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार व जिलाध्यक्ष ‘जन सुराज’ विचार मंच, सीवान! 

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