शंकराचार्य जी के अपमान से काशी हुई आक्रोशित

@ संन्यासियों ने शंकराचार्य जी के समर्थन में किया सांकेतिक उपवास
श्रीनारद मीडिया / सुनील मिश्रा वाराणसी, उत्तर प्रदेश
वाराणसी,19.1.26 / प्रयागराज माघमेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दिन परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज को माघमेला क्षेत्र में प्रशासन द्वारा स्नान करने से रोकने व संतों सहित बटुकों के साथ प्रशासन द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में आज काशी में असि स्थित मुमुक्ष भवन में आज दंडी संन्यासियों ने सांकेतिक उपवास करके शंकराचार्य जी महाराज का समर्थन किया और दोषी जनों पर कार्यवाही की मांग की।और साथ ही मांग की शासन शंकराचार्य जी महाराज से खेद व्यक्त करते हुए उनके स्नान की परंपरागत व्यवस्था करे।
ज्ञातव्य है कि कल प्रयाग माघमेला क्षेत्र में शंकराचार्य जी महाराज पालकी से स्नान करने जा रहे थे।उस समय प्रशासन ने उनके पालकी को रोक दिया अनेकों यह से रुकावट पैदा की।और जब प्रशासन द्वारा संतों संग दुर्व्यवहार से रूष्ट शंकराचार्य जी महाराज वापस अपने शिविर जाने हेतु वापस जाने हेतु मूड रहे थे उस समय अधिकारियों ने संतों व बटुकों को धक्का देकर गिराना और दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।कुछ संतों को शिखा से पकड़ कर घसीटा गया।और शंकराचार्य जी महाराज की पालकी को अज्ञात लोगों खींचकर एक किलोमीटर दूर कर दिया।जिसके बाद शंकराचार्य जी महाराज अपने शिविर लौट गए और तब से लेकर अब तक शंकराचार्य जी महाराज अपने शिविर के बाहर अन्न जल त्याग कर धरने पर बैठे हुए हैं।
उपवास स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातनधर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु सचल शिव शंकराचार्य जी महाराज के अपमान से समस्त सनातनधर्मी मर्माहत हैं।सदैव से परम्परा है कि शंकराचार्य जी महाराज लोगों को प्रशासन आदर सहित स्नान कराने ले जाता है जिसके के तमाम साक्ष्य मौजूद हैं।अगर प्रशासन स्नान भी नही करा सका तो कोई बात नही लेकिन उन्हें शंकराचार्य जी महाराज का अपमान और संतों संग दुर्व्यवहार नही करना चाहिए था।
उपवास स्थल पर अपना उद्बोधन व्यक्त करते हुए दंडी सन्यासी महासमिति के महामंत्री ईश्वरानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि ये राजनैतिक मामला लगता है क्योंकि जैसा देखने को मिला रहा है माघमेला में और भी संत है उनके साथ और शंकराचार्य जी महाराज के साथ प्रशासन द्वारा किया जा रहा व्यवहार उचित नही है।प्रशासन को संयम बरतना चाहिए वहां सभी लोग स्नान करने गए हैं वहां इतना हंगामा करने की जरूरत नही है।हम लोग इस घटना से बहुत दुखी हैं।
स्वामी रामदेव आश्रम,स्वामी रामखेलन आश्रम,स्वामी सर्वेश्वरानंद तीर्थ,स्वामी राघवेंद्रानंद तीर्थ,स्वामी जितेन्द्रानंद तीर्थ,स्वामी राजेश्वरानंद तीर्थ,स्वामी नारायण आश्रम,स्वामी उपेंद्रानंद तीर्थ,पं सुनील शुक्ला आदि लोग सम्मिलित थे।

