अब डिजिटल वार से होगा फाइलेरिया पर प्रहार, 15 हजार से अधिक मरीजों का बनेगा ऑनलाइन डैशबोर्ड

अब डिजिटल वार से होगा फाइलेरिया पर प्रहार, 15 हजार से अधिक मरीजों का बनेगा ऑनलाइन डैशबोर्ड
• आईएचआईपी पोर्टल पर जिले के मरीजों का डेटा होगा अपलोड
• निगरानी और उपचार में आएगी पारदर्शिता और गति

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, सारण (बिहार):

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फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में सारण जिला एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। अब इस गंभीर और दीर्घकालिक बीमारी की निगरानी और प्रबंधन डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के 15,000 से अधिक फाइलेरिया मरीजों का विवरण राष्ट्रीय आईएचआईपी (एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच) पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे मरीजों की निगरानी रियल टाइम में संभव हो सकेगी, जिससे न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्धारण और संसाधन वितरण में भी पारदर्शिता आएगी। फाइलेरिया जैसी उपेक्षित लेकिन गंभीर बीमारी के खिलाफ अब तकनीक ने मोर्चा संभाल लिया है। सारण जिले की यह पहल ना सिर्फ मरीजों की ज़िंदगी आसान बनाएगी, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र को भी आधुनिक, सटीक और जवाबदेह बनाएगी।

डिजिटल हथियार से फाइलेरिया पर वार
यह पोर्टल फाइलेरिया मरीजों के लिए डिजिटल डैशबोर्ड तैयार करेगा, जिसमें मरीज की व्यक्तिगत जानकारी, बीमारी की गंभीरता, प्रभावित अंग, ग्रेडिंग, उपचार की स्थिति और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र की स्थिति भी शामिल होगी। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस क्षेत्र में फाइलेरिया के कितने मरीज हैं और किसे किस स्तर की मदद की जरूरत है।

क्या है आईएचआईपी पोर्टल?
आईएचआईपी, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है, जो विभिन्न बीमारियों की निगरानी को तकनीक के माध्यम से केंद्रीकृत और दक्ष बनाता है। यह पोर्टल फाइलेरिया जैसी दीर्घकालिक बीमारियों की ट्रैकिंग, रोगियों की पहचान, समय पर उपचार और रिपोर्टिंग के लिए उपयोगी उपकरण साबित होगा। अब वह समय गया जब फाइलेरिया मरीज नजर से ओझल हो जाते थे। इस पोर्टल से हर मरीज की स्थिति साफ़ तौर पर दिखाई देगी – कौन पीड़ित है, कब से, और क्या इलाज मिल रहा है। इसके आधार पर सरकार नीतिगत निर्णय भी बेहतर ले सकेगी।

पेपरलेस व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम
इस प्रक्रिया के तहत अब मरीजों का विवरण रजिस्टरों में दर्ज करने की परंपरा खत्म होगी। पूरी प्रणाली पेपरलेस होगी, जिससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि डाटा की सुरक्षा और उपलब्धता भी बढ़ेगी। मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर से अधिकारी कहीं से भी डाटा देख और अपडेट कर सकेंगे।

तकनीक से बेहतर होगा नियंत्रण
फाइलेरिया विभाग में पदस्थ डॉ. अनुज सिंह रावत, राज्य सलाहकार ने बताया कि इस पोर्टल के जरिये अब स्वास्थ्यकर्मियों, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों को कहीं भी और किसी भी स्तर पर यह जानकारी मिल सकेगी कि जिले के किस इलाके में कितने मरीज हैं, उनका स्वास्थ्य स्तर क्या है और उन्हें क्या स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो रही है और इसके साथ ही किस अतिरिक्त स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है।
आईएचआईपी पोर्टल की मुख्य विशेषताएं
• रियल टाइम मरीज डैशबोर्ड
• पेपरलेस डेटा मैनेजमेंट
• ग्रेडिंग व अंग की स्थिति का रिकॉर्ड
• प्रमाण-पत्र ट्रैकिंग
• स्मार्ट ट्रैकिंग व रिपोर्टिंग

फाइलेरिया मरीजों की निगरानी में सार्थक कदम:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि अब हम फाइलेरिया जैसी बीमारी से सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि निगरानी और डेटा के स्तर पर भी लड़ेंगे। आईएचआईपी पोर्टल की मदद से हमें हर मरीज की पूरी प्रोफाइल एक जगह देखने को मिलेगी । उसे कब से तकलीफ है, कौन सा अंग प्रभावित है, क्या उसे दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिल गया है या नहीं। इससे न सिर्फ हमारे फील्ड स्तर के कर्मचारियों को सही दिशा मिलेगी, बल्कि हम योजनाओं की प्रभावशीलता का भी मूल्यांकन बेहतर तरीके से कर सकेंगे। यह पहल डिजिटल इंडिया और हेल्थ फॉर ऑल की दिशा में सार्थक कदम है। हमारी कोशिश है कि सारण जिला फाइलेरिया उन्मूलन के मामले में एक मॉडल बने।

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