भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते को लेकर राज्यसभा में विपक्ष ने भारी हंगामा किया

भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते को लेकर राज्यसभा में विपक्ष ने भारी हंगामा किया

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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 भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते को लेकर तथ्यात्मक स्थिति साफ भी नहीं हुई थी कि उससे पहले ही राजनीति का पारा इस मुद्दे पर चढ़ गया। राज्य सभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। कांग्रेस की ओर से कटाक्ष किया गया कि हर जानकारी वॉशिंगटन से ही क्यों मिलती है?

साथ ही इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा करा कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। जब नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि सरकार इस चर्चा के लिए तैयार है और स्वत: ही बयान देगी, लेकिन विपक्ष ने अनसुना कर नारेबाजी जारी रखी और बहिर्गमन कर दिया।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा

इस पर नड्डा की ओर से पलटवार करते हुए इसे कांग्रेस सहित आईएनडीआईए सहयोगी दलों का न सिर्फ गैर जिम्मेदार, बल्कि राष्ट्रविरोधी रवैया भी बताया।

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मंगलवार को कांग्रेस की ओर से उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी और सांसद जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस पर चर्चा की मांग की।

इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि इसे नोट कर लिया गया है, सरकार की ओर से पक्ष रखा जाएगा और शून्यकाल की कार्यवाही शुरू करा दी। फिर जैसे ही शून्यकाल समाप्त हुआ कि कांग्रेस सदस्य खड़े होकर हंगामा करने लगे।

जितने भी सदस्य थे, वह पहली पंक्ति में आ गए। अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने भी उनका हंगामे-नारेबाजी में साथ देना शुरू कर दिया। हंगामे के बीच ही जेपी नड्डा खड़े हुए और सरकार की ओर से चर्चा कराने और पूरी स्थिति स्पष्ट किए जाने का आश्वासन दिया।

सरकार ने विपक्ष के रवैये को राष्ट्रविरोधी करार दिया

नड्डा ने कहा कि कल रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट कर व्यापार समझौते के बारे में बताया। अच्छे दोस्त के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चर्चा की, लेकिन इस पर विपक्ष की हताशा दिख रही है, जिसे अच्छाई में भी बुराई दिख रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार पूरी डील के बारे में विस्तृत जानकारी देगी, संबंधित मंत्री भी इस पर सदन में चर्चा करेंगे। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के रवैये को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की कुंठा दिख रही है।

इन्हें न देश के विकास या व्यापार में नहीं, सिर्फ राजनीति में रुचि है। नेता सदन ने कहा कि पहले जब टैरिफ 50 प्रतिशत था तो कहते थे कि भारत क्या कर रहा है? अब ट्रंप ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए ट्रैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया तो भी सवाल, क्योंकि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं रह गया है।

भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने बंगाल के श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खोल दिए हैं।

इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा आयात शुल्क में की गई भारी कटौती से राज्य के चमड़ा, फुटवियर, जूट और समुद्री खाद्य जैसे क्षेत्रों में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। औद्योगिक घरानों ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूरदर्शी कदम करार दिया है।

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील से फायदा

भारतीय चमड़ा उत्पाद संघ (आइएलपीए) के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत पर आना भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।

आइएलपीए के अध्यक्ष मोहम्मद अजहर ने कहा कि भारतीय निर्यातक वर्षों से टैरिफ की असमानता के कारण वैश्विक बाजार में पिछड़ रहे थे। अब 18 प्रतिशत की दर भारत को चीन और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मजबूती से खड़ा करेगी।

गौरतलब है कि 2024 में भारत का चमड़ा और फुटवियर निर्यात 1.26 बिलियन डालर रहा, जो अमेरिकी बाजार की कुल मांग का मात्र 2.9 प्रतिशत है। इस कटौती के बाद भारत की बाजार हिस्सेदारी में व्यापक वृद्धि की संभावना है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं और कुशल कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

आइसीसी ने माना जूट उद्योग के लिए अच्छी खबर

इंडियन चैंबर आफ कामर्स (आइसीसी) ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत बताया है। जूट उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि दंडात्मक शुल्कों की वापसी से भारतीय जूट उत्पादों, जैसे शापिंग बैग और लाइफस्टाइल उत्पादों की मांग अमेरिका में तेजी से बढ़ेगी।

वहीं, समुद्री खाद्य निर्यातकों को उम्मीद है कि इस राहत से वे अपनी प्रसंस्करण इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ चला सकेंगे। उद्योग जगत अब इस उम्मीद में है कि भविष्य में एक पूर्ण मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होगा, जिससे इन उत्पादों को शून्य शुल्क पर पहुंच मिल सकेगी।

यह समझौता न केवल बंगाल की औद्योगिक तस्वीर बदल सकता है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ को भी वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।

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