बिहार के नए मुख्य सचिव के तौर पर प्रत्यय अमृत ने पदभार ग्रहण किया

बिहार के नए मुख्य सचिव के तौर पर प्रत्यय अमृत ने पदभार ग्रहण किया

नीतीश के भरोसेमंद…..कभी सुपरमैन, कभी संकटमोचक…

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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बिहार सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. वे मौजूदा मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा की सेवानिवृत्ति के बाद यह पदभार संभालेंगे. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रत्यय अमृत को तत्काल प्रभाव से मुख्य सचिव के कार्यालय में विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) बनाया गया है. सेवानिवृत्त होने के बाद अमृत लाल मीणा की जगह वे नियमित रूप से मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी संभालेंगे.

प्रत्यय अमृत 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और बिहार के सबसे सशक्त व प्रभावी अधिकारियों में गिने जाते हैं. वे राज्य सरकार के कई अहम विभागों में सेवाएं दे चुके हैं. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA), स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और ऊर्जा विभाग में उनका कार्यकाल काफी सराहनीय रहा है. खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और बिजली पहुंचाने में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से सराहा गया.

उन्होंने बिहार में बिजली सुधार कार्यक्रम को नई दिशा दी और ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं. इसके अलावा, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उनकी योजनाओं और नेतृत्व ने कई बार राज्य को संकट से सफलतापूर्वक बाहर निकाला.

अमृत लाल मीणा का कार्यकाल
वर्तमान मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने जून 2023 में बिहार के मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया था. अपने कार्यकाल के दौरान वे प्रशासनिक अनुशासन और दक्षता के लिए जाने गए. उनके नेतृत्व में कई सरकारी परियोजनाएं गति पकड़ सकीं.

अगले कुछ दिन होंगे महत्वपूर्ण
प्रत्यय अमृत को बतौर OSD कुछ समय तक अमृत लाल मीणा के साथ समन्वय में काम करने का अवसर मिलेगा. इससे शासन संचालन की निरंतरता बनी रहेगी. माना जा रहा है कि नए मुख्य सचिव के रूप में प्रत्यय अमृत सरकार की कई प्राथमिक योजनाओं को रफ्तार देंगे और प्रशासनिक सुधारों में नई दिशा तय करेंगे.

कभी उन्‍हें सुपरमैन कहा गया, कभी सरकार का संकटमोचक तो कभी ‘मिशन इम्‍पॉसिबल’ को ‘मिशन कंप्‍लीट’ में बदलने वाला अधिकारी. प्रत्‍यय अमृत, ये वो नाम है, जो एक बार फिर से चर्चा में है. उन दिनों जब पीपीपी मोड यानी पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप सुनने में नया-नया था. प्रत्‍यय अमृत ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में पहली बार पीपीपी मॉडल लागू किया और जिला अस्‍पताल का कायापलट कर डाला. छपरा में डीएम रहे तो अश्‍लीलता के लिए बदनाम अंतरराष्‍ट्रीय सोनपुर पशु मीमेले का ‘बदनुमा दाग’ साफ कर डाला.

सिनेमाघरों में सीसीटीवी अनिवार्य किया. ऊर्जा विभाग में रहे तो गांव-गांव तक तय समय से पहले बिजली पहुंचा दी. राज्‍य मुख्‍यालय में रहते गंगा पाथ और दीघा फ्लाइओवर जैसे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से पटना की तस्‍वीर बदल डाली. 2011 में केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत श्रेणी में ‘प्रधानमंत्री पुरस्कार’ पाने वाले वे अकेले आईएएस (IAS) थे.

एक के बाद एक ऐसी और भी कई उपलब्धियां प्रत्‍यय अमृत के नाम दर्ज हैं. ईमानदारी और रिजल्‍ट देने की काबिलियत ने उन्‍हें मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का भरोसेमंद बनाया. तभी तो अब, जबकि अमृत लाल मीणा के बाद उन्‍हें अगले मुख्‍य सचिव बनाया जा रहा है तो इस नाम पर आश्‍चर्य नहीं हो रहा. 58 वर्षीय ये आईएएस अफसर अब ब्‍यूरोक्रेसी में सूबे का सबसे बड़ा चेहरा बनने जा रहा है.

गोपालगंज से आईएएस तक का सफर

गोपालगंज के एक सामान्य परिवार में जन्मे प्रत्यय अमृत के घर में किताबों की कमी नहीं रही. बचपन से ही उन्‍हें शिक्षा का पूरा माहौल मिला. पिता रिपुसूदन श्रीवास्तव, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे और मां कविता वर्मा एक शिक्षिका. प्रत्‍यय की बचपन से ही पढ़ाई में गहरी रुचि के पीछ ये बड़ी वजहें थीं.

दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर में टॉप करने के बाद उन्‍हें श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली में लेक्चरर बनने का प्रस्ताव मिला. लेकिन दिल में शायद एक और सपना पल रहा था, वही सपना, जिसके लिए बिहारी लड़के जाने जाते हैं- आईएएस बनने का सपना. सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और दूसरे ही प्रयास में UPSC पास कर लिया. वो 1991 बैच में बिहार कैडर के आईएएस बने. बड़े भाई एलाइड सेवा में चयनित होने के बाद बीमा सेक्‍टर में अधिकारी रहे हैं, जब‍कि बहन प्रज्ञा ऋचा आईपीएस अधिकारी.

ट्रेनिंग के दौरान ही किया कमाल 

आईएएस प्रशिक्षण के दौरान उन्‍हें दुमका में पोस्टिंग मिली. वहां उन्‍होंने लोगों से करीबी के लिए आदिवासी भाषा संताली सीखी. सिमडेगा में अनुमंडल दंडाधिकारी रहते हुए उन्‍होंने जुआ रैकेट का भंडाफोड़ किया. ये ऐसे शुरुआती अनुभव थे, जिन्होंने उन्हें ग्राउंड से जोड़कर रखा. बाद में यही दृष्टिकोण, उन्‍हें बिहार के सबसे भरोसेमंद अफसरों की कतार में सबसे आगे खड़ा करने वाला था.

जहां भी डीएम रहे, वहां अलग पहचान छोड़ी

कटिहार के डीएम रहते उन्होंने जिला अस्पताल में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP) मॉडल लागू किया. उस समय यह अपने तरह का पहला प्रयोग था और जिलेवासियों के लिए भी नई बात थी. पीठ पीछे कुछ आलोचना भी हुई, लेकिन कुछ ही समय में अस्‍पताल की तस्‍वीर बदल चुकी थी. छपरा में जब डीएम रहे तो वहां भी अलग छाप छोड़ी. सोनपुर पशु मेले में अश्लीलता पर रोक लगाई. साथ ही सिनेमाघरों में CCTV लगाना अनिवार्य किया.

प्रत्‍यय के बारे में कहा जाता है कि सरकार को जब कहीं संकट दिखा, उनकी तैनाती कर दी. दीवारों में सीलन, टूटी हुई कुर्सियां और फटे हुए परदे, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (BRPNN) के दफ्तर का हाल किसी कबाड़खाने से कम नहीं था. घाटे में तो था ही निगम. यानी हालत इतनी खराब थी कि राज्य सरकार भी शायद इसे बंद करने का मन बना चुकी थी.

जब वे बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के चेयरमैन बने, तब निगम दिवालिया होने की कगार पर था. फंड की कमी, प्रबंधन में ढीलापन और परियोजनाओं में देरी… यही इसकी पहचान थी. और फिर आए प्रत्‍यय अमृत, जिनके नेतृत्व में निगम ने कर्ज से उबरकर मुनाफे में वापसी की. पूरे बिहार में सड़कों और फ्लाईओवर का जो जाल दिखता है, वो प्रत्‍यय अमृत के प्रयासों का नतीजा है.

बिहार की सूरत बदलने में अहम रोल 

गंगा पाथ और AIIMS-दिघा फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स हों या फिर ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहर गांव-गांव बिजली पहुंचाने के अभियान तक, उनके हर काम ने बिहार की सूरत बदलने में अहम योगदान दिया. काफी मुश्किल काम को भी उन्‍होंने संभव किया. 2015 विधानसभा चुनाव से पहले बिजली की स्थिति में सुधार उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है.

नीतीश कुमार के ‘भरोसेमंद’  

बिहार की नौकरशाही में गिने-चुने अफसर हैं जिन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पूरा भरोसा हासिल है, इनमें प्रत्यय अमृत सबसे पहल आते हैं. विवादों से दूर रहते हुए काम करना, ईमानदारी, सादगी और परिणाम देने की क्षमता उनकी पहचान बन चुकी है.

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