बिहार में सवर्ण आयोग की प्रासंगिकता

बिहार में सवर्ण आयोग की प्रासंगिकता

बैठकों का दौर जारी, सूचनाएं एकत्रित की जा रहीं

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✍🏻 राजेश पाण्डेय

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भारत‌ वर्ष में कई प्रकार के आयोग समय-समय बनाए जाते रहे हैं। प्रत्येक राज्य सरकारों ने भी अपने जनमानस के लिए इस प्रकार के आयोग का गठन करती रही है।
प्रश्न यह है कि बिहार में सवर्ण आयोग की क्या आवश्यकता है और आने वाले भविष्य में इसके क्या निहतार्थ होंगे?

इस पर सूक्ष्मता से ग़ौर किया जाए तो यह आयोग अपनी विभिन्न बैठकों में तथाकथित सवर्ण जाति के अंदर चल रहे विभिन्न कालों (अतीत, वर्तमान और भविष्य) हेतु चिंतन-मंथन को आत्मसात करना चाहती है। वह निरंतर सोच रही है कि मंडल आयोग लागू होने के बाद आरक्षण को लेकर इनके अंदर कैसी भावना व्याप्त हैं। साथ ही पिछड़े वर्ग एवं अन्य की जनसंख्या 75% तक पहुंच गई है अब अगर आरक्षण का दायरा 50% से अधिक किया जाता है तो इन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक व आर्थिक स्थिति पर भी यह आयोग गहन मंथन करेगा। सबसे बढ़कर हमारे रोष, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष को भी पृष्टांकन एवं पंक्तिबद्ध करते हुए बिहार सरकार तक पहुंचने का प्रयास करेगा। क्योंकि हमारे देश में आरक्षण एक नीति नहीं राजनीति है।

तत्पश्चात आयोग के प्रतिवेदन पर देश के तथाकथित विद्वान आईएएस अधिकारियों द्वारा विश्लेषण करके संबंधित विभाग में एवं सरकार के पास पहुंचा दिया जाएगा। इस प्रकार के आयोग को मैं सकारात्मक नहीं बल्कि सूचना एकत्र करने के नकारात्मक अर्थ में प्रयोग करता हूं क्योंकि इससे समाज का और बंटवारा ही होगा। तथाकथित सवर्ण जाति अपनी वृत्ति एवं रहन-सहन हेतु पलायन कर जाएगी और फिर बांग्लादेश के जैसी स्थिति हो जाएगी।


बिहार में पिछले 35 वर्षों से‌‌ सामाजवादी विचार धारा की सरकार चल‌ रही‌ है, जिसका मूल ध्येय सभी प्रकार के संसाधनों का‌‌ उचित व समुचित बंटवारा है। अर्थात आज आपके पास जो भी पैतृक संपत्ति है उसके संरक्षण एवं सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न उपस्थित हो गये हैं। येन-केन-प्रकारेण आपकी भूमि समेत अन्य सम्पत्ति पर भू-माफिया की पैनी नजर है। इसके निदान के लिए प्रशासन कुछ नहीं करती हैं,इसका मुझे पिछले अठारह वर्षों का‌ गहरा अनुभव है।

बहरहाल सरकार मध्यम मार्ग अपना कर सभी को संतुष्ट करना चाहती है। जहां तक इसके प्रासंगिकता का प्रश्न है तो इस प्रकार के आयोग का गठन समय की आवश्यकता है ताकि प्रत्येक तथाकथित सवर्ण जातियों में इस बात का बोध हो कि सरकार हमारे लिए अवश्य ही कुछ कर रही है और आगे भी करेगी।

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