तेजस्वी-राहुल की वोट अधिकार यात्रा

तेजस्वी-राहुल की वोट अधिकार यात्रा

✍️ राजेश पाण्डेय

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में सीवान नगर के मुख्य मार्ग ऊपर तेजस्वी-राहुल की वोट अधिकार यात्रा शुक्रवार की देर शाम बड़ी गर्मजोशी के साथ हुई। नगर के बबुनिया मोड़ पर एक सभा का भी आयोजन किया गया। ग़ौरतलब है कि हजारों की संख्या में गांव-गांव से आये जन सैलाब अपने नेता को देखने-सुनने के लिए उमड़ पड़ा था।
लगभग रात 10:00 बजे तक नगर के मुख्य मार्गों पर वोट अधिकार यात्रा को लेकर जनता डटी रही ।
जिला प्रशासन ने सुरक्षा के बेहतर प्रबंध किए थे। नगर में प्रवेश के सारे मार्ग 3:00 बजे से ही बंद कर दिए गए थे। लोगों को एक कोने से दूसरे कोने जाने में असुविधा हुई लेकिन प्रशासन मुस्तैद रहा।

सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों ने भी समय एवं अवसर का भरपूर लाभ उठाते हुए अपने इष्ट मित्र से मिले और नेताओं का भाषण भी सुना।
राहुल जी की वोट अधिकार यात्रा बिहार में 16 दिन में 1300 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए कुल 26 स्थान पर परिभ्रमण करेगी। इस यात्रा में अधिकतर वे क्षेत्र हैं जो एक खास वर्ग की जनसंख्या बहुल वाले इलाके हैं।

क्यों हो रही है वोट अधिकार यात्रा?

हरियाणा एवं महाराष्ट्र में कांग्रेस की बुरी तरह से हार के बाद राहुल गांधी को समझ में आ गया है कि मेरी हार के पीछे वोट चोरी है।
यह वोट चोरी चुनाव आयोग व मोदी सरकार से मिलकर हो रही है। इसके लिए उन्होंने कई स्थान पर पीपीटी प्रस्तुत किया है। अब बिहार में भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की विशेष ग्रहण पुनरीक्षण प्रक्रिया लगाकर 65 लाख फर्जी मतदाताओं को सूची से हटा दिया है। राहुल गांधी का कहना है कि यह मतदाता दलित है, गरीब है, अल्पसंख्यक हैं, जो हमारे वोटर हैं, इन्हें वोट से वंचित करके चुनाव आयोग एवं मोदी सरकार बिहार में चुनाव से पहले ही जीत का दावा कर रही है। ऐसे में जनता को जागरूक करने के लिए वोट अधिकार यात्रा आवश्यक है कि मोदी सरकार एक-एक करके आपका अधिकार छीन रही है।

सुप्रीम कोर्ट ,चुनाव आयोग एवं सरकार का तर्क

वोट चोरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई की गई। कोर्ट ने सरकार एवं आयोग के कई प्रश्न किये और अंततः कहा कि आपने जो 65 लाख वोटरों के नाम हटायें हैं उसका पुरा ब्यौरा प्रस्तुत करें और जिले में एक सूचना पट पर अंकित कर दें। चुनाव आयोग ने ऐसा किया, उसका कहना था कि इसमें हजारों वोटो की मृत्यु हो चुकी है, सात लाख ऐसे वोटर हैं जिनका दो जगह नाम है। लाखों ऐसे वोटर है जो विस्थापित हो गए हैं क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने का कार्य तो निरंतर चलता रहता है परंतु काटने का कार्य विशेष अवसर पर ही होता है जो इस समय हो रहा है।

चुनाव आयोग अपने ऊपर लगे आरोपों का विस्तार पूर्वक एवं विधिवत उत्तर 17 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय के प्रेस वार्ता में किया, साथ ही उसने तल्ख अंदाज में बिना नाम लिए हुए कहा कि इस तरह के झूठ फैलाने के लिए आपको देश से एक हफ्ते के भीतर माफी मांगनी होगी या आपको शपथ पत्र देना होगा। परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ और 17 अगस्त से ही राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा बिहार में निर्बाध रूप से जारी है। आशा‌ ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में बंगाल एवं तमिलनाडु में भी वोट अधिकार यात्रा आयोजित करनी पड़ेगी।


बहरहाल हम सभी को समझना चाहिए कि चुनाव आयोग संविधान का मूल भाग है, वह अपने संवैधानिक दायित्व की तरह कार्य करता है, वह भारत सरकार या मोदी सरकार का हिस्सा नहीं है कि उसे सुझाव या निर्देश दिया जा सके। वह केवल संविधान के प्रति जिम्मेदार है। क्योंकि एक बार स्वर्गीय राजीव गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए अपने कैबिनेट सचिव टी.एन.शेषन से एक पत्र चुनाव आयोग को भेजने को कहा था जिसमें अमुक-अमुक तिथि पर ही देश में चुनाव कराए जाएं, ऐसा निर्देश था। परन्तु कैबिनेट सचिव ने ऐसा करने से टालमटोल किया क्योंकि उन्हें पता था कि चुनाव आयोग संविधान का भाग है, वह सरकार का हिस्सा नहीं है।

ऐसे में वर्तमान मोदी सरकार को चुनाव आयोग के साथ जोड़कर भला-बूरा कहना मुख्य मुद्दों से जनता को भटकना है। वहीं राहुल गांधी के पास विकास का ऐसा कोई मॉडल नहीं है जो वह हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में चला रखा हो, जिसका वह प्रस्तुतीकरण बिहार में कर सके। वह केवल अपने थोथा तर्क से जनता को भ्रमित कर रहे हैं।

बिहार सरकार पर तंज़ एवं यात्रा के निहितार्थ

पिछले 20 वर्षों से नीतीश सरकार बिहार में कार्य कर रही है उसने सभी विभागों को एक संरचनात्मक आकार एवं स्वरूप दिया है। आम व्यक्ति की आवश्यकता सड़क, बिजली, पानी एवं कई सुविधाओं को उस तक पहुंचाया गया है। अनाज भी मिल रहा है यानी सर्विस डिलीवरी सिस्टम मजबूत हुआ है। जो भ्रष्टाचार है वह व्यक्तिवादी है क्योंकि वह सरकार से नहीं, हमारे समाज की उपज है। आप अपने हाथ में कानून को लेकर इसे समाप्त नहीं कर सकते। परन्तु इसके पीछे भू-माफिया, बालू माफिया, शराब माफिया ने सरकार की नींद अवश्य उड़ा रखी है, जिस पर सरकार कार्य कर रही है, नौकरशाह इसे समाप्त करने के लिए मंथन भी कर रहे हैं। जदयू एवं भाजपा के पास नेताओं की लंबी कतार है, उसका संगठन है। ऐसे में यह दल मजबूती के साथ इस वर्ष चुनाव में भी खड़े होंगे।

राहुल गांधी को यह ज्ञात होना चाहिए कि अवैध प्रवासियों के कारण पहले असम, बंगाल और अब बिहार एवं झारखंड की डेमोग्राफी बदल रही है। बिहार के चार जिले किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया‌ एवं अररिया में बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या ने अपना डेरा जमा रखा है,उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड एवं जमीन के कागजात सब कुछ उपलब्ध है। ऐसे में यह समस्या धीरे-धीरे कश्मीर की तरह जनता को परेशान कर रही है, इसलिए कुछ जिलों में जनता की लड़ाई अपने अस्तित्व को बचाये रखनी को लेकर‌ रह गई है।

राजद की स्थिति

राजद अभी नहीं तो कभी नहीं की लड़ाई में उतर चुका है। सामाजिक न्याय का दम्भ भरे यह व्यक्तिवादी दल वोट को बिखरने से बचाने के लिए कांग्रेसियों व अन्य दलों को साथ में ले लिया है। जातिगत राजनीति एवं एम-वाई समीकरण से आगे ले जाकर यह सत्ता पाना चाहती है। लेकिन सेवा के नाम पर नीतीश सरकार ने राजद के लिए बहुत कुछ छोड़ा नहीं है। अब राजद भ्रष्टाचार के प्रश्न पर जितना सरकार को घेर ले, परन्तु कुछ बहुत स्पेस नहीं है। नौकरी के बदले जमीन घोटाला एवं पिछले 15 वर्षों के शासनकाल ने राजद का पीछा नहीं छोड़ा है। अल्पसंख्यक को भाजपा का डर, जदयू का कुशासन एवं नीतीश कुमार की तबीयत राजद को कितना संजीवनी देगी, यह तो समय बताएगा।

बरहाल वोट अधिकार यात्रा ने जनता को जागृत करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर रहा है,पर बिहार की जनता काफी जागरुक है। समाज में पलायन, भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दे हैं जिन पर नेता आने वाले कुछ दिनों में अपनी बातें खुलकर रखेंगे, हम सभी को अवलोकन करने में सहूलियत होगी। फिलहाल एक विमर्श गढ़ा जा रहा है, जो इस चुनाव की वैतरणी को पार लगा दें।

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