उर्वरक अनुज्ञप्ति हेतु 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण के द्वितीय बैच का हुआ समापन
श्रीनारद मीडिया, के के सिंह सेंगर, एकमा, छपरा (बिहार):

कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी में उर्वरक अनुज्ञप्ति (खाद लाइसेंस) के लिए आयोजित 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय बैच का समापन शुक्रवार को सफलतापूर्वक किया गया। यह प्रशिक्षण 2 से 16 जनवरी 2026 तक चला, जिसमें सारण जिले के 15 प्रखंडों से आए कुल 40 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को पोषक तत्व प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विशेषज्ञों तथा सारण जिले के कृषि से जुड़े पदाधिकारियों ने व्याख्यान दिए। इसके साथ ही एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी मिल सकी।
समापन समारोह के अवसर पर सभी 40 प्रशिक्षणार्थियों के बीच प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र चंदोला ने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन एक स्थायी कृषि पद्धति है, जो मिट्टी एवं फसल की आवश्यकता के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों की संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करती है। इससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी संभव होता है। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों, गोबर खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों का एकीकृत उपयोग शामिल है, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है, फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार बढ़ती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आग्रह किया कि वे यहां से प्राप्त ज्ञान को अन्य किसानों तक भी पहुंचाएं।
कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. सुषमा टम्टा ने “समेकित” शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जैविक, रासायनिक एवं स्थानीय संसाधनों का संतुलित उपयोग ही खेती को टिकाऊ बना सकता है। वहीं डॉ. विजय कुमार ने बताया कि एक मुट्ठी मिट्टी में लाखों सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कम जुताई, फसलों की सीधी बुआई और नियमित मिट्टी जांच पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी चूल्हन राम ने खाद की दुकान के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे किसानों को रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग एवं जैविक उर्वरकों के अधिक प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी के अमितेश कुमार गौरव, रामा रंजन, राकेश कुमार, उमाशंकर कुमार, अवनीश पांडेय एवं संतोष कुमार मौजूद रहे और सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
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