दाढ़ी बाबा की प्रतिमा पर प्रत्येक दिन माल्यार्पण होना चाहिए- प्रो. प्रर्मेद्र कुमार वाजपेयी, कुलपति
डी.ए.वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दाढ़ी बाबा की 143वीं जयंती मनाई गई
✍🏻 राजेश पाण्डेय
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सीवान नगर स्थित स्थानीय डी.ए.वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्वर्गीय वैधनाथ प्रसाद उर्फ दाढ़ी बाबा की 143वीं जन्मजयंती मनाई गई। महाविद्यालय के परिसर स्थित उनके प्रतिमा पर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमेन्द्र कुमार वाजपेयी ने माल्यार्पण कर उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किया। तत्पश्चात महाविद्यालय के सर्वोदय सभागार में एक समारोह का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए कुलपति महोदय ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि हम सभी को संकल्पित होकर इस महामानव के मार्ग पर चलना चाहिए।
1857 के बाद समाज में पुनर्जागरण का आरंभ होता है और कई संस्थाएं इसमें आगे बढ़कर आती हैं, जिनमें आर्य समाज एक था। जिसने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति किया और आधुनिक एवं वैदिक पद्धति के मेल से शिक्षा को समाज में अग्रसर किया। इससे समाज में नवजागरण का सूत्रपात हुआ। स्वत्व को बचाने का आंदोलन आर्य समाज द्वारा प्रारंभ किया गया था।

जातीय उन्माद को समाप्त करने में आर्य समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। क्योंकि अंग्रेज़ जाति के आधार पर समाज की एकता को तोड़ देना चाहते थे। वे देश को जाति के आधार पर भी बांटना चाहते थे। जबकि भारत के अस्तित्व को बचाने का कार्य आर्य समाज ने अवश्य किया। आधुनिक एवं पुरातन के गठजोड़ से एक नए समाज को बनाने का कार्य संस्था ने किया। समरस समाज की स्थापना हेतु दाढ़ी बाबा ने भी अपने आर्य समाज के विचारों को शिक्षा रूपी कलश में आरोपित करने का कार्य किया।
उन्होंने भावनात्मक समरसता को स्थापित करने का कार्य किया। दाढ़ी बाबा की स्थापित संस्थाएं हमें यह शिक्षा देती हैं की शिक्षा का मतलब कुटुंब प्रबोधन होना चाहिए, इसे कैसे स्थापित किया जाए, इस पर सदैव चिंतन करना चाहिए, साथ ही हमें अपने पर्यावरण की भी चिंता करनी चाहिए। आज हम अपने संसाधनों का गलत प्रयोग करके अपने जीवन को संकट में डाल दिया है। जल का प्रदूषण, नदी का प्रदूषण एवं वायु का प्रदूषण समस्या बनकर हमारे जीवन पर ग्रहण लगा रहे है।

सामाजिक रूप से हम उदासीन हो गए है। इसके निदान के लिए हम दाढ़ी बाबा के मार्गों पर चलकर इसमें आमूलचूल साकारात्मक परिवर्तन कर सकते हैं। प्रकृति को हम अपने श्रद्धा का केंद्र मानते है। जिसमें लगातार ह्रास आ रहा है। स्व का बोध समाप्त हो रहा है। इससे हमारे अतःश में मनुष्यता का बोध भी कम हो रहा है। नागरिक कर्तव्यों के प्रति हम उदासीन हो रहे है। हमारे समाज में वीआईपी संस्कृति व्याप्त हो गई है।
नागरिक कर्तव्यों के प्रति आदर्श स्थापित करना होगा। दाढ़ी बाबा की शिक्षा के मार्गों पर चलकर हम इसे पूरा कर सकते है। समाज को परिवार के रूप में परिवर्तित करना होगा ताकि यह समाज कुटुंब के रूप में उभरकर आये। यही कामना हमारे संतो ऋषियों की रही होगी, जिससे हमने विश्व को वसुधैव कुटुंबकम का विचार दिया था। समाज में कुछ जानने समझने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा की आवश्यकता है।
दाढ़ी बाबा इन सभी विचारों को आत्मसात करते हुए समाज को यह मंत्र 1941 में डी.ए.वी संस्था को आरंभ करके दिया था। संसार को जीतने के लिए श्रीकृष्ण व अर्जुन की आवश्यकता है लेकिन इसके साथ विनय, धैर्य, प्रबंधन, संयम एवं अनुशासन को भी ध्यान में रखना होगा। आज के दिन हम यह संकल्प लें कि उनकी प्रतिमा पर प्रत्येक दिन माल्यार्पण होना चाहिए।

संध्या के समय अगर संभव हो तो एक दीया अवश्य जलाया जाये। क्योंकि सही के रास्ते में सदैव भटकाव होता है, सही मार्ग पर जाने के लिए एक दीया अवश्य जलाना चाहिए। उत्सव धर्मी होने से एक दूसरे में संबंध बढ़ता है। एक दूसरे के प्रति आदर, सम्मान, प्रयास, सहायता एवं भावनात्मक रूप से शिक्षित करने के लिए हम सभी यहां एकत्रित हुए है।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के व्याख्याता डॉ. धनंजय यादव ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के पूर्व सेवानिवृत प्राचार्य प्रो. बी.पी.एन पाठक ने किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि दाढ़ी बाबा समाज को जात-पात से इतर एक उन्नत समाज बनाना चाहते थे। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी दाढ़ी बाबा में समाज को गढ़ने की अद्भुत क्षमता थी। मौसम के प्रतिकूल होने पर भी हम सभी यहां उपस्थित हैं यह दाढ़ी बाबा के प्रति सम्मान है।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. रामानंद राम ने कहा कि छात्रों की समस्याओं का निदान किया जाएगा। सीवान का यह सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय है जिससे पढ़कर हजारों छात्रों ने अपने जीवन को गढ़ा है। दाढ़ी बाबा के जन्मजयंती हम सभी शिक्षकों का कर्तव्य है कि हम छात्रों को लगन से पढ़ायें। इस मौके पर स्थानीय राजा सिंह महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. अजय पड़ित एवं डी.ए.वी के सभी व्याख्याता एवं छात्र, पूर्व छात्र डाॅ. गणेश दत्त पाठक, राजेश पाण्डेय उपस्थित रहे।

