भारत और चीन के रिश्तों को किसी तीसरे देश के लेंस से देखने की जरूरत नहीं- पीएम मोदी
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने दिए चार सुझाव
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों को किसी तीसरे देश के लेंस से देखने की जरूरत नहीं। इस बात को डोनाल्ड ट्रंप के लिए संदेश माना जा रहा है जिन्होंने भारत पर भारी टैरिफ लगा रखा है। विदेश मंत्रालय ने भी पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों, जैसे कि आतंकवाद और बहुपक्षीय मंचों में निष्पक्ष व्यापार पर साझा आधार के विस्तार को जरूरी माना है।
एससीओ सम्मेलन से इतर मुलाकात
मोदी और जिनपिंग की मुलाकात 31वें एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीदने पर भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। ट्रंप के इस फैसले के बाद पीएम मोदी जापान और चीन की यात्रा पर पहुंचे हैं। इसमें चीन की यात्रा इसलिए मायने रखती है क्योंकि प्रधानमंत्री सात साल के अंतराल पर यहां पहुंचे हैं। गलवान में भिड़ंत के बाद दोनों देशों के रिश्ते ठंडे पड़ गए थे। लेकिन अब पीएम मोदी इन रिश्तों में नई गर्माहट फूंकने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
झगड़े में न बदलें मतभेद
विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने यह बात कही कि किसी भी तरह का मतभेद झगड़े में नहीं बदलना चाहिए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक मोदी और शी ने विश्व व्यापार को स्थिर करने में अपनी दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को स्वीकार किया। साथ ही सीमा विवाद के निष्पक्ष, तर्कसंगत और आपसी समाधान के बारे में भी बात की। मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में कजान (रूस) में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक गति और स्थिर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देश विकास में भागीदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं। उनके मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए
आपसी संबंधों में मजबूती जरूरी
बयान में आगे कहा गया है कि आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर भारत-चीन और उनके 2.8 अरब लोगों के बीच एक स्थिर संबंध और सहयोग जरूरी है। साथ ही यह दोनों देशों के विकास और प्रगति के साथ-साथ 21वीं सदी के रुझानों के अनुरूप एक बहुध्रुवीय विश्व और एक बहुध्रुवीय एशिया के लिए भी इसकी जरूरत है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, सीधी उड़ानों और वीजा के जरिए लोगों के बीच संबंधों को भी सकारात्मक कदम बताया गया। इसमें भी कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करना खास है।
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने दिए चार सुझाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को मुलाकात हुई। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया है कि इस दौरान दोनों के बीच क्या बातें हुईं। उन्होंने बताया कि चीन के राष्ट्रपति ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए हैं। मिसरी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों की दीर्घकालिक वृद्धि और विकास के लिए अपने दृष्टिकोण साझा किए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच इस बात पर आम सहमति बनी कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण भारत-चीन संबंध दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं।
क्या थे जिनपिंग के चार सुझाव
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों को बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए हैं। जिनपिंग ने जो पहला सुझाव दिया है, वह रणनीतिक संवाद को मजबूती देना है। इसके अलावा उन्होंने आपसी विश्वास को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। तीसरा सुझाव, एक-दूसरे की चिंताओं का ख्याल रखने और चौथा सुझाव साझा हितों की रक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत देने के संबंध में था। पीएम मोदी ने भी इन सभी सुझावों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
ताकि सीमा पर बनी रहे शांति
चीनी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने संबंधों के निरंतर और सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की जरूरत पर बल दिया। मिसरी ने बताया कि मोदी और शी का मानना था कि भारत और चीन के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिति किसी न किसी रूप में समग्र संबंधों पर प्रतिबिंबित होगी। सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना संबंधों के समग्र विकास के लिए बीमा की तरह है।
एइनार टैंगन ने कहा कि ट्रंप के मामले में, बहुत सारी बयानबाजी है, लेकिन हकीकत कुछ और है। टैरिफ के बारे में, उन्होंने और भी स्पष्ट रूप से कहा, “यह तो सरासर बदमाशी है, कक्षा का सबसे बड़ा बच्चा घूम-घूम कर लोगों के लंच के पैसे चुरा रहा है। यह घिनौना है।” उन्होंने ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए आगे कहा, “वह कहते हैं कि अमेरिका दुनिया को धमका नहीं रहा है।
जब आप ‘पेंगुइन’ समेत 180 पत्र भेजते हैं और कहते हैं कि आप उन पर टैरिफ लगा रहे हैं, तो यह कोई कूटनीति नहीं है।” “पेंगुइनों को पत्र” का संदर्भ उस समय से है जब सुदूर ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र हर्ड और मैकडॉनल्ड द्वीप समूह को ट्रंप की व्यापक टैरिफ योजना की सूची में डाल दिया गया था, जबकि इन द्वीपों पर कोई मानव आबादी नहीं है और ये द्वीप वास्तव में अपनी पेंगुइन आबादी के लिए जाने जाते हैं।
भारत-चीन समीकरण पर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, “फसल प्राप्त करने के लिए आपको बीज बोने होंगे। मुझे लगता है कि वे अक्टूबर में बोए गए थे। उन्होंने 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के कजान में मोदी-शी बैठक का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “सीमाओं के दोनों ओर सैनिकों की संख्या कम करना सुरक्षा के लिहाज से बहुत अच्छा होगा। विश्वास बनाने में समय लगेगा। लेकिन, आर्थिक मोर्चे पर, उन्हें और प्रगति की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि यह लेन-देन पर आधारित है… और कई आशाजनक चीजें पहले से ही प्रगति पर हैं।