हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि : राष्ट्रीय खेल दिवस पर बच्चों में उमड़ा जोश और उत्साह
श्रीनारद मीडिया, भगवानपुर हाट, सीवान (बिहार):
सीवान जिला के राजकीयकृत मध्य विद्यालय ब्रह्मस्थान, भगवानपुर हाट में शुक्रवार को राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके खेल कौशल व योगदान को याद किया। पूरा विद्यालय प्रांगण खेल भावना और उत्साह से सराबोर नजर आया।
सुबह की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई, जिसमें विद्यालय के बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रभात फेरी जब गाँव की गलियों और चौक-चौराहों से गुज़री तो वातावरण “ध्यानचंद अमर रहें”, “खेलेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया” और “जो खेलेगा वही खिलेगा” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इन नारों ने पूरे क्षेत्र में खेलों के प्रति जागरूकता और उमंग का संदेश फैलाया। ग्रामीण भी बच्चों की इस उमंग को देखकर प्रभावित हुए और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।
प्रभात फेरी के बाद विद्यालय परिसर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कबड्डी प्रतियोगिता का रोमांच देखते ही बन रहा था। लड़कों की टीम में अब्दुल हमीद टीम और ध्यानचंद टीम के बीच जबरदस्त मुकाबला हुआ। दोनों ओर से खिलाड़ियों ने अपनी पूरी ताकत और रणनीति का परिचय दिया, लेकिन अंततः अब्दुल हमीद टीम ने विजय हासिल की। वहीं बालिकाओं की कबड्डी प्रतियोगिता भी कम रोचक नहीं रही। लक्ष्मीबाई और रमाबाई टीम आमने-सामने हुईं, जिसमें कड़ी टक्कर के बाद रमाबाई टीम विजयी रही। इन खेलों ने बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और आपसी सहयोग की भावना को और प्रबल किया।
प्रधानाध्यापक विनोद कुमार शुक्ला ने इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद का खेल कौशल अद्वितीय था। उन्होंने कहा, “हॉकी की स्टिक पर उनका नियंत्रण इतना शानदार था कि गेंद मानो चुंबक की तरह उनसे चिपकी रहती थी। दुनिया उन्हें आज भी हॉकी के जादूगर के रूप में याद करती है।” वहीं शिक्षक श्रीकांत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “ध्यानचंद ने भारत को हॉकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उनका नाम आज भी खेल प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और नई पीढ़ी को उनसे सीख लेनी चाहिए।”
विद्यालय की शिक्षिका सुल्तान अब्बासी ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और टीम भावना भी सिखाते हैं। शिक्षिका बबीता कुमारी और गजला खातून ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज की बालिकाएँ भी खेलों के क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और वे देश का नाम रोशन कर सकती हैं। शिक्षक राजीव मणि त्रिपाठी और लालू प्रसाद ने भी खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेलों का संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय परिवार और छात्रों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों ने न केवल खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाई बल्कि मेजर ध्यानचंद के आदर्शों से प्रेरित होकर खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि “जो खेलेगा वही खिलेगा और खेल ही से राष्ट्र मजबूत होगा।”
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