मन की बात में पीएम मोदी ने क्या कुछ कहा?

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले देशवासियों से मन की बात कार्यक्रम के जरिए जुड़े। 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं, फर्स्ट वोटर्स को मतदान करने के लिए प्रेरित किया और लोगों से स्टार्टअप में हो रहे नए इनोवेशन पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह 2026 का पहला ‘मन की बात’ है। कल, 26 जनवरी को, हम सब अपना गणतंत्र दिवस मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। यह दिन, 26 जनवरी, हमें अपने संविधान बनाने वालों को श्रद्धांजलि देने का मौका देता है। आज, 25 जनवरी भी बहुत खास दिन है। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है… मतदाता दिवस। मतदाता लोकतंत्र की आत्मा होता है।”

फर्स्ट वोटर्स से क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा, “आमतौर पर, जब कोई 18 साल का होता है और वोटर बनता है तो इसे जिंदगी का एक नॉर्मल पड़ाव माना जाता है। हालांकि, यह मौका असल में किसी भी भारतीय की जिंदगी में एक बहुत बड़ा पड़ाव होता है। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि हम अपने देश में वोटर बनने का जश्न मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर बधाई देते हैं और जश्न मनाते हैं… उसी तरह, जब भी कोई युवा पहली बार वोटर बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या शहर मिलकर उसे बधाई दे और मिठाई बांटे। इससे वोटिंग के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और यह भावना मजबूत होगी कि वोटर होना कितना जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं देश के उन सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं जो चुनावी प्रक्रिया में शामिल हैं और हमारे लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं। आज ‘वोटर दिवस’ पर मैं अपने युवा दोस्तों से एक बार फिर अपील करूंगा कि 18 साल के होते ही वे खुद को वोटर के तौर पर रजिस्टर करवाएं। इससे उस कर्तव्य की भावना पूरी होगी जिसकी उम्मीद संविधान हर नागरिक से करता है और इससे भारत का लोकतंत्र भी मजबूत होगा।”

स्टार्टअप इंडिया पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आजकल मैं सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प ट्रेंड देख रहा हूं। लोग 2016 की अपनी यादों को फिर से जी रहे हैं। इसी भावना के साथ, आज मैं भी अपनी एक याद आपके साथ शेयर करना चाहता हूं। दस साल पहले, जनवरी 2016 में हमने एक महत्वाकांक्षी यात्रा शुरू की थी। हमने तब महसूस किया था कि भले ही यह छोटी हो, लेकिन यह देश के भविष्य के लिए, युवा पीढ़ी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उस समय, कुछ लोग समझ नहीं पाए थे कि आखिर यह सब क्या है!”

उन्होंने आगे कहा, “दोस्तों, जिस यात्रा की मैं बात कर रहा हूं, वह है स्टार्ट-अप इंडिया की यात्रा। इस शानदार यात्रा के हीरो हमारे युवा दोस्त हैं। उन्होंने अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर जो इनोवेशन किए हैं, वे इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। ये स्टार्टअप लीक से हटकर काम कर रहे हैं; वे ऐसे सेक्टर्स में काम कर रहे हैं जिनके बारे में 10 साल पहले सोचना भी मुश्किल था।”

पीएम ने आगे कहा, “एआई, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, सेमीकंडक्टर्स, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी… आप जिस भी सेक्टर का नाम लें, आपको उस सेक्टर में कोई न कोई इंडियन स्टार्टअप काम करता हुआ मिल जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा दोस्तों को सलाम करता हूं जो किसी न किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “आज ‘मन की बात’ के जरिए, मैं अपने देशवासियों से, खासकर इंडस्ट्री और स्टार्टअप से जुड़े युवाओं से अपील करना चाहता हूं। भारत की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। पूरी दुनिया भारत को देख रही है। ऐसे समय में हम सबकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। वह जिम्मेदारी है क्वालिटी पर जोर देना। ‘जैसा चल रहा है, चलने दो… काम हो जाएगा… किसी तरह निकल जाएगा’ वाला जमाना अब खत्म हो गया है। आइए, इस साल हम पूरी ताकत से क्वालिटी को प्राथमिकता दें।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारा एकमात्र मंत्र हो क्वालिटी, क्वालिटी और सिर्फ क्वालिटी। कल से बेहतर क्वालिटी आज। हम जो भी बनाएं, उसकी क्वालिटी बेहतर करने का संकल्प लें। चाहे हमारे टेक्सटाइल हों, टेक्नोलॉजी हो या इलेक्ट्रॉनिक्स… यहां तक कि पैकेजिंग भी; इंडियन प्रोडक्ट का मतलब होना चाहिए – ‘टॉप क्वालिटी’।”

पीएम ने कहा, “आइए, हम एक्सीलेंस को अपना बेंचमार्क बनाएं। हम संकल्प लें कि क्वालिटी में कोई ढिलाई नहीं होगी, न ही क्वालिटी से कोई समझौता होगा और मैंने लाल किले से कहा था – ‘जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट’। ऐसा करके ही हम ‘विकसित भारत’ की तरफ अपनी यात्रा को तेज कर पाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में बताया कि जगदीश प्रसाद अहिरवार ने अपने वन सेवा कार्यकाल के दौरान जंगलों में पाई जाने वाली 125 से अधिक औषधीय पौधों की पहचान कर उनके बारे में विस्तृत जानकारी संकलित की। उन्होंने इन पौधों के स्थानीय नाम, औषधीय गुण, वैज्ञानिक उपयोग और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़ी जानकारियों को सुव्यवस्थित रूप से दर्ज किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्य वर्षों की निरंतर मेहनत, गहन अध्ययन और प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता का परिणाम है।

पारबती गिरी के साहस को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ओडिशा की इस बेटी ने मात्र 16 वर्ष की कोमल आयु में महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाई थी।’ जेल की सलाखों और ब्रिटिश हुकूमत का डर भी उनके हौसले को डिगा नहीं सका था।समाज के प्रति उनके समर्पण के कारण ही उन्हें ‘पश्चिमी ओडिशा की मदर टेरेसा’ के गौरवपूर्ण नाम से पुकारा जाता है।

आदिवासी कल्याण को समर्पित रहा जीवन

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि आजादी के बाद भी पारबती गिरी रुकी नहीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा, आदिवासी कल्याण और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में लगा दिया।

उन्होंने कई अनाथालयों की स्थापना की, जो आज भी उनके सेवा भाव का प्रमाण हैं। मोदी ने कहा, ‘उनका प्रेरक जीवन आने वाली हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा।’

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