हार के साथ ही इंग्लैंड ने 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है

हार के साथ ही इंग्लैंड ने 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले का मानना है कि लॉर्ड्स टेस्ट में रविंद्र जडेजा को आखिरी ओवरों में शोएब बशीर जैसे स्पिनर के खिलाफ खुद आक्रामक होकर खेलना चाहिए था, बजाय इसके कि वह मोहम्मद सिराज को स्ट्राइक दें. जडेजा की नाबाद 61 रन की पारी भारत को लक्ष्य के बेहद करीब लेकर आई, लेकिन भारत को 22 रन से हार का सामना करना पड़ा.

कुंबले ने इस मैच की तुलना 1999 चेन्नई टेस्ट से की, जिसमें भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 12 रन से हार झेली थी. उस मैच में भी टीम जीत के करीब थी लेकिन आखिरी विकेट गंवा बैठी। कुंबले ने कहा, “सिराज का आउट होना मुझे जवागल श्रीनाथ का आउट होना याद दिला गया. बिल्कुल वही स्थिति थी.”

जडेजा को खुद उठाना चाहिए था जोखिम

कुंबले का मानना है कि जडेजा ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर टीम को वापसी जरूर दिलाई, लेकिन उन्हें स्पिनर्स के खिलाफ जोखिम लेकर रन बनाने चाहिए थे. उन्होंने कहा,”जडेजा को देखना चाहिए था कि किन गेंदबाजों पर आक्रामक खेला जा सकता है. क्रिस वोक्स, जो रूट और बशीर जैसे गेंदबाजों पर जोखिम लिया जा सकता था, क्योंकि गेंद ज्यादा टर्न नहीं हो रही थी.”

उन्होंने कहा कि जडेजा ने सिराज को बशीर का पूरा ओवर खेलने दिया, जो एक खतरनाक फैसला साबित हुआ. “अगर किसी को रिस्क लेना था तो वो जडेजा ही होने चाहिए थे.”

जडेजा की पारी शानदार

कुंबले ने जडेजा की जुझारू पारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने एक चमत्कारी पारी खेली और भारत को जीत के बेहद करीब पहुंचाया. “जब 82 पर सात विकेट गिर चुके थे, तब बुमराह और सिराज के साथ मिलकर स्कोर को दोगुना करना अविश्वसनीय था.”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को दोनों पारियों में 65 अतिरिक्त रन देना भारी पड़ा, और यह भी हार का बड़ा कारण बना. कुंबले के अनुसार, सिराज के कंधे पर जोफ्रा आर्चर की गेंद लगने के बाद उनका ध्यान भटक गया और वह दबाव में आ गए, खासकर जब चारों ओर से उन्हें घेरा गया.

‘टेस्ट क्रिकेट का बेहतरीन प्रचार’ रहा लॉर्ड्स मुकाबला

कुंबले ने लॉर्ड्स टेस्ट को “टेस्ट क्रिकेट का शानदार प्रचार” बताया और कहा कि इस सीरीज में हर सत्र में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. “तीनों टेस्ट मैच बेहद रोमांचक रहे हैं. इंग्लैंड 2-1 से आगे जरूर है, लेकिन अगर हर सत्र को देखें तो यह मुकाबला बराबरी का रहा है.”

उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक जीत हो सकती थी अगर भारत 22 रन और बना लेता, लेकिन छोटी-छोटी चूकें भारी पड़ गईं.

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