भारत में महिलाओं पर राज्य सरकारें जमकर पैसा लुटा रही है,क्यों?

भारत में महिलाओं पर राज्य सरकारें जमकर पैसा लुटा रही है,क्यों? 

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

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 भारत में महिलाओं के लिए नकद हस्तांतरण योजनाओं का चलन बढ़ रहा है। 2022-23 में केवल दो राज्य ऐसी योजनाएं चला रहे थे, लेकिन अब 12 राज्य ऐसी योजनाएं चला रहे हैं, जिनमें लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस साल महिलाओं पर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये नकद हस्तांतरण के रूप में खर्च करने का अनुमान है।

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के एक अध्ययन के अनुसार, इस वर्ष, राज्यों द्वारा महिलाओं को बिना शर्त नकद हस्तांतरण पर कुल मिलाकर 1,68,050 करोड़ रुपये या सकल घरेलू उत्पाद का 0.5% खर्च करने का अनुमान है। केवल दो साल पहले, 2022-23 में यह आंकड़ा सकल घरेलू उत्पाद के 0.2% से भी कम था। पहले सिर्फ दो राज्य यह योजना चला रहे थे। जबकि अब 12 राज्य ऐसा कर रहे हैं।

प्रमुख योजनाएं

दरअसल, कर्नाटक सरकारी की गृह लक्ष्मी योजना से लेकर मध्य प्रदेश सरकार की लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र सरकार की लड़की बहन योजना और बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना समेत अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग योजनाएं चलाईं जा रही हैं।

राज्य खजाने पर बढ़ रहा बोझ

गौरतलब है कि सभी राजनीतिक दल चुनावों से पहले मतदाताओं तक पहुंचने के लिए इन योजनाओं का उपयोग कर रहे हैं, इससे लाभार्थी भी खूब खुश हैं। लेकिन इसका बोझ राज्य के खजाने पर बढ़ रहा है।

इन राज्यों ने बढ़ाया आवंटन

बता दें कि असम और पश्चिम बंगाल, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इन सरकारों ने योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ा दिया है। पिछले वित्तीय वर्ष के संशोधित अनुमानों की तुलना में, असम ने परिव्यय में 31% की वृद्धि की है, जबकि बंगाल में यह वृद्धि 15% है। अक्टूबर 2024 में, झारखंड ने मुख्यमंत्री मियाँ सम्मान योजना के तहत मासिक भुगतान 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया।

वहीं, आरबीआई पहले ही राज्यों को सब्सिडी, कृषि ऋण माफी और नकद हस्तांतरण पर बढ़ते खर्च के बारे में आगाह कर चुका है। पीआरएस की रिपोर्ट कहती है, “बिना शर्त नकद हस्तांतरण योजनाओं को लागू करने वाले 12 राज्यों में से छह ने 2025-26 में राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है।

किस पर कितना खर्चा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूसीटी योजनाओं पर खर्च को छोड़कर राजस्व संतुलन को समायोजित करने पर इन राज्यों के राजकोषीय संकेतकों में सुधार दिखाई देता है। यानी, बाकी सभी चीजें स्थिर रहने पर, इन नकद हस्तांतरणों के परिणामस्वरूप कर्नाटक का राजस्व अधिशेष जीएसडीपी के 0.3% से बढ़कर जीएसडीपी के 0.6% के राजस्व घाटे में आ गया है। इसी तरह, ये हस्तांतरण मध्य प्रदेश के राजस्व अधिशेष को जीएसडीपी के 1.1% से घटाकर जीएसडीपी के 0.4% तक सीमित कर देते हैं।

 

 

 

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