एसआईआर के दौरान बीएलओ को धमकी न दी जाए-चुनाव आयोग
पश्चिम बंगाल में 26 लाख से ज्यादा ‘फर्जी वोटर’ है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस को चेतावनी दी है कि बीएलओ पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए। आयोग ने कहा है कि एसआईआर के दौरान बीएलओ को धमकी न दी जाए। इस बात पर भी जोर दिया गया है कि एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों को बिना किसी दबाव के काम करने दिया। उन्हें पूरी निष्पक्षता के साथ मृत, शिफ्ट हुए लोगों और डुप्लीकेट वोटर्स की डिटेल भरने दी जाए।
सभी चिंताओं को किया खारिज
बैठक के दौरान, चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल द्वारा जताई गई सभी चिंताओं का बिंदुवार खंडन किया। आयोग ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। चुनाव आयोग ने पार्टी से कहाकि वह नौ दिसंबर को दावे और आपत्तियां दाखिल करे, जब ड्राफ्ट इलेक्टोरल लिस्ट उनके साथ शेयर की जाएगी। तब तक, इसे उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे बीएलओ, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी के स्वतंत्र कार्य में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया गया।
किन घटनाओं का हवाला
हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में सुरक्षा उल्लंघन की घटनाओं का हवाला देते हुए, निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया कि ऑफिस को अधिक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। आयोग ने कोलकाता पुलिस आयुक्त को भी मौजूदा ऑफिस और नए प्रांगण दोनों में पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया। पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को एक औपचारिक पत्र भेजा गया है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बीएलओ पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा दबाव डाला न जाए या उन्हें डराया-धमकाया न जाए।
दूसरे फेज के बारे में भी बताया
अलग से, ईसीआई ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने देशव्यापी दिशा-निर्देशों के अनुसार झोपड़पट्टियों, उच्च इमारतों और गेटेड आवासीय कॉलोनियों में नए मतदान केंद्रों का निर्माण सुनिश्चित करें। एसआईआर के दूसरे चरण में प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए आयोग ने कहा कि लगभग 38 करोड़ फॉर्म, यानी 74 फीसदी से अधिक, डिजिटाइज किए जा चुके हैं।
इसने यह भी बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 99.43 फीसदी (50.68 करोड़) मतदाताओं को गणना फॉर्म मिल चुके हैं। इन्हें जमा करने के लिए अभी सात दिन बाकी हैं।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया जोरों पर चल रही है, इससे जुड़े कुछ न कुछ मामले सामने आ रहे हैं। अपना फर्जी वोट बैंक जाने के डर से सीएम ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है। वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग की ओर से एक बड़ा खुलासा किया गया है।
आयोग के मुताबिक अभी तक के पुनरीक्षण में यह फैक्ट सामने आए हैं उनके अनुसार पश्चिम बंगाल की मौजूदा वोटर लिस्ट में 26 लाख से अधिक वोटर्स के नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मेल नहीं खा रहे हैं। यानि एक तरह से राज्य में 26 लाख से अधिक वोटर ‘फर्जी’ हैं। आयोग के मुताबिक फाइनल रिपोर्ट में यह संख्या बढ़ भी सकती है।
इससे पहले भी राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक 10 लाख से ज्यादा SIR फॉर्म ऐसे हैं जिन्हें अब तक जमा नहीं कराया गया है। इससे साफ है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटर बने हुए हैं। चुनाव आयोग के इस खुलासे के बाद तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के होश उड़े हुए हैं।
ममता सरकार और टीएमसी नेता बीएलओ को तरह-तरह से धमका रहे
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान चलाया जा रहा है। ममता सरकार और टीएमसी नेताओं द्वारा बीएलओ को तरह-तरह से धमकाकर इसमें अड़चने पैदा की जा रही हैं। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में नवीनतम वोटर लिस्ट की तुलना जब पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान साल 2002 और 2006 के बीच विभिन्न राज्यों में तैयार की गई लिस्ट से की गई। तब जाकर वोटर लिस्ट की ये विसंगति सामने आई है कि 26 लाख से अधिक वोटर्स के नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मेल नहीं खा रहे हैं।
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, राज्य में वर्तमान में जारी SIR की प्रक्रिया के तहत बुधवार दोपहर तक पश्चिम बंगाल में छह करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र अपलोड कर दिए गए थे।

