जुनून के आगे उम्र हुआ बौना
उम्र तो बस एक संख्या है…..
✍🏻 राजेश पाण्डेय
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। इसकी एक बानगी पटना पुस्तक मेला में देखने को मिला।क्योंकि कहते हैं कि समय बड़ा बेरहम होता है, यह हमारे लिए रुकता नहीं वरन् सदैव गतिमान रहता है। इसकी रफ्तार ने काल तक की परवाह नहीं की है।
कमर अब सीधी नहीं हो रही है परन्तु पुस्तकों को पढ़ने का शौक़ मेला तक खींच लाई है। छड़ी एवं ऐनक के सहारे अभी भी संसार को समझने परखने के लिए पुस्तकें उपयोगी है। इनका आकर्षण घर की चाहरदिवारी में रोक नहीं पाई है।
पुस्तकों में उकेरे गए पंक्तियों में, शब्दों ने उद्वेलित कर दिया है। इन शब्दों के बीच में कुछ ऐसा छिपा है जिसमें जीवन का गुढ़ रहस्य है। जिसको जानने-समझने से आत्म अनुभूति का एहसास होता है और आगे भी होता रहेगा।

तस्वीर में इनके ठीक बगल में खड़े सात गुने छोटे बालक द्वारा तल्लीनता के साथ पुस्तकों को निहारना उस परंपरा के जीवित होने का प्रमाण है जो हमें अपने पूर्वजों से मिला है।यह परंपरा हमारी संस्कृति है, जिसमें जीवन का सार अंकित है।
बहरहाल ऐसे बुजुर्ग हमारे समाज की थाती है, जो पुस्तक प्रेमी होने के साथ-साथ अध्येता भी है। उनकी छवि पुस्तकों के संसार से हमें परिचित कराने का माध्यम बनती है। यह सुखद सहयोग है की इस प्रकार की छवि मेला की प्रासंगिकता को जीवंत बनाए रखती है।
” तेरी हड्डियों में बड़ी जान है तू इंसान बड़ा महान है,
पुस्तकों का प्रेमी तू शब्दों का चितेरा है,
पंक्तियों के बीच छुपे गूढ़ रहस्यों का अध्येता है,
तू इंसान बड़ा महान है”….

