राजनीति करने के लिए अपनी जमीन तक बेच देने वाले राजनीतिज्ञ थे सीवान के पूर्व सांसद जनार्दन तिवारी
अपनी बेबाकी, ईमानदारी, सरलता के कारण उनकी लोकप्रियता सदियों तक सीवान की राजनीति को देती रहेगी संदेश
✍️डॉक्टर गणेश दत्त पाठक
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

आज के दौर में जब किसी का सांसद या विधायक होना उनकी सात पुश्तों तक को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता दिखता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक ऐसे राजनीतिज्ञ भी सिवान में रहे हैं, जो अपनी राजनीति करने के लिए अपनी जमीन तक बेच डाले थे। अपने बेबाकी के कारण उनकी लोकप्रियता बढ़ती रही थी।
तत्कालीन पदाधिकारियों को उन्होंने जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से परिचय कराया और सांस्कृतिक अनुराग ऐसा कि 3 दिसंबर, 1972 को सिवान जिला के स्थापना दिवस पर गांधी मैदान में लोक नृत्य हड़का पर थिरक पड़े। जिसकी सराहना तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री केदार नाथ पांडेय करते हैं। ऐसे महान राजनीतिज्ञ सिवान के पूर्व सांसद जनार्दन तिवारी जी की आज जयंती है।
ईमानदारी बेमिसाल
सीवान की राजनीति के भीष्म पितामह स्वर्गीय जनार्दन तिवारी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी सादगी, ईमानदारी, बेबाकी, कर्मठता, सहजता, सरलता सदियों तक राजनीतिक संस्कृति के लिए मिसाल बनी रहेगी और एक सटीक मार्गदर्शन भी करती रहेगी। राजनीति के माध्यम से सेवा के दौरान उन्होंने अपने परिवार की हितों की परवाह भी नहीं की। वर्तमान में उनके पदचिन्हों पर चलते हुए उनके पौत्र भारतीय जनता पार्टी के सिवान के जिलाध्यक्ष के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
सेवा भावना को प्राथमिकता
सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी जी का जन्म सिवान के आकोपुर में एक साधारण किसान परिवार में 25 दिसंबर 1927 को हुआ था। बचपन में उन्होंने फिरंगी दासता को महसूस किया तो युवावस्था में उन्होंने देश को स्वतंत्र होते देखा। राजनीति में प्रवेश उनके सेवा भावना की परिचायक थी। सात बार उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा और चार बार उन्हें विजय श्री हासिल हुई। सात बार वे लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा और एक बार सांसद बने लेकिन उनका कार्यकाल महज दो साल ही रहा। उनकी ईमानदारी इस कदर की थी कि उन्होंने अपनी राजनीति चलाने के लिए अपनी जमीन तक बेच डाली।
कईसन दामाद जोहले बानी?
सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी की पहचान उनकी बेबाकी भी थी। वे चुटिले अंदाज में तीखे व्यंग्य करते थे बड़ी बात यह थी कि कोई उनकी बात का बुरा भी नहीं मानता था। उनकी बेबाकी कभी उनकी लोकप्रियता के मार्ग में बाधा नहीं बनी। एक वाकया यह है कि सिवान के जिलाधिकारी थे श्री शिशिर कुमार सिन्हा, बेहद सख्त और कर्तव्य निष्ठ आई ए एस अधिकारी। किसी निवेदन के सिलसिले में स्वर्गीय तिवारी ने उनसे मुलाकात किया। लेकिन निवेदन पर अमल के लिए तत्कालीन डी एम साहब तैयार नहीं हुए। डी एम साहब के श्वसुर थे वरिष्ठ नेता डॉक्टर सी पी ठाकुर। जब पटना में श्री ठाकुर से उनकी मुलाकात हुई तो उन्होंने चुटिले अंदाज में बेबाकी से कह दिया कईसन दामाद जोहले बानी?
जनसमस्या के समाधान के प्रति संजीदा
सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी जनता को मुद्दों को बेहद संजीदगी से उठाते थे। आम जनता की हर फरियाद पर बेहद गंभीरता दिखाते थे । वे अधिकारियों के पास जन मुद्दों को लेकर जाने के समय भरपूर आत्विश्वास से लैस रहते थे। वे बड़े ही ठसक के साथ पदाधिकारीगण से कहा करते थे कि आप जनता के सेवक है और मैं जनता का प्रतिनिधि।
मैं आपके पास यह जन समस्या लेकर आया हूं। तत्काल इसका निराकरण करें। यदि कोई अफसर लालफीताशाही दिखाता तो वे तत्काल ऊपर के राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के संज्ञान में मामले को लाते और जन समस्या के निराकरण तक वे बेचैन रहते थे।
वे सबके, सभी उनके थे
सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी पहले शारीरिक शिक्षक थे तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में सेवा देने हेतु नौकरी तक छोड़ दी। पूर्णिया और भागलपुर में संघ के प्रचारक रहे। आर एस एस के आदर्श उनके जीवन मूल्य ताजिंदगी बने रहे। लेकिन उनकी लोकप्रियता दलगत राजनीति की सीमाओं से परे रही। वे सबके थे और सब उनके थे।
सबका साथ सबका विकास के वे प्रबल समर्थक थे। बिहार में पहली बार जब जनसंघ के तीन विधायक चुने गए उनमें एक वे भी रहे। भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने। लेकिन हर दल के लोग उनसे स्नेह रखते थे। जन समस्याओं के संदर्भ में वे दलगत राजनीति से परे भी चले जाते थे।
अदभुत सांस्कृतिक अनुराग
सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी जी का सांस्कृतिक अनुराग भी अदभुत था। स्थानीय लोक संस्कृति से उन्हें बेपनाह लगाव था। वाकया दिसंबर 1972 का है जब सिवान जिला के स्थापना के शुभ अवसर पर नगर की हृदयस्थली गांधी मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम होना था। सिवान के प्रथम डी एम के रॉय पॉल की आकांक्षा थी कि सिवान का कोई लोक नृत्य भी प्रस्तुत किया जाय।
उन्हें संज्ञान में था कि स्वर्गीय जनार्दन तिवारी कोई हड़का नृत्य में शामिल होते हैं। लेकिन उस समय के कुछ जनप्रतिनिधि इतने गरिमामई व्यक्तित्व के धनी होते थे कि पदाधिकारी उनसे कोई बात कहने में हिचकते थे। तत्कालीन डी एम के रॉय पॉल ने अपना संदेश उनके पास पहुंचाया। स्वर्गीय जनार्दन तिवारी जी ने उस संदेश का मान रखा और जिला स्थापना समारोह में लोक संस्कृति की अविस्मरणीय खुशबू बिखेरी जिसे आज भी सिवान जिले के लोग याद रखे हुए हैं।
क्या हो सकती है सच्ची श्रद्धांजलि?
आज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक, महान स्वतंत्रता सेनानी मदन मोहन मालवीय जी की जयंती है। आज ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की भी जयंती है। आज सीवान की राजनीति के भीष्म पितामह स्वर्गीय जनार्दन तिवारी जी की भी जयंती है। पूर्व सांसद जनार्दन तिवारी जी को सच्ची श्रद्धांजलि अपने जीवन में सादगी, सरलता, ईमानदारी, बेबाकी, कर्मठता का समावेश ही हो सकती है।
उनकी जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन🌹🙏
इनपुट सहयोग के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश पांडेय का आभार

