पहली बार गणतंत्र दिवस पर दो मुख्य अतिथि आये
यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा एवं उर्सुला वॉन डेर लेयेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड की भव्यता दुनिया ने देखी। गणतंत्र दिवस की परेड में 30 झांकियां निकाली गईं। इनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकिया थीं। वहीं, 13 झांकियां अलग-अलग मंत्रालयों की देखने को मिली।
148 गर्ल्स कैडेट वाले NCC दल ने भी कर्तव्य पथ पर मार्च किया। उत्तराखंड डायरेक्टोरेट सीनियर विंग गर्ल्स की कमांडर सीनियर अंडर ऑफिसर मानसी विश्वकर्मा ने इस मार्च का नेतृत्व किया था। यूरोपीय संघ का दस्ता भी कर्तव्य पथ की परेड में शामिल हुआ था।
इस बार परेड में कई बदलाव भी किए गए थे:
- गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार दो चीफ गेस्ट पहुंचे थे। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
- सीआरपीएफ की एक पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व पहली बार महिला अधिकारी ने किया। सहायक कमांडेंट सिमरन बाला को इसी जिम्मेदारी मिली थी।
- पहली बार भारतीय सेना का पशु दस्ता इतने बड़े और शानदार अंदाज में परेड का हिस्सा बना। पशुओं के इस खास दस्ते में चार शिकारी पक्षी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 10 भारतीय नस्ल के सेना के कुत्ते और 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते भी शामिल हुए। दो बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी ने भी परेड में कदमताल किया।
- इस बार परेड में भैरव लाइट कमांडो को भी शामिल किया गया। अक्टूबर 2025 गठित इस बटालियन के लिए कर्तव्य पथ पर शौर्य दिखाने का यह पहला मौका था।
- परेड में पहली बार सैनिकों, हथियारों और सैन्य इकाइयों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में दिखाया गया। इसे बैटल एरे डिस्प्ले कहते हैं।
- पहली बार थल सेना, नौसेना और वायु सेना की अलग-अलग झांकी की बजाय संयुक्त झांकी दिखाई गई।
- इस बार दर्शक दीर्घा के नाम ने भी चर्चा बटोरी। अब तक इन्हें गैलरी-1, गैलरी-2 जैसे नामों से जाना जाता था। लेकिन पहली बार इनका नाम बदला गया और उसे गंगा, यमुना और गोदावरी नदियों का नाम मिला।
- पहली बार परेड में भारतीय सिनेमा को समर्पित झांकी भी प्रस्तुत की गई। इसका नेतृत्व निर्देशक संजय लीला भंसाली ने किया।
- आज जब भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा एवं उर्सुला वॉन डेर लेयेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस समय दोनों (भारत और ईयू) एक महत्वपूर्ण आर्थिक समझौते को पूरा करने के काफी नजदीक हैं, लेकिन वहीं दो पड़ोसी देश (भारत और पाकिस्तान) कटु संबंधों के दौर से गुजर रहे हैं।
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1) भारत अब तक 77 गणतंत्र दिवस परेड मना चुका है जिसमें से 72 बार मुख्य अतिथि शामिल हुए हैं। हालाँकि परेड में शामिल होने वाले कुल मुख्य अतिथियों की संख्या 85 है। इनकी संख्याओं में इतना अंतर इसलिए है क्यूँकि कुछ गणतंत्र दिवस परेड में कोई भी अतिथि शामिल ही नहीं हुए जबकि कुछ परेड में एक से अधिक मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
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2) वर्ष 1956, 1968, और 1976 में दो दो मुख्य अतिथि गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए थे जबकि वर्ष 2018 के गणतंत्र दिवस परेड में एक साथ दस देशों के प्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
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3) ये अतिथि 26 जनवरी परेड ग्राउंड राष्ट्रपति के साथ उनकी बग्घी में आते थे लेकिन 2018 के परेड में चुकी मुख्य अतिथियों की संख्या 10थी इसलिए इतिहास में पहली बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि भारत के राष्ट्रपति के साथ राजपथ नहीं पहुँचे। और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी 1985 के बाद पहली बार बग्घी से परेड में पहुँचे।
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4) अब तक पाँच बार गणतंत्र दिवस बिना किसी विदेशी अतिथि के मनाया जा चुका है। दो वर्ष कोरोना के कारण (2021 व 2022), एक वर्ष लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन के कारण (1966) और दो वर्ष अकारण (1952 व 1953)
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5) वर्ष 1954 तक गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर नहीं बल्कि दिल्ली के अलग अलग स्थानो पर होते थे। (रामलीला मैदान, किंग्सवे कैम्प, आदि)
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6) वर्ष 1955 में राजपथ पर हुए पहले गणतंत्र दिवस परेड में पाकिस्तान के गवर्नर जेनरल मालिक ग़ुलाम मोहम्मद मुख्य अतिथि थे जबकि 1965 में जब भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ था उस वर्ष भी गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि एक पाकिस्तानी थे। राणा अब्दुल हामिद जो पाकिस्तान के खाध्य संचालन मंत्री थे।
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7) हर वर्ष एक से अधिक अतिथियों को आमंत्रण दिया जाता है। कई मौक़े पर कुछ देशों के राजदूतों ने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आने से इनकार भी किया है। अब तक 53 बार अलग अलग देश के नेता 26 जनवरी परेड में मुख्य अतिथि बनने से इनकार कर चुके हैं। अलग अलग देशों के अब तक 31 नेता 26 जनवरी परेड में मुख्य अतिथि बनने से इनकार कर चुके हैं। इसमें से सर्वाधिक बार इनकार करने वाले विदेशी नेताओं में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉन मेजर, और फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रान्स्वा होल्लांडे चार बार निमंत्रण रेजेक्ट करने के बाद पाँचवीं बार आमंत्रण स्वीकृत कर लिए थे।8. बांग्लादेश हिंदुस्तान का एकमात्र पड़ोसी देश है जहां से आज तक एक भी अतिथि गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल नहीं हुए हैं।
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9) परेड में सर्वाधिक बार ब्रिटिश और फ़्रांसीसी राजदूत रहें हैं। दोनो देश से पाँच-पाँच बार अतिथि गणतंत्र दिवस में शामिल हो चुके हैं। रुस और भूटान से चार चार बार विशेष अतिथि गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हो चुके हैं।
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10) अमेरिका से अब तक सिर्फ़ एक बार विशेष अतिथि भारतीय गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए हैं जब वर्ष 2015 में अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति वर्ष 2015 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे।
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