ब्रीफकेस गया, ऐप आया; निर्मला सीतारमण ने कैसे बदली बजट की 75 साल पुरानी परंपरा?
श्रीनारद मीडिया, सेंट्रल डेस्क:

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को अपना लगातार 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। भारतीय बजट का इतिहास न केवल आर्थिक सुधारों का गवाह रहा है, बल्कि इसके पेश करने के तौर-तरीकों में भी क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। औपनिवेशिक काल के ‘ब्रीफकेस’ से शुरू हुआ यह सफर अब ‘डिजिटल टैबलेट’ और ‘मोबाइल ऐप’ तक पहुंच चुका है।
2019 में ‘बहीखाता’ पेश कर स्वदेशी परंपरा को जीवित करने वाली सीतारमण ने 2021 में ‘पेपरलेस बजट’ की शुरुआत कर एक नए युग का आगाज किया। यह बदलाव तकनीक के साथ कदम मिलाते भारत की एक सशक्त तस्वीर पेश करता है।
गुलामी की निशानी से मुक्ति
दशकों तक भारत में बजट पेश करने के लिए ब्रिटिश परंपरा के अनुसार ब्रीफकेस का उपयोग किया जाता था। 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस औपनिवेशिक व्यवहार को खत्म करते हुए लाल कपड़े में लिपटे ‘बहीखाता’ को अपनाया। यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वदेशी गौरव का संदेश था। व्यापारियों द्वारा सदियों से उपयोग किए जाने वाले बहीखाते ने संसद में विदेशी ‘ग्लैडस्टोन बॉक्स’ की जगह ली, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कदम साबित हुआ।
मेड इन इंडिया टैबलेट का दौर
कोरोना महामारी के दौरान 2021 में बजट ने एक नया और आधुनिक रूप लिया। सुरक्षा और ‘डिजिटल इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने बहीखाते की जगह नीले रंग का ‘मेड इन इंडिया टैबलेट’ इस्तेमाल किया। यह भारत का पहला पूरी तरह से ‘पेपरलेस बजट’ था। तकनीक के इस समावेश ने न केवल कागजों की बर्बादी को रोका, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि भारत अपनी सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अत्याधुनिक और डिजिटल बनाने में सक्षम है।
यूनियन बजट ऐप: अब आपकी जेब में बजट
डिजिटल बदलाव केवल टैबलेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार ने ‘Union Budget Mobile App’ भी लॉन्च किया। अब बजट का अधिकांश हिस्सा डिजिटल मोड पर उपलब्ध है और केवल एक छोटा हिस्सा ही छपाई के लिए जाता है। इस ऐप के माध्यम से देश का आम नागरिक बजट के दस्तावेजों, योजनाओं और घोषणाओं को सीधे अपने फोन पर देख सकता है। इससे बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और जनता की पहुंच वित्त मंत्रालय के जटिल आंकड़ों तक आसान हुई है।
हलवा सेरेमनी और लॉक-इन पीरिएड में बदलाव
बजट की छपाई से पहले निभाई जाने वाली ‘हलवा सेरेमनी’ और अधिकारियों का बाहरी दुनिया से कट जाना एक पुरानी परंपरा है। बजट की गोपनीयता के लिए अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बंद रहते थे। तकनीक के आने और बजट के डिजिटल होने से अब इस ‘लॉक-इन पीरिएड’ की अवधि घट गई है। पहले जहां अधिकारियों को दो हफ्तों तक कैद रहना पड़ता था, अब यह समय घटकर मात्र एक हफ्ता रह गया है। यह आधुनिकीकरण कार्यकुशलता और समय की बचत का प्रतीक है।
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