अलविदा सिवान के बौद्धिक जीवंतता के अग्रदूत
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सुभाष्कर पांडेय के निधन से सिवान के बौद्धिक जगत में फैली मायूसी
सिवान ने खोया एक ऐसा महान व्यक्तित्व जिन्हें सभी विचारधारा से स्नेह और सम्मान मिला
श्रीनारद मीडिया, गणेश दत्त पाठक, सेंट्रल डेस्क:

सीवान की सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक क्षेत्र की जीवंतता के अगरदूत वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष्कर पांडेय जी का लखनऊ में मंगलवार को निधन हो गया। उनके देहांत से सिवान के बौद्धिक जगत में मायूसी की लहर दौड़ गई है। स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय का व्यक्तित्व ऐसा रहा, जिसे सभी विचारधाराओं का स्नेह और सम्मान प्राप्त हुआ।
स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय, एक ऐसे अधिवक्ता रहे, जिन्होंने अपने द्वारा विधिक सेवा प्रदान करने में कभी विधिक शुल्क को महत्व नहीं दिया। गरीब और निर्धन फरियादियों के लिए वे देव दूत ही रहे। आज कल सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए लोक अदालत आयोजित होते हैं। लेकिन स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय ने गरीब फरियादियों को न्याय के मंदिर में सहायता प्रदान कराने के लिए हर संभव सहायता प्रदान किया। वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर राकेश तिवारी ने बताया कि उनके लिए धन कभी वरीयता का विषय रहा ही नहीं। वे गरीब असहायों की सहायता में सदैव आगे रहे।
जूनियर वकीलों के मार्गदर्शन और सहयोग में भी स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय विशेष भूमिका रही। उनके संपर्क में रहनेवाले जूनियर वकीलों से वे सदैव पूछा करते थे कि आज क्या कमाया? जब भी कोई जूनियर वकील कहता कि आज कोई कमाई नहीं हो पाई तो वे उन्हें आर्थिक मदद भी प्रदान किया करते थे। अधिवक्ता डॉक्टर विजय कुमार पांडेय बताते हुए भावुक हो जाते हैं कि उनके जैसा मार्गदर्शक मिलना मुश्किल ही नहीं असंभव है। उनके पिता महान शिक्षाविद् और अधिवक्ता स्वर्गीय सरस्वती दीन पांडेय के गरिमामई व्यक्तित्व की झलक उनमें भी दिखलाई पड़ती थी।सिवान बार काउंसिल के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदमों को उठाया, जिससे अधिवक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके ।
शिक्षाविद् सह वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर अशोक प्रियंवद बताते हैं कि वे सिवान के बौद्धिक जगत के सबसे प्रतिष्ठित और स्वीकृत व्यक्तित्व रहे। उन्हें चाहे वो वामपंथी विचारधारा हो या दक्षिणपंथी विचारधारा सभी का स्नेह और विश्वास हासिल था। उन्होंने सिवान के वैचारिक धरातल को सिर्फ जिया ही नहीं अपितु उसे पोषा भी। सिवान के मालवीय दाढ़ी बाबा के काल से लेकर आज तक उन्होंने यहां के बौद्धिक आयाम को ऊर्जस्वित करने में भी उनकी भूमिका रही। सिवान के हर वैचारिक आंदोलन को उन्होंने बौद्धिक और वैचारिक ऊर्जा प्रदान की। सिवान के हर बौद्धिक आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। सिवान की बौद्धिक जीवंतता को बरकरार रखने में उनके योगदान को सदियों तक याद किया जाता रहेगा।
स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय जी के व्यक्तित्व की सहजता, सरलता, संवेदनशीलता, सहृदयता सभी को अपना मुरीद बना लेती थी। अब वह हमारे बीच नहीं रहे लेकिन तथ्य यह भी है कि उनका पावन स्मरण सिवान के बौद्धिक जगत को सदियों तक प्रेरित और ऊर्जस्वित करता रहेगा।
आपको बताते चले कि स्वर्गीय पांडेय का अंतिम संस्कार दरौली स्थित सरयू नदी के तट पर बुधवार को किया जाएगा।
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