250@अमेरिका इस दुनिया का सबसे पावरफुल देश है,कैसे?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी अमेरिका की है। इसकी जीडीपी 20 ट्रिलियन से भी ज्यादा है। दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी अमेरिका के पास है। दुनिया की सबसे बड़ी बड़ी कंपनियां फिर चाहे एप्पल हो या फिर माइक्रोसॉफ्ट सभी अमेरिकी की है। इन सभी चीजों की लिस्ट इतनी लंबी है कि आपको यकीन हो जाएगा की अमेरिका ही इस दुनिया का सबसे पावरफुल देश है।
अगर आप इतिहास को देखें तो दुनिया की ताकत हर टाइम पीरियड में अलग अलग देशों यहां तक की महाद्वीपों के पास रही है। प्राचीन काल को देखें तो चीन, रोम और भारत तीन साम्राज्य दुनिया के सबसे ताकतवर हिस्से हुआ करते थे। 1800 तक दुनिया की पूरी इकोनॉमी भारत और चीन के ईर्द गिर्द घूमती थी। यहां से बड़े पैमाने पर सामान को यूरोप इंपोर्ट किया जाता था।
लेकिन इसके बाद जब मॉर्डन वर्ल्ड की शुरुआत हुई। यूरोप में इंडस्ट्रलाइजेशन आया तो यूरोप ने इन सब बड़ी ताकतों को अपने कब्जे में कर लिया। फिर चाहे वो हिंदुस्तान, चीन या फिर ऑटोमन सुल्तानों के कब्जे में रहा मीडिल ईस्ट ही क्यों न हो। लेकिन सेकेंड वर्ल्ड वॉर खत्म होते होते न भारत न चीन न इंग्लैंड न फ्रांस सभी ताकतों को पीछे छोड़ अमेरिका दुनिया का सबसे ताकवर देश बन गया।
अमेरिका की खोज से लेकर 13 ब्रिटिश कॉलोनियों की स्थापना का इतिहास
1453 में कतन दुनिया पर तुर्कों ने कब्जा कर लिया था जिससे यूरोप से ईस्टर्न कंट्रीज के ट्रेड रूट्स बंद हो गए थे जिसके बाद यूरोप के सेलर्स ने नए सी रूट्स ढूंढने शुरू कर दिए जिससे कि ईस्टर्न कंट्रीज के साथ यूरोप का ट्रेड किया जा सके भारत के लिए नए सी रूट की खोज में निकलस स्पीन का नाविक कोलंबस भटककर अटलांटिक ओशन को पार करता हुआ 1492 में एक बिल्कुल नई दुनिया में पहुंच गया। कोलंबस ने इस नए कॉन्टिनेंट को भारत समझकर यहां के नेटिव लोगों को रेड इंडियन कहा।
इसके बाद 1499 में इटालियन ट्रेवलर अमर्जी यो वेस्पो की इस कॉन्टिनेंट पर पहुंचा जिसके नाम पर ही यहां का नाम अमेरिका पड़ा। यह कॉन्टिनेंट मिनरल रिसोर्सेस से भरा पड़ा था और यहां की जमीन भी बेहद ही फर्टाइल थी, जिसके कारण यूरोप के देश में इसे अपनी कॉलोनी बनाने को लेकर होड़ मची हुई थी। सबसे पहले स्पेन के लोगों ने अमेरिका के नेटिव लोगों को गुलाम बनाकर फार्मिंग करनी चाही। लेकिन वहां के लोकल्स ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसलिए अफ्रीका के लोगों को अमेरिका लाया गया और उन्हें गुलाम बनाकर उनसे खेती करवाई गई।
इस तरह स्पेन ने अमरिका के कुछ जगहों पर अपनी कॉलोनी बना ली। फिर आया साल 1588 का जब स्पेन की नेवी और इंग्लैंड की नेवी के बीच भयानक युद्ध होता है और इंग्लैंड की नेवी को जीत मिलती है तो अब इंग्लैंड को अमेरिका में अपनी कॉलोनी बनाने का मौका मिल गया। नॉर्थ अमेरिका में इंग्लैंड ने अपनी पहली कॉलोनी जेम्स फस्ट के समय में 1600 साथ में बनाई जिसका नाम जेम्स टाउन रखा गया।
फिर चार्ल्स फर्स्ट के समय कॉलोनी बनाने के काम तेजी में आया। 1630 में प्यूटन लोगों का एक ग्रुप नॉर्थ अमेरिका के बोस्टन में जाकर बस जाता है जिसके बाद धीरे-धीरे यूरोपियन भारी संख्या में अमेरिका में जाकर बस गए। 1607 से 1722 ईसवी आते-आते अमेरिका में ब्रिटिशर्स ने अपनी 13 कॉलोनी बना दी। कॉलोनी उस समय प्रॉपर्टी कमाने का एक बड़ा माध्यम था और यही कारण था कि यूरोपियन लगातार अमेरिका में जाकर बसने लगे। इसके साथ ही यूरोप में रिलीजन को लेकर हार्ड पॉलिसी थी। जिसके कारण भी यूरोपियन अमेरिका में आकर बसने लगे।
तीन पार्ट में बंटी अमेरिकी कॉलोनी
अमेरिक कॉलोनी को तीन पार्ट में डिवाइड किया जा सकता है नॉर्थ पार्ट में मैसाचुसेट्स न्यू हैम शयर और रोड्स आइलैंड यह पहाड़ी और बर्फी एरिया थे जो खेती के लायक नहीं थे। इंग्लैंड को यहां से मछली और लकड़ी प्राप्त होती थी मिड पार्ट में न्यूयॉर्क न्यू जर्सी मैरीलैंड जैसी कॉलोनी थी जहां से शराब और चीनी जैसी इंडस्ट्री चलती थी। साउथ पार्ट में नॉर्थ कोलिन साउथ कोलिन जॉर्जिया वर्जीनिया थे यहां का क्लाइमेट गर्म है इसलिए यहां मेनली ग्रीन शुगर केन तंबाकू कपास और बागानी फसलों का प्रोडक्शन होता था।
इंग्लैंड इन कॉलोनी को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा था दोस्तों जी हां इन कॉलोनी से कच्चा माल लेकर इंग्लैंड अपने यहां पर इंडस्ट्रीज में भेजता और फिर वहां प्रोडक्शन कर यहां अधिक दामों में बेच देता था जिसके कारण यहां के लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था यहां पर असल रूल अटलांटिक महासागर के पार से ब्रिटिश राज और अंग्रेजी पार्लियामेंट के द्वारा होता था हालांकि हर कॉलोनी में गवर्नर को एडवाइस देने के लिए एक इलेक्टेड असेंबली होती थी
लेकिन फिर भी कॉलोनी के लिए कानून बनाने का अधिकार ब्रिटिश पार्लियामेंट को ही था कॉलोनी में एडमिनिस्ट्रेशन के हाई पोजीशंस पर इंग्लैंड से अधिकारी भेजे जाते थे इंग्लैंड की सरकारों का यह भरोसा था कि कॉलोनी के लोग हायर एडमिनिस्ट्रेशन पोजीशन के लिए क्वालिफाइड नहीं है।
