शिक्षक अखिलेश कुमार मिश्र के सेवा-निवृति पर भव्य विदाई समारोह आयोजित
अखिलेश मिश्रा मिश्र ने शिक्षा को पेशा नहीं, बल्कि साधना के रूप में जिया
श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार):

अयोध्या अग्रवाल सनातन धर्म उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज के “विशिष्ट शिक्षक श्री अखिलेश कुमार मिश्र के 60 वर्ष की सफल एवं समर्पित सेवा-यात्रा के उपरांत होटल सफायर इन, सीवान के सभागार में आयोजित विदाई समारोह” अत्यंत उत्साह एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
अनन्या और सौम्या के दीपमंत्र के साथ माननीय मुख्य अतिथि लल्लन जी मिश्र, सभाध्यक्ष सच्चिदानंद मिश्र, शिक्षक सुजीत कुमार सिंह, एवं संगीता सिंह एवं द्वारा दीप-प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। फिर, सरस्वती वंदना ने सभागार को भक्ति, शांति और गरिमा से मंत्रमुग्ध कर दिया।

मंच संचालन बीएचयू की शोध छात्रा अनन्या सृष्टि ने किया। अमित कुमार “मुन्नू” ने इस समारोह की भावना से अवगत कराते हुए कहा कि श्री मिश्र की ईमानदारी, सादगी तथा कार्यनिष्ठा विद्यालय की अमूल्य धरोहर थी, जिसकी प्रतिपूर्ति असंभव है। उन्होंने सभी स्नेही स्वजनों का स्वागत करते हुए यह कहा कि श्री मिश्र के इस अभिनंदन समारोह में आप सभी की गौरवमयी उपस्थिति से हम अभिभूत हैं, आह्लादित हैं। हम तहे दिल से आपका वंदन, अभिनन्दन और स्वागत करते हैं।
इसके बाद विद्यालय के शिक्षकों उमाशंकर सर, अरविंद सर, द्वारा माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि श्री लल्लन जी मिश्र, सभाध्यक्ष डा. श्री सच्चिदानंद मिश्र, सेवा निवृत्त शिक्षक अखिलेश कुमार मिश्र, वरीय शिक्षक सुजीत कुमार सिंह और शिक्षिका पुष्पा कुमारी एवं संगीता सिंह द्वारा श्रीमती कंचन कुमारी का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। पुनः अंग वस्त्र देकर मुख्य अतिथि का स्वागत शिक्षक नवीन प्रभात द्वारा किया गया।

अतिथियों के स्वागत में नवम की छात्राओं खुशबू और सोनी द्वारा प्रस्तुत स्वागत एवं मंगल गीत ने सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण किया और कार्यक्रम को गति प्रदान की।
इसके बाद विद्यालय के +2 शिक्षक श्री वीरेन्द्र कुमार महतो ने सेवा निवृत्त शिक्षक श्री मिश्र के जीवनवृत्त पर एक प्रकाश डाला। उन्होंने उन्हें विद्यालय के अनुशासन और कार्य-प्रबंधन का सशक्त स्तंभ कहा, उनके मार्गदर्शन को अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि श्री मिश्र का जीवन शिक्षण-सेवा की उज्ज्वल मिसाल है। उन्हें ‘शिक्षक का आदर्श स्वरूप’ कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं।
इसके बाद अपने गुरूजी के सम्मान में पुरातन छात्र रंजन कुमार ने एक गीत गाकर सबको भाव विभोर कर दिया।
रंजन कुमार के बाद सिद्धि और निधि ने ” जा रहे हो तो जाओ, ये दर छोड़कर” गीत गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
तत्पश्चात् श्री मिश्र के दीर्घ शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए शिक्षकों ने भावपूर्ण शब्दों में अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
डा. निलांजना त्रिपाठी ने कहा कि श्री मिश्र जैसे शिक्षक संस्था की आत्मा होते हैं, जो पीढ़ियों को आकार देते हैं। उन्होंने यह भी कहा इनकी क्षीण काया में एक महामानव की आत्मा है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री मिश्र अनुशासन, समयनिष्ठा और कर्तव्य पालन की मिसाल रहे हैं। श्री मिश्र जिस तरह छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच लोकप्रिय हैं, ऐसा प्रायः कम ही होता है। कर्तव्य को साधना मानकर जीनेवाले लोगों में उनका नाम उल्लेखनीय हैं।
सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि श्री मिश्र ने शिक्षा को पेशा नहीं, बल्कि साधना के रूप में जिया।
कृष्ण राज सर ने एक गीत गाकर अपना भाव समर्पित किया।
शमशेर सर ने कहा कि श्री मिश्र के सरल व्यवहार और छात्र-हित में उठाए गए प्रत्येक कदम को स्मरणीय बताया। साथ ही उनके स्नेहिल स्वभाव को याद किया, जो विद्यार्थियों के बीच उन्हें अत्यंत लोकप्रिय बनाता था।
कृष्ण मोहन मांझी, गोविंद कुमार, नवीन प्रभात, अरविंद मौर्य, पुष्पा कुमारी, एवं उमाशंकर माॅंझी ने भी अपने-अपने संबोधन में श्री मिश्र के व्यक्तित्व, कर्तव्यपरायणता और विद्यालय के प्रति उनके योगदान को भावपूर्ण शब्दों में नमन किया।
इसके उपरांत, विद्यालय परिवार की ओर से संतोष तिवारी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तिलक, माल्यार्पण एवं शॉल के साथ स्मृति चिह्न भेंटकर सपरिवार श्री मिश्र को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही फरवरी 2025 में सेवा निवृत्त परिचारी ललन राम का भी सम्मान एवं विदाई की गई। विशिष्ट अतिथियों के सम्मानोपरांत सौम्या नारायणी ने अभिनन्दन पत्र का वाचन किया और फिर सभी आगंतुकों में अभिनंदन पत्र बाॅंटा गया।
बच्चों द्वारा भेंट किए गए उपहारों ने शिक्षक-छात्र संबंध की भावनात्मक गरिमा को और गहरा किया। इस अवसर पर श्री मिश्र की पत्नी कंचन कुमारी, बेटी अनन्या सृष्टि एवं सौम्या नारायणी और बेटा हृषीकेश आनंद भी उपस्थित थे।
इसके बाद एक बार फिर सभी गीत-संगीत की दुनिया में वापस लौटे और इस बार अनिशा, ज्योति और नंदनी ने “सूना है आंगन और सूना ये मन” और प्रियांशु कुमारी ने “विदा क्या करें हम, भरे इस नयन से” जैसे विदाई गीतों से सबका मन मोह लिया। प्रियांशु के बाद श्वेता और ज्योति की विदाई गीत “गुरू में संसार समाया ” का असर दिखाई दिया।
वहीं शिक्षक संतोष तिवारी की विदाई गीत ‘अंखिया से लोर गिरे, आवेला रोआई’ और “मिलन आज तक था, हमारा तुम्हारा” जैसे भावपूर्ण गीत गाकर सबको विह्वल कर दिया। सबकी ऑंखें भींगो डाली।
इसके बाद सेवा निवृत्त शिक्षक श्री अखिलेश कुमार मिश्र ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों, सहकर्मियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कि—”आपके स्नेहपूर्ण और हृदय से दिए गए शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद। यह जानकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और संतोष होगा कि एक शिक्षक के रूप में मेरे प्रयास आपके जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकें। किसी भी शिक्षक के लिए इससे बड़ा सुख नहीं होता कि उसके शिष्य आत्मविश्वासी, सक्षम और सफल नागरिक बनें। सेवानिवृत्ति के अवसर पर दिए गए आपकी मंगल कामनाओं के लिए मैं आभारी हूँ। जीवन के इस नए चरण की ओर मैं आशा, संतोष और शांति के भाव से अग्रसर हो रहा हूँ। ईश्वर से मेरी कामना है कि आप निरंतर प्रगति करें और जहाँ भी रहें, सार्थक योगदान देते रहें। आपलोगों की मधुर स्मृतियों के साथ जा रहा हूँ। आप सभी को नमन, स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं सहित धन्यवाद!”
इसके बाद मुख्य अतिथि श्री लल्लन जी मिश्र ने अपने आशीर्वचन में श्री मिश्र की ईमानदारी और जीवटता की सराहना करते हुए ईश्वर से सबके मंगल की प्रार्थना की। धन्यवाद ज्ञापन डा. श्री सच्चिदानंद मिश्र ने किया और सभी के प्रति उनके कृतज्ञता ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। जलपान के बाद सभा का विसर्जित हो गई। ्
इस अवसर पर दूसरे कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं में अनिल कुमार पाण्डेय, विनोद कुमार, अमृतेश आनंद, के के ओझा, सतीश तिवारी, कृष्णराज, विकास पाण्डेय, रत्नेश कुमार मणि, पवन कुमार, अर्चना आर्याणी, निलांजना त्रिपाठी तथा अभिभावकों में नंदकिशोर प्रसाद, जयराम सिंह, सुरेश पाण्डेय, राजेश तिवारी, सच्चिदानंद मिश्र, शत्रुघ्न मिश्र, शैलेन्द्र मिश्र, सुनील सिंह वगैरह पूर्व छात्र-छात्राओं में आशुतोष, जीतू, संजीव, ज्ञान सागर, अंकित, राहुल, मिष्टी, रोशनराधा, कंचन, रानी, रूपा, लवली, सुकन्या, अंशु, महक, प्रिया, गोल्डी, प्रियांशु, नीलू, पिंकी, कोमल, रिमझिम, अंजली, निशू, पिंकी, कृति, रानी, रितिका, अमृता, सरिता, आकृति, खुशी, किरण, पूजा, प्रियांशु जैसे अनेक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बिना कहे ही बहुत कुछ बयां कर गयी।
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