बिहार के राजस्व कर्मचारी शुक्रवार से काम पर लौट आए है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में राजस्व कर्मियों की हड़ताल खत्म हो गई और वे काम पर लौट आए. उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा के साथ बैठक के बाद बिहार राजस्व सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने फैसला लिया कि सभी अधिकारी शुक्रवार से काम पर लौट जायेंगे. उन सभी की मांगों पर उपमुख्यमंत्री ने विचार का आश्वासन दिया है.
विजय सिन्हा ने बैठक में लिया फैसला
साथ ही विजय सिन्हा ने यह भी कहा है कि प्रतिभा का सम्मान किया जाएगा. मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया. राजस्व सेवा के अधिकारी अपनी कई मांगों को लेकर दो फरवरी 2026 से सामूहिक अवकाश पर थे. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व सेवा के अधिकारियों की मांग पर विचार किया जाएगा.
12 फरवरी को जारी होगी अधिसूचना
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अब बिहार प्रशासनिक सेवा के नहीं बल्कि राजस्व सेवा के अधिकारी ही डीसीएलआर बनेंगे. बैठक के दौरान जो कुछ भी बातचीत हुई, इसे लेकर अधिसूचना 12 फरवरी को जारी की जाएगी.
बैठक में और क्या-क्या लिए गए फैसले?
- राजस्व सेवा के अफसरों का सेकंड प्रमोशन डीसीएलआर के पद पर होगा.
- फिलहाल जो डीसीएलआर हैं, उनका इस पद पर पोस्टिंग नहीं होगी.
- अनुमंडल राजस्व अधिकारी के जिम्मे में सर्वे से जुड़े काम होंगे.
- डीसीएलआर के 11 पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारी तैनात होंगे.
- बैठक के बाद, बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंचलाधिकारियों (CO) और राजस्व कर्मचारियों (RO) की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। डिप्टी सीएम सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा की पहल पर हुई बैठक के बाद कर्मचारियों ने कार्यबहिष्कार वापस ले लिया। शुक्रवार से राज्य के सभी 534 अंचलों में कामकाज सामान्य हो गया है। इससे दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार और भूमि विवाद निपटारे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आई रुकावट दूर हो गई है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है।
हड़ताल की शुरुआत और कारण
बिहार राजस्व सेवा संघ ने 2 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी। हड़ताल का मुख्य कारण विभाग में चल रहे सुधारों, कैबिनेट के कुछ फैसलों और हाईकोर्ट के आदेशों से जुड़ी असहमति थी। कर्मचारियों का कहना था कि विजय सिन्हा के नेतृत्व में विभाग में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जैसे ऑनलाइन रसीद अनिवार्य करना, जीपीएस से फील्ड विजिट मॉनिटरिंग और म्यूटेशन के मामलों में समयसीमा तय करना। इससे कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा और वे सेवा शर्तों, पदोन्नति व अन्य मांगों को लेकर आंदोलित हो गए।
हड़ताल शुरू होते ही राज्यभर के अंचल कार्यालय ठप हो गए। दाखिल-खारिज के आवेदन रुके, जमाबंदी सुधार नहीं हुआ और भूमि विवादों का निपटारा प्रभावित हुआ। किसानों और आम लोगों को काफी परेशानी हुई। कई जिलों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किए।
सरकार की सख्ती और बैठक का नतीजा
हड़ताल शुरू होने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने निर्देश दिया कि हड़ताल पर गए कर्मचारियों की सैलरी रोकी जाए, सरकारी वाहन और डोंगल वापस लिए जाएं। कई जगहों पर अंचल कार्यालयों की चाबियां जमा कराने के आदेश भी दिए गए। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा, लेकिन सरकार का कहना था कि जनहित में सुधार जरूरी हैं और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना प्राथमिकता है।
हालांकि, विजय सिन्हा ने संवाद का रास्ता भी खुला रखा। संघ के प्रतिनिधिमंडल से देर शाम बैठक हुई। बैठक में कर्मचारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। सिन्हा ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं पर विचार किया जाएगा और इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी सेवा संबंधी मांगों और कैडर मुद्दों पर रिपोर्ट देगी। इस आश्वासन के बाद संघ ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया।
कामकाज बहाल, जनता को राहत
बैठक के बाद कर्मचारियों ने शुक्रवार से काम पर लौटने का ऐलान किया। राज्यभर के अंचल कार्यालयों में फिर से रौनक लौट आई। लंबित आवेदनों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बैकलॉग क्लियर कर लिया जाएगा। विजय सिन्हा ने कहा, “हमारा उद्देश्य जनता की सुविधा और पारदर्शिता है। कर्मचारियों की जायज मांगों पर विचार होगा, लेकिन काम रोकना स्वीकार नहीं।”
संघ के नेताओं ने भी सरकार के रुख की सराहना की और कहा कि कमेटी के गठन से उनकी समस्याओं का समाधान होगा।
आगे की चुनौतियां
यह हड़ताल भले खत्म हो गई, लेकिन विभाग में सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी। विजय सिन्हा भ्रष्टाचार और भूमाफिया पर सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन की आशंका बनी रहेगी। फिलहाल जनता राहत की सांस ले रही है और अंचल कार्यालयों में काम सामान्य हो गया है।यह घटना बिहार में प्रशासनिक सुधार और कर्मचारी हितों के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है।
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