अपना देश 77वां गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा है
भारतीय संविधान 1949 में अपनाए गए और 1950 में लागू हुआ
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

देश आज 26 जनवरी, 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी संविधान ने देश के नागरिकों को उनके अधिकार दिए।
यहां पर हम संविधान की ताकतवर पंक्तियों और मौलिक कर्तव्यों की बात करेंगे। मौलिक कर्तव्यों के भी 50 साल पूरे हो चुके हैं। 1976 में भारतीय संविधान में 11 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे, जो देश की एकता, अखंडता और जिम्मेदारियों के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
वे दायित्व जो संविधान में तय हैं
- संविधान का पालन- हर नागरिक को संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए।
- स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श- स्वतंत्रता के आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आर्दशों को हृदय से संजोए रखें, उनका पालन करें।
- संप्रभुता और अखंडता- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।
- देश की रक्षा- देश की रक्षा करें और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की रक्षा करें।
- भाईचारा और सद्भाव- ऐसी समरता- समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग जैसे भेदभाव से परे हो। ऐसी प्रथाएं त्याग दें, जो स्त्रियों के सम्मान के विरिद्ध हों।
- सांस्कृतिक विरासत- सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझें व रक्षण करें।
- पर्यावरण संरक्षण- प्राकृतिक पर्यावरण की वन, झील, नदी और वन्य जीव की रक्षा करें। उसका संवर्धन करें और प्राणी मात्र पर दयाभाव रखें।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण- वैज्ञानिक दृष्टिको, मानववाद और ज्ञानार्जन के साथ-साथ सुधार की भावना का विकास करें।
- सार्वजनिक संपत्ति- सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
- व्यक्तिगत और सामूहिक उत्कृष्टता- सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू सके।
- शिक्षा का अवसर- 6 से 14 साल की उम्र के बीच अपने बच्चे या आश्रितों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना।

संविधान की ताकतवर पंक्तियां
- राज्य सभी नागरिकों के विचार, अभिव्यक्ति, धर्म, विश्वास और उपासना स्वतंत्रका सुनिश्चित करेगा।
- राज्य कभी भी किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा।
- छुआछूत का अंत किया जाता है और इसका कोई भी रूप दंडनीय अपराध होगा।
- राज्य समान काम के लिए पुरुष और महिला को समान वेतन देने का प्रयास करेगा।
- बच्चों को शोषण से बचाया जाएगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन का अधिकार होगा।
- राज्य अनसूचित जातियों, जनजातियों, कमजोर वर्गों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।
- सभी नागरिकों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना विकसित करने का कर्तव्य होगा।
- सभी नारिकों पर देश की एकता और अखंडता की रक्षा का कर्तव्य होगा।
- राज्य लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और जनस्वास्थ्य में सुधार करने का प्रयास करेगा।
- सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं और उन्हें कानून का समान संरक्षण प्राप्त होगा।
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