श्रीराम ने समावेशी समाज का निर्माण किया : मालती मंजरी

श्रीराम ने समावेशी समाज का निर्माण किया : मालती मंजरी

श्रीनारद मीडिया, जीरादेई, सीवान (बिहार):

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सीवान जिला के जीरादेई  प्रखंड क्षेत्र के भरौली मठ परिसर में चल रहे श्री मारुति नंदन महा यज्ञ में गुरुवार को मानस मर्मज्ञ मालती मंजरी ने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन दर्शन त्याग का मिशाल है जो जीवन मेँ सुख व शांति का संचार लाता है तथा समानता के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है l

उन्होंने भगवान श्रीराम व कृष्ण के व्यवहारिक जीवन पर भी प्रकाश डाला ।उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम श्री राम ,योगी राज श्री कृष्ण समावेशी समाज के निर्माण में अपना पूरा जीवन लगा दिया । कथावाचिका मंजरी ने कहा कि राम व कृष्ण के कार्यो में थोड़ी भिन्नता है ,पर दोनों का उद्देश्य एक था ।राम को अपने पिता एवम सौतेली माता की इच्छा पूरी करने के लिये बहुत कष्ट सहना पड़ा ।

 

उनके साथ सीता व लक्ष्मण ने भी कष्ट सहा ।कृष्ण का नेतृत्व कार्यवाद को लेकर बहुत व्यवहारिक था ।उनका कार्य निर्दोष व पवित्र लोगों के लिये था ,वे एकांगी मार्ग पर यकीन नहीं करते थे ।वे सत्य विरोधी लोगों के लिये किसी प्रकार का त्याग करना उचित नहीं मानते थे ,बल्कि अपनी शैली व निष्कर्ष से उन्होंने एक बड़े सत्य को स्थापित किया कि’ अहिंसा ‘एक दुर्बलता हो सकती है ,या लोग उसे कमजोरी मानेंगे ।

 

उन्होंने बताया कि राम जो संदेश देना चाहते थे ,वह अपने व्यक्तिगत आचरण द्वारा देते थे ।कृष्ण विविध संदेश ,विविध परिस्थितियों के लिये ,विविध चरित्रों के माध्यम से देते थे ।कृष्ण नैतिक ऊहापोह के लिये व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करते है । उन्होंने कहा कि दोनों ही महान हस्तियां एक बिंदु पर सहमत है कि सोद्देश्य किये गये विध्वंस निर्माण निहित होता है ।

 

राम ने सुग्रीव का अग्रज बाली का वध विश्वसनीय ढंग से नहीं किया था ।कृष्ण ने भी वैसा ही किया ।भीष्म को मारने के लिये उनका अभिगम धर्मयुद्ध के पैमाने पर खरा नहीं उतरता परन्तु दोनों का ही अटूट सोद्देश्य विध्वंस पर था ।
कृष्ण का नेतृत्व अत्यधिक लचीला था ।हर बार उन्होंने लोगों से विध्वंस और निर्माण प्रक्रिया में योगदान दिलवाया क्योंकि अंतिम लक्ष्य सकरात्मक विध्वंस था ।

मालती ने बताया कि
राम का आदर्श वादी नेतृत्व भावना तत्व को अधिक महत्व देता था ।वे तो भावनात्मक हिंसा की भी अनुमति नहीं देते थे ।इसीलिये उन्हें मर्यादापुरुषोत्तम कहा गया है । इस मौके पर परम गुरु रामनारायण दास जी महाराज ,आचार्य अरविन्द मिश्रा,विकास सिंह ,मुखिया राजेश सिंह ,मुखिया उपेंद्र सिंह ,पूर्व मुखिया वीणा देवी सहित काफी संख्या में रामभक्त उपस्थित थे ।

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