खत्म हुई दुविधा… सिगरा में सफेदपोशों को सब सुविधा !

श्रीनारद मीडिया / सुनील मिश्रा वाराणसी, उत्तर प्रदेश
वाराणसी / जिले में ऐसे-ऐसे जगलर सक्रिय हैं, जो व्यापार समाजसेवा की आड़ में नेताओं और अधिकारियों को साधे रखते हैं। मकसद साफ है फायदा लेना और बदले में उन्हें हर किस्म की “सेवा-सुविधा” उपलब्ध कराना। शहर में ऐसा ही एक सफेदपोश युवा व्यापारी इन दिनों चर्चा के केंद्र में है, जिसने नेताओं, अधिकारियों और माफियाओं का एक मजबूत सिंडीकेट खड़ा कर लिया है। कहने को वह वस्त्र व्यापारी है, मगर असल में उसकी यारी सफेदपोश धंधेबाजों से है। तीन-पांच के खेल में उसने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। बनारस से इलाहाबाद को जोड़ने वाले मार्ग पर बने उसके फार्म हाउस में रंगीनियों की महफिलें लगती रही हैं, जहां सूरा-शबाब और तमाम अय्याशियां आम बात हैं। उसे यूं ही नंबर एक का गिरोहबाज और “ग्रेट गैम्बलर” नहीं कहा जाता।
नेताओं और अधिकारियों से रिश्ते बनाना उसका शौक ही नहीं, उसकी रणनीति है। उनके साथ फोटो खिंचवाना, उन्हें घर बुलाना, मौके-बेमौके महंगे गिफ्ट भिजवाना इन सबमें वह माहिर है। उसकी कोशिश रहती है कि सत्ता और सिस्टम के हर कोने में उसकी पहुंच बनी रहे। इसी पहुंच का नतीजा है कि उसके शो-रूम की बिल्डिंग मानकविहीन होने के बावजूद अब तक सुरक्षित है। नाले पर कब्जा कर बनाई गई पार्किंग भी उसकी ‘सेटिंग’ का जीता-जागता उदाहरण है।
अधिकारियों और नेताओं को अपने पाले में रखने का उसे पूरा लाभ मिलता है। वह उनकी पत्नियों तक को वस्त्र और आभूषण उपहार में भिजवाता है, बदले में पैरवी और मदद हासिल करता है। टैक्स चोरी के मामले में भी वह बेहद शातिर बताया जाता है। चमक-दमक और दिखावे के दम पर दो हजार का माल दस हजार में बेचकर बाहरी ग्राहकों और नवधनाढ्यों से खुली लूट मचाता है।
फिलहाल पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल जारी है। इसकी परतें उघाड़ना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस तरह के सफेदपोश नेक्सस भविष्य में आम आदमी के लिए खतरनाक साबित होते हैं। सत्ता, सिस्टम और कारोबार की यह मिलीभगत अगर यूं ही चलती रही, तो इसका खामियाजा अंततः जनता को ही भुगतना पड़ेगा।

