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राष्ट्रपति जी ने अंबाला एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमान से उड़ान भरी

राष्ट्रपति जी ने अंबाला एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमान से उड़ान भरी

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला एयरबेस से 4.5 जैनरेशन के लड़ाकू विमान राफेल में 33 मिनट की उड़ान भरी। इस दौरान उनका विमान ग्रुप कैप्टन अमित ने उड़ाया, जबकि एयरचीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने दूसरे राफेल से उनको एस्कॉर्ट किया।

इन सबके बीच स्कवाड्रन लीडर शिवांगी भी राष्ट्रपति के साथ दिखाई दीं। वे फाइटर प्लेन पायलट हैं और आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने उनको पकड़ने का दावा किया था। राष्ट्रपति के साथ वे काफी सहज और विश्वास से भरी दिखाई दीं।

राष्ट्रपति जिस राफेल विमान में सवार थीं, उसने अंबाला एयरबेस के रनवे से 11 बजकर 26 मिनट पर उड़ान (टेकआफ) भरी। वे 33 मिनट तक उड़ान में रहीं। इसके बाद 11:59 बजे राफेल ने रनवे पर लैंड किया।

लैंड करने के बाद वे राफेल से नीचे उतरीं। यहां पर उनको राफेल की तकनीकी जानकारी भी दी। राफेल में उड़ान भरने वाली वे पहली राष्ट्रपति हैं। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह साढ़े नौ बजे भारतीय वायुसेना के विमान से एयरबेस पर पहुंची।

यहां पर एयरचीफ मार्शल ने उनका स्वागत किया। उनको एस्कार्ट कर लाया गया। इसके बाद उन्होंने गार्ड आफ आनर का निरीक्षण किया।

यह पहला मौका है, जब किसी राष्ट्रपति ने दूसरी बार लड़ाकू जहाज में उड़ान भरी है। इससे पहले उन्होंने 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयर फोर्स स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआइ फाइटर जेट में उड़ान भरी थी।

उन्होंने सुखोई में करीब 30 मिनट तक उड़ान भरी थी। इस विमान को स्कवाड्रन 106 के कमांडिंग आफिसर ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार ने उड़ाया था। इस विमान ने 800 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से लगभग दो किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरी थी।

अब अंबाला एयरबेस से राष्ट्रपति ने राफेल में उड़ान भरी है। राफेल में उड़ान भरने वाली वे पहली राष्ट्रपति हैं। बता दें कि इससे पहले साल 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने पुणे के लोहगांव एयरफोर्स बेस से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी।

सुबह करीब 11 बजे उन्होंने एयरबेस से उड़ान भरी और करीब 25 मिनट तक वे उड़ान में रहीं। इसके अलावा अंबाला एयरबेस से तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस ने भी मिग-21 में उड़ान भरी थी।

अंबाला एयरबेस पर सितंबर 2020 राफेल को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। अंबाला में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित फ्रांस की रक्षा मंत्री भी मौजूद रहीं, जबकि वायुसेना अधिकारी भी मौजूद रहे। अंबाला एयरबेस पर ही इनको तैनात किया गया था, जबकि इस दौरान इन का जिम्मा 17 गोल्डन एरो स्कवाड्रन को सौंपा गया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सिंह के साथ राफेल में उड़ान भी भरी। बता दें सिंह वहीं लड़ाकू पायलट हैं जिन्हें लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने झूठा दावा किया था।

स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारतीय महिला लड़ाकू पायलटों के दूसरे बैच का हिस्सा हैं। साथ ही वह फ्रांस द्वारा बनाए गये नये राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाने वाली पहली महिला पायलट हैं।

शिवांगी राफेल उड़ाने वाली पहली महिला पायलट

शिवानी सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ है। अभी वो हरियाणा के अंबाला में तैनात 17वें स्क्वाड्रन, ‘गोल्डन एरोज’ का हिस्सा हैं। सिंह इतिहास में एक ऐसी पायलट के रूप में भी दर्ज होंगी जिन्हें पकड़ने को लेकर पाकिस्तान ने झूठ बोला था। पाकिस्तानी ने ‘ऑपरेशन सिंदू’ के दौरान दावा किया गया था कि सिंह के राफेल को मार गिराया गया और उन्हें बंदी बना लिया गया है।

भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस झूठे दावे को 10 मई को ही खारिज कर दिया था। लेकिन बुधवार दोपहर स्क्वाड्रन लीडर सिंह द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ फोटो खिंचवाने के बाद इन दावों पर पूरी तरह से विराम लग गया। इस दावे को और मजबूती दी उनके पीछे खड़े राफेल विमान ने।

मिग-21 से राफेल तक का सफर

स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह का राफेल कॉकपिट तक का सफर आठ साल पहले भारतीय वायु सेना में कमीशन मिलने के साथ शुरू हुआ था। सिंह का ये सफर गहन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने घंटों हवाई युद्ध की रणनीति और लड़ाकू विमानों के इंजीनियरिंग पर गहन अध्ययन किया। साल 2017 में वायुसेना से कमीशन मिलने के बाद सिंह ने अपना पहला लड़ाकू विमान मिग-21 बाइसन उड़ाया। हालांकि मिग-21 अब भारतीय वायु सेना का हिस्सा नहीं है। 6 सितंबर 2025 को उसे सेवानिवृत्त कर दिया गया और उनकी जगह राफेल को नियुक्त किया गया।

विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से सिंह का कनेक्शन

साल 2017 में जब सिंह राजस्थान के सीमावर्ती बेस पर ट्रेनिंग ले रही थीं उस दौरान उन्होंने तत्कालीन विंग कमांडर (वर्तमान ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्धमान के साथ उड़ान भरी थी। बता दें अभिनंदन वर्धमान साल 2019 में ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ के हीरो रहे थे।

ग्रुप कैप्टन ने 27 फरवरी को एयर स्ट्राइक में अमेरिका द्वारा निर्मित एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16, को मिग-21 से मार गिराया था। यह बालाकोट हवाई हमले के दौरान हुआ था, जो 13 दिन पहले पुलवामा आतंकवादी हमले के लिए भारत की सैन्य प्रतिक्रिया थी।

दुर्भाग्यवश इस हवाई युद्ध के दौरान उनका विमान पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए कश्मीर के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके कारण उन्हें दुश्मन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में उतरना पड़ा। इस दौरान उन्हें पकड़ लिया गया और लगभग 60 घंटे दुश्मन केकब्जे में बिताने पड़े। अंततः भारत के भारी दबाव के कारण पाकिस्तान को उन्हें रिहा करना पड़ा।

 

 

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