डॉ अज्म का काव्य संग्रह ‘पेंसिल के निशां’ साहित्य की दुनिया में छोड़ेगा अमिट छाप
विद्वानों के समालोचना के साथ हुआ कवि सम्मेलन व मुशायरा
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, सारण (बिहार):

छपरा निवासी और माया नगरी मुंबई के गीतकार डाॅ मोअज्जम अज्म के द्वितीय काव्य संग्रह ‘पेंसिल के निशां’ का लोकार्पण करीमचक अवस्थित राहत पैलेस में किया गया. मौके पर विद्वानों ने किताब पर सारगर्भित समालोचना प्रस्तुत की. भाषाविद जुनैद मीर ने कहा कि पेंसिल के निशान तो मिट जाते हैं मगर डॉ मोअज्जम अज्म ने अपने काव्य संग्रह से जो निशान छोड़े हैं वह शाश्वत है. उन्होंने कहा कि किसी भी रचना, रिसर्च, योजना या पेंटिंग का आधार पहले पेंसिल ही होता है. बाद में ठोस और स्थायी रूप सामने आता है.
डाॅ अज्म ने साबित किया है कि उनकी रचनाएं भी उन पड़ावों से गुजर कर पूर्णता को पहुंची हैं. डाॅ अज्म का काव्य सफर लगभग चार दहाईयों का है. यह रचनाकार की विनम्रता को दर्शाता है कि अभी वह स्वयं को सृजन के डगर पर ही दिखाता है. इस पुस्तक में उन्होंने अपनी ऐसी रचनाओं का संकलन प्रस्तुत किया है जिसमें आधुनिकता के साथ क्लासिकल, लौकिक के साथ आध्यात्मिक, छायावाद के साथ यथार्थवाद की झलक मिलती है. जयप्रकाश विश्विद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो मजहर किबरिया ने अपने संबोधन में कहा कि डाॅ मोअज्जम ने अपने संग्रह में जो हौसला दिखाया है, उससे निराश हृदयों को प्रसन्नता मिलेगी.
जिले के साहित्यक धरोहर में इजाफा होगा. नई पीढ़ी और कवि स्तरीय रचनाशीलता की ओर आकर्षित होंगे. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे आयोजन प्रासंगिक हैं. मोअज्जम अपनी साहित्यिक और सामाजिक दोनों ही जिम्मेदारियों में सफ़ल रहे हैं. आशा है इसे वे और भी आगे बढ़ाएंगे. प्रो अब्दुस्सलाम अंसारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ मोअज्जम राज्य, देश और फिल्म जगत में अपनी रचना धर्मिता से छपरा का नाम रोशन कर रहे हैं. वह जिला के लिए एक धरोहर हैं. उनकी रचनाओं में कलात्मक और बौद्धिक तत्व के साथ आधुनिकता और आशा का संदेश है. उन्होंने आयोजन के बहाने सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने का सफलतापूर्वक प्रयास किया है.
राजेन्द्र कालेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ अलाउद्दीन खान ने साहित्य के दृष्टिकोण से डॉ अज्म की शख्सियत और उनकी खिदमात को स्वीकार किया. उन्होंने सारण की राष्ट्रीय एकता का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां की मिट्टी की विशेषता है कि मोअज्जम जैसे विचारधारा वाले लोग पैदा होते हैं जो पूरे देश को प्रेम का संदेश देते हैं. प्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ मुश्ताक अहमद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि डॉ मोअज्जम न केवल एक अच्छे शायर हैं बल्कि एक अच्छे इंसान और बुद्धिजीवी भी हैं.
उनके माध्यम से छपरा की धरती पर इतने सारे बाकमाल और सकारात्मक सोच के लोग जमा हुए हैं. एक लंबे अंतराल के बाद मैं ऐसे आयोजन में आया हूं .जिससे मुझे रूहानी शक्ति मिल रही है. उन्होंने कहा कि डाॅ अज्म का सफर लंबा है. वे और भी दूरी तय कर अदब के अंतरराष्ट्रीय स्तर सारण की नुमाइंदगी करेंगे. वरीय शायर शहजाद अहमद ने अरबी फारसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो एसएम रफीक आजम के ‘पेंसिल के निशां’ पर लिखे प्रस्तावना को बहुत ही आकर्षक और प्रभावी तरीके से पेश किया. उन्होंने कहा यह बड़ी उपलब्धि है कि फ़िल्मों के गीतकार व प्रसिद्ध शायर शकील आजमी ने भी इस पुस्तक का परिचय लिखा है.
मेहमानों का स्वागत मेजबान डॉ मोअज्जम ने किया. इस अवसर पर जगदम कालेज के विभागाध्यक्ष प्रो हसीबुर्रहमान के शानदार संचालन और डाॅ यूएस विश्वकर्मा की अध्यक्षता में मुशायरा भी आयोजित किया गया. जिसमें नजमुल्लाह नज्म, मोहित कुमार, मोईज बहमनबरवी, अज्ञात, प्रो शमीम परवेज, दक्ष निरंजन शंभू, राकेश कुमार फौजी, सुरेश चौबे, ऐनुल बरौलवी, बैतूल्लाह बैत, डाॅ समद भयंकर, रवि भूषण हंसमुख, जुनैद, अफरोज हैदर, चांद उस्मानी चौपट, शाहिद जमाल, प्रो शकील अनवर आदि ने रचनाएं प्रस्तुत किया. मौके पर जेपीयू के प्रॉक्टर डाॅ विश्वामित्र पाण्डेय, प्रो भगवान पाण्डेय, एडवोकेट मंजूर अहमद, सैयद परवेज हुसैन, डाॅ शहजाद आलम, एहसान आलम अरसलान आदि उपस्थित थे.
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