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भव्य कलश व शोभा यात्रा यात्रा के साथ काली माता मंदिर में पिंडी प्रतिष्ठा सह नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ

भव्य कलश व शोभा यात्रा यात्रा के साथ काली माता मंदिर में पिंडी प्रतिष्ठा सह नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ

श्रीनारद मीडिया, के के सिंह सेंगर, एकमा, छपरा (बिहार):

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सारण जिला के एकमा प्रखंड के परसा दक्षिणी पंचायत के एकड़ीपुर गांव स्थित काली माता मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद पिंडी प्रतिष्ठा व नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ सोमवार को भव्य कलश व शोभा यात्रा के साथ किया गया। झांकी, रथ, गाजे-बाजे व जयघोषों के बीच निकली कलश यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं व पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे। इस दौरान पूरे परसागढ़ क्षेत्र का वातावरण भक्ति व आस्था से सराबोर हो उठा।

भक्ति-मय माहौल में निकली कलश यात्रा:

कलश यात्रा यज्ञस्थल से प्रारंभ होकर प्रसादीनाथ बाबा मठ होते हुए परसागढ़ स्थित वैष्णो देवी मंदिर के समीप पोखरा घाट तक पहुंची। घाट पर वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-विधि के बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र जल से कलश भरा।
इसके बाद सिर पर जल से भरे कलश उठाए हजारों महिलाओं की लंबी कतार नगर क्षेत्र का परिभ्रमण करती हुई पुनः यज्ञस्थल पहुंची, जहां कलश स्थापना की गई। मार्ग भर में देवी-भजनों, मंगलगीतों व भक्ति-उल्लास की गूंज बनी रही।

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ का शुभारंभ:

यात्रा के यज्ञस्थल पर पहुंचने के बाद वाराणसी से आए यज्ञाचार्य रामभद्र ओझा के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महायज्ञ की शुरुआत की गई।
महायज्ञ के यजमान स्थानीय मुखिया काजल तिवारी एवं उनके पति समाजसेवी श्याम किशोर तिवारी रहे। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में शांति, सम्पन्नता और सुख-समृद्धि की मनोकामना करते हुए कलश स्थापित किया।

रोज होगा रासलीला, प्रवचन व रामलीला का मंचन:

आयोजन समिति ने बताया कि महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन दोपहर में रासलीला, शाम में प्रवचन व रात्रि में रामलीला का मंचन किया जाएगा। बताया गया है कि दैनिक अनुष्ठान के आयोजन इस प्रकार से हैं: 3 जनवरी को पञ्चांग पूजन व मंडप प्रवेश, 4 जनवरी को दैनिक पूजन, अरणी मंथन एवं जलाधिवास, 5 जनवरी को अन्नाधिवास, 6 जनवरी वस्त्राधिवास, 7 जनवरी महास्नान, नगर भ्रमण व शय्याधिवास, 8 जनवरी को अचल प्राण-प्रतिष्ठा, 9 जनवरी को हवन एवं 10 जनवरी को विधिवत हवन यज्ञ एवं विशाल भंडारे के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन 12 बजे से 3 बजे तक रासलीला, 4 बजे से 6 बजे तक प्रवचन एवं शाम को 7 बजे से 11 बजे तक रामलीला का कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए मंच, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था व श्रद्धालु दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया गया है।
अनुष्ठान स्थल पर झूले और विविध दुकानों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे पूरा क्षेत्र एक मेले जैसी रौनक से भर गया है। दिनभर ग्रामीणों तथा आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का लगातार आगमन जारी है।

आयोजन समिति के अनुसार पूरा महायज्ञ ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों के सामूहिक सहयोग से संचालित हो रहा है।
बताया गया है कि सुरक्षा, साफ-सफाई व यातायात व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों की टीमें लगातार मुस्तैद हैं, जिससे कार्यक्रम सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हो सके।
अनुष्ठान-स्थल पर बच्चों व श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए झूला व विभिन्न दुकानों के लगने से मेले जैसा वातावरण बन गया है। महायज्ञ का आयोजन समस्त ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों के सहयोग से किया गया है।

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