श्रीराम कथा से पूज्य राजन जी महाराज कर्तव्य बोध के जागरण का पावन संदेश देते हैं
सीवान के वी एम इंटर कॉलेज के प्रांगण में 8 मार्च से 16 मार्च तक होनी है श्रीराम कथा
आजपूर्ण, लालित्यपूर्ण, संगीतमय श्री राम कथा का सभी को हैं बेसब्री से इंतजार
✍️गणेश दत्त पाठक
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

“सब नर करहि परस्पर प्रीति।
चलहि स्वधर्म निरत श्रुति नीति॥”
सिवान। कर्तव्य बोध के जागरण से परिवार, समाज उन्नति,समृद्धि और प्रगति के पथ पर निरंतर चलता जाता है तथा राष्ट्र भी सशक्त होता जाता है। जीवन को सार्थकता भी प्राप्त कर्तव्य बोध से ही होती है। श्री राम चरित मानस में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का सम्पूर्ण चरित्र ही कर्तव्य बोध को जागृत, तरंगित और ऊर्जस्वित करता है। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज जब श्रीराम कथा सुनाते हैं तो मानस के हर प्रसंग में व्याप्त कर्तव्य बोध की अवधारणा पर उनका विशेष जोर रहता हैं।
कर्तव्य बोध की भावना का जागरण हर व्यक्ति के जीवन को श्रृंगारित कर सकता है। जब नागरिक कर्तव्य बोध को संजीदगी और गंभीरता से समझते हैं तो राष्ट्र सशक्त ही नहीं होता अपितु उसमें जिम्मेवारी के तथ्य का समावेश भी होता है। सामाजिक एकता, राष्ट्रीय विकास, न्याय, समृद्धि, राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ नागरिकों के सम्मान की भावना का जागरण होता है और राष्ट्र को प्रतिष्ठा भी हासिल होती है। अंतराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज जब लालित्यपूर्ण, रसमयी श्री राम कथा का वाचन करते हैं तो कर्तव्य बोध की अवधारणा जन हृदय में एक प्रतिष्ठित स्थान हासिल करती जाती है।
पूज्य राजन जी महाराज अपने श्रीमुख से श्रीराम कथा वाचन के दौरान बताते रहते हैं कि भगवान श्रीराम अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए अपने व्यक्तिगत सुखों का भी त्याग करते हैं। राजा दशरथ अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए अपने पुत्र को वनवास भेजते हैं। भगवान लक्ष्मण अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए अपने सुखों का त्याग करते हैं।
भाई भरत अपने कर्तव्य के लिए राजभवन में रहकर एक संन्यासी का जीवन जीते हैं। माता सीता का कर्तव्य बोध उनके परिस्थितियों के साथ अनुकूलन में दिखता है। भगवान राम राजा के तौर पर न्याय और प्रजा की समृद्धि में अपने कर्तव्य बोध को देखते हैं। अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए अपने प्रेम का भी त्याग कर जाते हैं। अपने कर्तव्य का पालन के लिए श्रीराम शत्रुओं का संहार भी करते हैं।

पूज्य राजन जी महाराज अपने श्रीमुख से कथा वाचन के दौरान श्री राम चरित मानस के कर्तव्य बोध से सम्बंधित एक एक प्रसंग की सुमधुर प्रस्तुति से श्रद्धालुओं का सिर्फ सकारात्मक मार्गदर्शन ही नहीं करते उनमें राष्ट्र प्रेम की भावना को भी जागृत करते हैं जिससे उनके श्रीमुख से श्री राम कथा का श्रवण एक अतीन्द्रिय और अलौकिक अनुभव बन जाता है।
सीवान श्री राम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह, सर्वव्यवस्था प्रमुख विजय जादूगर, सचिव डॉक्टर राकेश तिवारी, सदस्य नंद द्विवेदी आम जनता से निवेदन कर रहे हैं कि सिवान के वी एम इंटर कॉलेज में आयोजित 8 मार्च से 16 मार्च तक आयोजित होनेवाली पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से होने वाली ओजस्वी, लालित्यपूर्ण, रसमयी, संगीतमय श्री राम कथा के आध्यात्मिक आनंद की सुखद अनुभूति लेने आम जन अवश्य पधारें।
