महागठबंधन के भीतर बगावत ने सियासी हलचल तेज कर दी है,क्यों?
रण छोड़ने वालों के साथ समर्थक नहीं टिकते
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत NDA के सभी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर ली है. NDA के 202 विधायकों ने एकजुट होकर वोट डाला, जबकि महागठबंधन खेमे में बड़ी टूट देखने को मिली. महागठबंधन के केवल 37 विधायक ही मतदान में शामिल हुए, जबकि जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे. इसपर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है और प्रतिक्रिया जाहिर की है.
चुनाव के दौरान कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे. इससे महागठबंधन की रणनीति पूरी तरह ध्वस्त हो गई. पार्टी नेताओं द्वारा लगातार संपर्क की कोशिश के बावजूद ये विधायक वोटिंग से दूर रहे.
कांग्रेस का आरोप- ‘विधायक चोरी कर रही बीजेपी’
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उनके तीन विधायकों को ‘चुरा’ लिया है. इसके विरोध में पटना स्थित सदाकत आश्रम के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने ‘विधायक चोरी बंद करो’ के नारे लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका.
नाराजगी बनी वजह, विधायकों ने नहीं किया मतदान
ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए. उन्होंने बताया कि उनकी मां की तबीयत खराब थी. वहीं कांग्रेस के फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास ने साफ कहा कि उन्हें महागठबंधन का उम्मीदवार पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने वोट नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अनदेखी की गई.
उम्मीदवार चयन पर उठे सवाल
वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी उम्मीदवार को लेकर नाराजगी जताई. उनका कहना था कि स्थानीय समीकरणों के हिसाब से प्रत्याशी नहीं चुना गया. वहीं मनिहारी से विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि दलित, अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग की अनदेखी की गई, जिसके विरोध में उन्होंने मतदान का बहिष्कार किया.
NDA की रणनीति सफल, महागठबंधन में दरार उजागर
इस चुनाव में NDA की एकजुटता और महागठबंधन की अंदरूनी कलह साफ नजर आई. जहां NDA ने सभी सीटों पर कब्जा कर लिया, वहीं महागठबंधन के भीतर असंतोष और बगावत खुलकर सामने आ गई है. आने वाले दिनों में इसका असर बिहार की राजनीति पर साफ दिख सकता है.
- राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और हार: मार्च 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के 37 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की बात सामने आई, जिससे NDA ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। महागठबंधन के विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने की खबरों से राजद खेमे में खलबली मची है।
- नेतृत्व में भरोसे की कमी: महागठबंधन के कई नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया (decision-making) से असंतुष्ट हैं, जिसे ‘एकाधिकार’ माना जा रहा है।
- सीट बंटवारे में खींचतान: विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सीट बंटवारे को लेकर राजद और कांग्रेस के बीच भारी मतभेद रहे। कांग्रेस को कम सीटें मिलने और मनचाही सीटें न मिलने से पार्टी के भीतर असंतोष पनपा।
- विधायकों में उपेक्षा का भाव: कई कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि गठबंधन में उनकी अनदेखी की जा रही है और उन्हें “बंधुआ मजदूर” की तरह समझा जा रहा है, जिसके कारण उन्होंने पाला बदलने का संकेत दिया।
- NDA द्वारा सेंधमारी: एनडीए (BJP-JDU) लगातार महागठबंधन के विधायकों को अपनी तरफ लाने का प्रयास कर रहा है, और राजद के 17-18 विधायकों के पाला बदलने की चर्चा है।
- बिहार में राज्यसभा चुनाव का रिजल्ट पूरी तरह एनडीए के पक्ष में रहा. पांच में से एक सीट पर महागठबंधन के उम्मीदवार जीत सकते थे लेकिन 4 विधायकों ने वोट नहीं डाला और हार गए. इन चार में से 3 कांग्रेस और 1 राजद के विधायक थे. तेजस्वी यादव दावा कर रहे थे कि हर हाल में महागठबंधन उम्मीदवार एडी सिंह जीतेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एनडीए के सभी उम्मीदवार जीत गए. इस करारी हार के तुरंत बाद तेजस्वी यादव अपने परिवार के साथ कोलकाता निकल गए. उनकी इस यात्रा पर लालू यादव के खास रहे शिवानंद तिवारी ने निशाना साधा है.
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क्या बोले शिवानंद
शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा, “पराजय से ज्यादा बुरा है पराजय के उपरांत मैदान छोड़ देना. सुना है तेजस्वी कोलकाता के लिए निकल गए. इसके पूर्व विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भी उन्होंने बिहार छोड़ दिया था. बीवी-बच्चों के साथ पिकनिक मनाने के लिए यूरोप की यात्रा पर निकल गए थे. पराजय के बाद रण छोड़ देने वाले नेताओं के साथ उनके समर्थक नहीं टिकते हैं.”
शिवानंद तिवारी सोशल मीडिया पर कई बार तेजस्वी यादव के फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं. मंगलवार को एकबार फिर उन्होंने तेजस्वी यादव की इस यात्रा को कटघरे में खड़ा किया है. इस पोस्ट के जरीय उन्होंने कहा कि जब कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव हो तो पार्टी के नेता को उनके साथ रहना चाहिए, ना कि तेजस्वी यादव की तरह भाग जाना चाहिए.
राज्यसभा चुनाव में कौन-कौन जीता
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर हुए चुनाव में सत्ताधारी एनडीए ने जीत हासिल की. भाजपा चीफ नितिन नवीन, जदयू चीफ और बिहार सीएम नीतीश कुमार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा चीफ उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और भाजपा के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम ने जीत का परचम लहराया. एक भी सीट महागठबंधन के खाते में नहीं गई.
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