“गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती”
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

एक लड़के की जिंदगी का सफर एक गांव से शुरू होता है, जे एन यू और यूपीएससी की तैयारी की रहस्यमय दुनिया में विचरित कर, फिर वह अमेरिका में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर एक प्रतिष्ठित मुकाम हासिल करता है। लेकिन अपने दिल में गांव की मिट्टी के प्रति बेपनाह लगाव रखता है। क्योंकि यह मिट्टी उसे सदैव ऊर्जस्वित, प्रेरित करती रहती है। अपने माटी के प्रति अपनी असीम श्रद्धा, बेपनाह लगाव को वह अपने शब्दों से पिरोता है और एक पुस्तक रचित होती है “गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती”।
यह पुस्तक पढ़ने के बजाय उन चुनौतियों को महसूस करने का सुअवसर प्रदान करती है, जो गांव के एक अबोध बच्चे के अमेरिका के पेशेवर माहौल तक रहने के दौरान आती है। यह पुस्तक पाठक से आत्मीय संवाद कायम करती है। आत्मीयता के भाव को तरंगित करती है। संवेदना के तार को झंकृत करती है। भावनाओं की लहरों को अलंकृत करती है।
चेतना के तत्व को उद्घाटित करती है। सफलता की खुशबू से परिचय कराती है। स्नेह, संस्कार, सहृदयता की त्रिवेणी में डुबकी लगवाती है। जीवन के अनुभव से मार्गदर्शन दिलवाकर प्रेरणा की अविरल सरिता को प्रवाहित करती है। सामाजिक मुद्दों, विशेषकर शिक्षा की विसंगतियों, कोरोना काल की विवशता को उजागर करती है। प्रेम की बेबाकी, परिवार की महिमा का बखान कर जीवन में विकास, उन्नति, समृद्धि के सार तत्व के वास्तविक महत्व को समझाती है।

प्रतिस्पर्धा के दौर में उपलब्ध अन्य अवसरों की संभावनाओं पर भी यह पुस्तक प्रकाश डालती है और इस तथ्य को बेहद संजीदगी से प्रकाशित करती है कि निरंतर और अनवरत प्रायस सफलता दिलाते हैं और समृद्धि से साक्षात्कार भी कराते हैं। नशे और मोबाइल से दिग्रभमित हो रहे युवाओं को यह पुस्तक संदेश भी देती है कि जिंदगी कुछ बड़ा काम करने के लिए मिली है। कुछ सपनों को देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मिली है। किसी भी हालात में दिग्भ्रमित और हताश नहीं होना है। जिंदगी का पर्याय ही संभावनाओं पर फोकस और ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग है।
….और सबसे बड़ी बात कि गांव की मिट्टी के मायने को सराहती और सुलझाती दिखती है। वह गांव की मिट्टी, जो जीवन की बुनियाद को संस्कारों से सुसज्जित करती है। सांस्कृतिक सरोकारों से समृद्ध करती है। विरासत की गाथा कहती है। पहचान की सटीकता को साबित करती है। सृष्टि के निकट लाती है l सरलता और शुद्धता की सौंधी महक से सुवासित कर मार्मिक अंदाज में कह उठती है – ‘बेटा तुम कितनी भी ऊंचाई पर हो, तुम्हारी जड़ तो मैं ही हूं।’
मित्रवर और संयुक्त राज्य अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में रहनेवाले प्रख्यात मैनेजमेंट कंसल्टेंट श्री सांतानंद मिश्रा द्वारा रचित पुस्तक ” गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती” के उनके गांव उखई में विमोचन समारोह में सहभागिता एक शानदार अनुभव बनी।
