“दाहा नदी: सीवान की अस्मिता से खिलवाड़ और ‘सिर्फ चुनावी’ राजनीति!”
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सीवान की जनता अब और नहीं ठगेगी! भाजपा सरकार के लिए ‘सनातन’ और ‘विकास’ क्या सिर्फ वोट मांगने के औजार हैं? अगर नहीं, तो सीवान की जीवनरेखा दाहा नदी आज अपनी अंतिम सांसें क्यों गिन रही है?
कड़वे तथ्य जो भाजपा के ‘विकास’ की पोल खोलते हैं: फाइलों में कैद दाहा का अस्तित्व: अधिवक्ता प्रयाग कुमार के संघर्ष से मामला NGT पहुँचा। BUDICO सीवान ने 16/01/2025 को ही प्रशासनिक स्वीकृति के लिए फाइल पटना भेजी। लेकिन 2026 आ गया, वह फाइल पटना के वातानुकूलित कमरों में धूल चाट रही है।
नेताओं की लंबी फौज, नतीजा सिफर: नगर विकास मंत्री रहे जीवेश कुमार जी से लेकर नितिन नवीन जी और विजय कुमार सिन्हा जी तक—सैकड़ों पत्र और ईमेल भेजे गए। महामहिम राष्ट्रपति कार्यालय से मुख्य सचिव को निर्देश आया, सांसद विजय लक्ष्मी देवी ने पत्र लिखा, यहाँ तक कि DM सीवान ने भी पत्राचार किया। आखिर कौन है जो इन सबके ऊपर बैठा है और फाइल को आगे नहीं बढ़ने दे रहा?
अपनों की ही बेरुखी: सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि हमारे स्थानीय विधायक श्री मंगल पांडेय जी खुद सरकार में दो-दो विभागों के मंत्री हैं। जब अपने ही विधायक और मंत्री के रहते हुए विधानसभा में सवाल उठने के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल रही, तो इसका साफ़ मतलब है—भाजपा सीवान का विकास चाहती ही नहीं!
जब मामला न्यायालय (NGT) में लंबित है, तो सरकार ‘Administrative Approval’ रोकने का पाप क्यों कर रही है? क्या आपकी ‘जल-जीवन-हरियाली’ और ‘नमामि गंगे’ की कसमें केवल विज्ञापनों के लिए हैं? सीवान की जनता देख रही है कि कैसे एक ऐतिहासिक नदी को अतिक्रमण और कचरे के ढेर में बदलने दिया जा रहा है।
दाहा नदी का सौन्दर्यीकरण और अतिक्रमण मुक्ति सीवान की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। अगर सरकार ने जल्द ही इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो सीवान की जनता इस ‘विकास विरोधी’ रवैये का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
जागीये सीवान, अपनी नदी बचाइए!
अधिवक्ता प्रयाग कुमार के facebook से उद्धत
