केरल का वायनाड जिला एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में है
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

दो साल पहले 30 जुलाई 2024 को केरल के वायनाड जिले के मेप्पाडी पंचायत के चोरालमाला और मुंडक्कई में हुए लैंडस्लाइड की यादें मंगलवार को एक बार फिर ताजा हो गई. उस भीषण भूस्खलन में 300 लोगों ने अपनी जान गंवाईं थी और दो गांव पूरी तरह से नष्ट हो गए थे. इसी चोरालमाला से केवल चार किलोमीटर दूर मीनाक्षी क्षेत्र में मंगलवार 7 जुलाई को हुए भूस्खलन में 3 लोगों की जान चली गई जबकि 7 लोग अब भी लापता हैं.
वायनाड में बार-बार क्यों होता है लैंडस्लाइड
इस घटना से आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर केरल का वायनाड जिला बार- बार इस प्राकृतिक आपदा का शिकार क्यों होता है. इसके पीछे वजह है वायनाड की भौगोलिक बनावट और इस इलाके में होने वाली अत्यधिक मानसूनी वर्षा. इसके साथ- साथ यहां होने वाले मानवीय गतिविधियों के कारण भी यह इलाका भूस्खलन के लिए काफी संवेदनशील है. जैसे कि तीव्र ढलान वाली भौगोलिक स्थिति, मिट्टी की विशेष बनावट और सीस्मिक जोन (जहां भूकंप की आशंका ज्यादा होती है) के साथ साथ जलवायु परिवर्तन भी एक वजह है. वनों की कटाई, अवैज्ञानिक निर्माण कार्य और दूसरे मानवीय कारक भी यहां होने वाली भूस्खलन के लिए जिम्मेदार हैं.
लैंडस्लाइड से भारत को कितना खतरा है ?
केरल भारत का इकलौता राज्य नहीं है, जो इस तरह की विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होता है.भारत के 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेश इस आपदा के साए में है . इतना ही नहीं भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट की मानें तो भारत दुनिया के शीर्ष 5 सबसे अधिक भूस्खलन-संभावित देशों में शामिल है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, भारत का लगभग 12.6% भूभाग यानी कि लगभग 4.2 लाख वर्ग किलोमीटर इलाका भूस्खलन की चपेट में है.
ISRO के लैंडस्लाइड एटलस के अनुसार दर्ज भूस्खलन घटनाओं में भारत का सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका उत्तर-पश्चिम हिमालय क्षेत्र हैं. कच्ची पहाड़ियों और भूकंपीय संवेदनशीलता के कारण यह सबसे खतरनाक माना जाता है. इस भाग में भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य आते हैं. यहां लैंडस्लाइड 66.5% घटनाएं होती हैं. भारत में मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश वाला उत्तर-पूर्व हिमालय क्षेत्र में 18.8% लैंडस्लाइडकी घटनाएं दर्ज होती हैं, जबकि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र का पहाड़ी इलाका जिसे पश्चिमी घाट कहा जाता है. पश्चिमी घाट के इस इलाके में 14.7% लैंडस्लाइड की घटनाएं होती हैं.
भारत में सबसे ज्यादा लैंडस्लाइड कहां होता है ?
उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल जिला भारत में सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में शीर्ष पर हैं. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो सिक्किम का 57.6% हिस्सा भूस्खलन के प्रति संवेदनशील है. वहीं पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक भूस्खलन की घटनाएं (12,385) मिजोरम में दर्ज की गई हैं. जबकि गैर-हिमालयी राज्यों में केरल सबसे संवेदनशील है.
क्यों होता है लैंडस्लाइड ?
पहाड़ी ढलानों पर जमी मिट्टी, चट्टानें और मलबा जब अचानक तेजी से नीचे की ओर खिसकने लगते हैं, तो उसे लैंडस्लाइड (भूस्खलन) कहते हैं. लैंडस्लाइड होने के कारणों को लेकर विशेषज्ञ कहते हैं कि यह घटना तब होती है जब पहाड़ी ढलान को थामे रखने वाली मिट्टी और चट्टानें कमजोर हो जाती है . मिट्टी और चट्टानों के कमजोर होने के पीछे मुख्य रूप से प्राकृतिक और मानवीय कारक होते हैं.
अत्यधिक मूसलाधार बारिश का होना, भूकंप आना और किसी कारण से मिट्टी का कटाव या कमजोर भूगर्भीय संरचना के कारण होने वाली लैंडस्लाइड प्राकृतिक कारणों से होती है जबकि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई , अवैज्ञानिक निर्माण कार्य और गलत तरह से खेती करने के तरीके जैसे कि पहाड़ों पर ढलान की दिशा में खेती करना या पानी की निकासी का सही इंतजाम न होना मानवीय कारकों में आते हैं.
