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दिल्ली से चारों दिशाओं में चलेंगी चार बुलेट ट्रेन

दिल्ली से चारों दिशाओं में चलेंगी चार बुलेट ट्रेन

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम करीब 80 फीसदी तक पूरा हो गया है। इस बारे में हाल ही में खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था। लेकिन अब सरकार दिल्ली में भी बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बना रही है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बाद, केंद्र सरकार अब दिल्ली-NCR इलाके को भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का एक बड़ा हब बनाने की तैयारी कर रही है।

दिल्ली से चलेगी बुलेट ट्रेन

भारत सरकार दिल्ली से शुरू होने वाले चार बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए प्लान बना रही है, जिनमें प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर सबसे अहम है। दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट उन सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से एक है जिनकी घोषणा केंद्र सरकार ने बजट के दौरान की थी। इन कॉरिडोर पर करीब दो लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है।

दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी कॉरिडोर

रेलवे के प्रस्तावित प्रोजेक्ट में दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी अहम है, जिससे दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर प्रमुख धार्मिक, राजनीतिक और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा।

दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का रूट नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, नए भदोही और वाराणसी से होकर गुजरेगा। लखनऊ को अयोध्या से जोड़ने के लिए 124-135 किलोमीटर का एक अलग हाई-स्पीड लिंक भी बनाने का प्लान है।

दिल्ली से लखनऊ को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर की लंबाई लगभग 813-865 किलोमीटर होने की उम्मीद है। साथ ही इस कॉरिडोर पर 13 से 15 स्टेशन रखे जा सकते हैं। बुलेट ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलेंगी, जिससे दिल्ली और लखनऊ के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग 2 घंटे 10 मिनट और दिल्ली से वाराणसी का समय लगभग 3 घंटे 50 मिनट हो जाएगा।

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस प्रोजेक्ट के लिए सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के काम के लिए पहले ही टेंडर जारी कर दिए हैं।

दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर

भारत का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन बनेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली-वाराणसी लाइन को ही सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा, जिससे उत्तरी भारत सीधे पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर से जुड़ जाएगा।

दिल्ली से वाराणसी और फिर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक जाने वाली इस लाइन को असम में गुवाहाटी तक भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह प्रस्तावित रूट दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, लखनऊ, वाराणसी, बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी) से होकर गुजरेगा।

इस कॉरिडोर की लंबाई लगभग 1,705 किलोमीटर होने की उम्मीद है और इससे दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच यात्रा का समय लगभग 20 घंटे से घटकर करीब 6 घंटे हो सकता है।

दिल्ली-जयपुर-उदयपुर-अहमदाबाद कॉरिडोर

दिल्ली को जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद के जरिए राजस्थान और गुजरात से भी जोड़ने का भी प्लान है। इस प्लान के तहत एक और प्रस्तावित कॉरिडोर है।

इन लाइन को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से जोड़ा जा सकता है, जिससे दिल्ली से मुंबई तक बिना रुकावट तेज रफ्तार से यात्रा की जा सकेगी।

इस कॉरिडोर पर द्वारका, बिजवासन, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बहरोड़ (नीमराना), शाहपुरा, जयपुर, किशनगढ़ (अजमेर), विजय नगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर और साबरमती (अहमदाबाद) स्टेशनों को शामिल किया जा सकता है।

यह कॉरिडोर लगभग 886 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 14-15 स्टेशन होंगे। यह दिल्ली, राजस्थान और गुजरात की राजधानियों को जोड़ेगा।

हालांकि इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है, लेकिन केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से अंतिम वित्तीय मंजूरी का अभी भी इंतजार है।

दिल्ली-अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर

दिल्ली-अमृतसर कॉरिडोर अमृतसर पहुंचने से पहले रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना और जालंधर से होकर गुजरेगा। भविष्य में, इसे जालंधर से पठानकोट होते हुए जम्मू और कटरा तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे वैष्णो देवी मंदिर तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

दिल्ली-अमृतसर प्रस्तावित कॉरिडोर लगभग 450-500 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 10-12 स्टेशन होंगे। इस कॉरिडोर के बनने से दिल्ली और अमृतसर के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा। यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती सर्वे और रूट अलाइनमेंट के चरण में है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

मुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहले बुलेट ट्रेन 2027 में शुरू हो सकती है, जो कि सूरत से बिलिमोरा के बीच चलेगी। वहीं पूरे मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य है।

वहीं दिल्ली से जुड़े चार प्रस्तावित कॉरिडोर में से कोई भी अभी निर्माण चरण में नहीं पहुंचा है। सभी प्रोजेक्ट अभी सर्वे, मंजूरी और डिजाइन के अलग-अलग चरण में हैं।

सरकार हर साल लगभग 250 किलोमीटर का हाई-स्पीड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रही है। भारत अपनी पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन, B35 भी विकसित कर रहा है, जिसके ट्रायल जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

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