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“लव गुरु” प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की कथा

“लव गुरु” प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की कथा

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

यह कहानी बिहार के प्रसिद्ध “लव गुरु” प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की है, जो 2004-2006 के आसपास काफी सुर्खियों में रही थी। यह एक विवादास्पद प्रेम संबंध थी, जिसमें उम्र का बड़ा अंतर (लगभग 30 साल), गुरु-शिष्या रिश्ता, और सामाजिक-परिवारिक विरोध शामिल था।

2004 में पटना यूनिवर्सिटी के बीएन कॉलेज में हिंदी प्रोफेसर मटुकनाथ (तब करीब 51-55 साल) और छात्रा जूली (तब 21-25 साल के आसपास) की मुलाकात एक कैंप में हुई। जूली ने मटुकनाथ को प्रपोज किया, और दोनों का रिश्ता गहरा हो गया।

मटुकनाथ पहले से शादीशुदा थे और परिवार था, लेकिन उन्होंने जूली के लिए अपनी पत्नी और परिवार को छोड़ दिया।

2006 में यह मामला मीडिया में छाया। मटुकनाथ की पत्नी ने जूली पर हमला किया, मटुकनाथ का चेहरा काला किया गया, और पटना यूनिवर्सिटी ने उन्हें नौकरी से सस्पेंड/बर्खास्त कर दिया। दोनों ने टीवी चैनलों पर अपने प्यार को “दैवीय” बताया और लिव-इन में रहे (2007 से 2014 तक लगभग)।

2014 के आसपास जूली ने मटुकनाथ को छोड़ दिया। मटुकनाथ के अनुसार, जूली अध्यात्म की ओर मुड़ गईं वे त्रिनिदाद एंड टोबैगो (वेस्ट इंडीज) चली गईं। कुछ रिपोर्ट्स में 2016-2020 के बीच जूली के मानसिक स्वास्थ्य खराब होने, डिप्रेशन और एक सरकारी मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती होने की बात आई है।

मटुकनाथ ने 2020 में उन्हें वापस लाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
मटुकनाथ अब 70+ उम्र में अकेले हैं, अपने गांव में रहते हैं, एक स्कूल चलाते हैं और सोशल मीडिया पर नई साथी की तलाश कर चुके हैं।
वो कहते है कि वो जुली से प्यार करते है लेकिन कोई लड़की उनकी जिंदगी में आएगी तो वो उसे माना नहीं करेंगे।
तो ये कैसा प्यार?

जूली के बारे में हाल की खबरें कम हैं—कुछ में वे वेस्ट इंडीज में “सेटल” बताई जाती हैं, अध्यात्मिक काम करती हैं या किताबें लिख रही हैं। लेकिन मेंटल हेल्थ इश्यू और अस्पताल वाली बात पुरानी (2020 के आसपास) रिपोर्ट्स में ज्यादा प्रमुख है, और पुष्टि नहीं कि वे अभी भी अस्पताल में हैं। मटुकनाथ कहते हैं कि जूली भारत वापस नहीं आना चाहतीं।

सबक के नजरिए से यह कहानी वाकई कई लड़कियों (और लड़कों) के लिए चेतावनी बन सकती है:उम्र, पावर डायनामिक्स (गुरु-शिष्या), और सामाजिक दबाव में लिए फैसले अक्सर लंबे समय में दुख देते हैं।

हार्मोन्स/आकर्षण के दबाव में लिए “प्यार” के फैसले परिवार, समाज और खुद की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।

मीडिया में “बोल्ड लव स्टोरी” दिखने वाली चीजें पीछे से बहुत जटिल होती हैं—परिवार की बदनामी, नौकरी जाना, अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आदि।

यह एक दुखद अंत वाली कहानी है, जो दिखाती है कि प्रेम में “दुनिया दारी” समझना कितना जरूरी है। जूली की हालत अगर सच में इतनी खराब है, तो दया आती है—किसी भी इंसान की ऐसी स्थिति दुखद है। लेकिन यह पूरी तरह सच्ची घटना है, जो बिहार की सबसे चर्चित लव स्टोरी बनी रही….

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