होर्मुज में जहाज पर हमले में भारतीय की मौत
मार्च से अब तक 13 भारतीयों की मौत, 3 लापता
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत गई। इसको लेकर विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ईरान के डिप्लोमैट्स को तलब किया है। इनमें डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (DCM) मोहम्मद जवाद होसैनी भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने कड़ा औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इन हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, मोम्बासा और अल बहिया नाम के दो टैंकरों पर उस समय हमला हुआ जब वे होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते से गुजर रहे थे।
घायलों में 6 भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक
इस हमले में मोम्बासा पर सवार एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई और आठ अन्य लोग घायल हो गए। इनमें से चार गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
यूएई ने भी किया विरोध
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमले के बाद दोनों टैंकरों में आग लगने से उन्हें नुकसान भी पहुंचा। बाद में आग पर काबू पा लिया गया। मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को खतरा है।
बयान में कहा गया, “यूएई के पास इस तनाव को बढ़ाने वाली कार्रवाई का जवाब देने और अपने इलाके, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है।” मंत्रालय ने आगे कहा कि वह किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है।
मार्च से अब तक 13 भारतीयों की मौत, 3 लापता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रही। इसके साथ ही अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध में मरने वाले भारतीयों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
सोमवार (13 जुलाई) को ईरान ने दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। अल बाहिया और मोम्बासा नाम के इन जहाजों में कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। इस हमले में दस भारतीय नागरिकों के घायल होने की सूचना है जिनमें से दो की हालात बेहद गंभीर है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मार्च 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद अभी तक कुल 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है जबकि तीन लापता हैं। ज्यादातर भारतीय ईरान की तरफ से किये गये हमलों में मारे गये हैं।
ईरान के ताजे हमले में दो भारतीयों की मौत के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरान के उपराजदूत को तलब किया और पूरी स्थिति पर अपनी गंभीर आपत्ति जताई है। युद्ध की शुरुआत होने के बाद यह दूसरा मौका है जब भारत ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को बुला कर भारतीय जहाज पर हुए हमले या ईरानी हमले में मारे गये भारतीयों के हालात पर अपने गुस्से का इजहार किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल का कहना है कि भारत इन हमलों की कड़ी निंदा करता है। हम नाविकों को निशाना बनाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, खासकर होर्मुज की खाड़ी में स्वतंत्र और सुरक्षित नौवहन को बाधित करने की घटनाओं की निंदा करते हैं। हम पश्चिम एशिया में फिर से शुरू हुए हमलों और बढ़ती शत्रुता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।
इसके साथ ही भारत ने तुरंत हिंसा बंद करने और संवाद व कूटनीति की राह पर लौटने की अपील सभी संबंधित पक्षों से की है ताकि शीघ्रता से शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल हो सके। विगत कुछ हफ्तों में पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी कई बार व्यावसायिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के मुद्दे को उठाया है।
मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत होर्मुज खाड़ी में दो जहाजों अल बहिया और मोम्बासा पर हुए हमलों पर गहरी चिंता में है। इन जहाजों पर 30 भारतीय नाविक सवार थे। अल बहिया पर एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और एक घायल हुआ जबकि मोम्बासा पर नौ भारतीय घायल हुए हैं जिनमें दो की हालत गंभीर है।
विदेश मंत्रालय ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। यूएई में भारतीय दूतावास स्थिति की निगरानी कर रहा है और प्रभावित नाविकों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
ऐसा नहीं है कि भारतीयों की मौत सिर्फ ईरानी हमले में हुए हैं। जून, 2026 में अमेरिकी वायु सेना ने होर्मुज मार्ग से निकलने की कोशिश कर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किये थे जिसमें एक जहाज ‘सेटलबेलो’ पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई थी।
उसके बाद विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को बुला कर अपना रोष प्रकट किया था। बाद में फ्रांस में जब पीएम मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात में हुई तो उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था।
