चुनावों के दौरान नेताओं का दलबदल आम बात है,क्यों?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क
चुनावों के दौरान नेताओं का दलबदल आम बात है, लेकिन बीच में पार्टी बदलने का चलन भी बिहार में हैं. बिहार विधानसभा के पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल (2020 से 2025)की बात करें, तो 17 विधायकों ने पाला बदला. यानी अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गये. इस दौरान विधानसभा में कुल 99 विधेयक पेश किये गये और ये सभी बिल पारित भी हुए. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की ओर से जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है.
बिहार में 5 साल में 17 विधायकों ने किया दलबदल
| क्रम | विधायक का नाम | निर्वाचन क्षेत्र | किस पार्टी में थे | किस पार्टी में गये |
|---|---|---|---|---|
| 1 | भारत बिंद | भभुआ | राजद | भाजपा |
| 2 | बीमा भारती | रुपौली | जदयू | राजद |
| 3 | चेतन आनंद | शिवहर | राजद | जदयू |
| 4 | मिश्रीलाल यादव | अलीनगर | वीआईपी | भाजपा |
| 5 | मो अंजर नयीमी | बहादुरगंज | एआईएमआईएम | राजद |
| 6 | मो जमां खान | चैनपुर | बीएसपी | जदयू |
| 7 | मो इजहार असफी | कोचाधामन | एआईएमआईएम | राजद |
| 8 | मुरारी प्रसाद गौतम | चेनारी (एससी) | कांग्रेस | भाजपा |
| 9 | नीलम देवी | मोकामा उपचुनाव (3.11.2022) | राजद | जदयू |
| 10 | प्रह्लाद यादव | सूर्यगढ़ा | राजद | जदयू |
| 11 | राज कुमार सिंह | मटिहानी | लोजपा | जदयू |
| 12 | राजू कुमार सिंह | साहेबगंज | वीआईपी | भाजपा |
| 13 | संगीता कुमारी | मोहनिया (एससी) | राजद | भाजपा |
| 14 | शाहनवाज | जोकीहाट | एआईएमआईएम | राजद |
| 15 | सिद्धार्थ सौरभ | बिक्रम | कांग्रेस | भाजपा |
| 16 | स्वर्ण सिंह | गौरा बौड़ाम | वीआईपी | भाजपा |
| 17 | सैयद रुकनुद्दीन अहमद | बैसी | एआईएमआईएम | राजद |
5 साल में बिहार विधानसभा की हुई 146 बैठकें
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में कुल 243 विधायकों में से 17 ने 5 साल के दौरान अपने दल बदले. वर्ष 2020 से 2025 के दौरान विधानसभा के कुल 15 सत्र हुए, जिनमें 146 बैठकें हुईं. विधानसभा की वेबसाइट से जो आंकड़े प्राप्त हुए हैं, उसके मुताबिक, 243 विधायकों ने कुल 22,505 प्रश्न पूछे, जिनमें ग्रामीण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल संसाधन से जुड़े विषय सबसे प्रमुख रहे.

भाजपा के अरुण शंकर प्रसाद ने पूछे सबसे ज्यादा सवाल
सबसे अधिक प्रश्न पूछने वालों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण शंकर प्रसाद (275 प्रश्न), कांग्रेस के मनोज प्रसाद सिंह (231) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुकेश कुमार यादव (230) शामिल रहे. पार्टी के आधार पर औसत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माकपा (माले) लिबरेशन के विधायकों ने सर्वाधिक सक्रियता दिखायी. सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा के विधायकों ने भी प्रश्नों की उल्लेखनीय संख्या दर्ज की.
सबसे ज्यादा प्रश्न पूछने वाले विधायक
| क्रम | विधायक का नाम | किस पार्टी के हैं | कितने सवाल पूछे |
|---|---|---|---|
| 1 | अरुण शंकर प्रसाद | भाजपा | 275 |
| 2 | मनोज प्रसाद सिंह | कांग्रेस | 231 |
| 3 | मुकेश कुमार यादव | राजद | 230 |
ग्रामीण कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े थे सबसे ज्यादा मुद्दे
‘बिहार इलेक्शन वॉच’ के राजीव कुमार ने बताया कि ग्रामीण कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सबसे अधिक 3,000 से अधिक प्रश्न पूछे गये, जो जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं. विधानसभा सत्रों के दौरान 2021 से 2025 के बीच पारित प्रमुख विधेयकों में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021, बिहार नियंत्रण अपराध विधेयक 2024, और जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक 2025 शामिल हैं.
6 और 11 नवंबर को बिहार में 2 चरणों में होगी वोटिंग
राजीव कुमार कहते हैं कि बिहार विधानसभा की पारदर्शिता में सुधार हुआ है, और सत्रों की नियमितता बनी रही है. उन्होंने कहा कि कई मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया. एडीआर की यह रिपोर्ट बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जारी हुई है. बिहार में 6 नवंबर और 11 नवंबर को 2 चरणों में वोटिंग होगी. 14 नवंबर को सभी 243 सीटों पर हुई वोटिंग की मतगणना करायी जायेगी.
बागियों को हवा देने में भी पीछे नहीं
राजनीति में एक विचित्र बात यह भी है कि जो असंतुष्ट या बागी दल छोड़ने की हिम्मत नहीं करते हैं, तो अपनी ही पार्टी के लिए भितरघात का डंक बन जाते हैँ। ऐसे बागियों को हवा देने वाले भी पीछे नहीं रहते, ताकि पार्टी में रहकर ही नुकसान पहुंचा सके। ऐसे बागी बेटिकट होने पर खेमेबंदी कर अपने ही उम्मीदवारों पर खुनस उतारते हैं, विरोधियों की पीठ थपथपाते हैं।
इस बार भी स्थिति यह है कि पुराने दल के सहयोगी अंदर ही अंदर बागी नेताओं को ही सपोर्ट करने में लगे हैं। यह भितरघात की विचित्र राजनीति का नया अनुभव है। जाहिर है कि इस सूरते हाल में बड़े-बड़े दिग्गजों को चुनावी अखाड़े में भितरघात से जूझना पड़ सकता है।
यह सीन हर दल में दिखेगा। चुनाव में टिकट कटने पर नेताओं द्वारा बगावत, दलबदल और फिर षड्यंत्र चुनाव में भितरघात का खेल खेलने से इंकार भी नहीं किया जा सकता। कई दिग्गजों को पैराशूट प्रत्याशियों का डर भी सता रहा है तो कई अपने नये-पुराने नेताओं की पैतरेबाजी से परेशान होते दिख रहे हैं।

