कैसे होती है अस्थमा की बीमारी, क्या हैं निजात पाने के तरीके?

कैसे होती है अस्थमा की बीमारी, क्या हैं निजात पाने के तरीके?

विश्व अस्थमा दिवस पर विशेष

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2021 तक भारत में लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित थे, जिसमें हर आयु वर्ग के रोगी शामिल हैं।

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विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई के पहले मंगलवार को श्वसन रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया जाता है। अस्थमा को सामूहिक रूप कम करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए शोधकर्ताओं, चिकित्सा पेशेवरों, फार्माकोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य देखभाल समूहों को एक साथ लाने का दिन है।

विश्व अस्थमा दिवस 2022 का आयोजन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा किया जाएगा, जो 1993 में स्थापित एक विश्व स्वास्थ्य संगठन का सहयोगी संगठन है। दुनिया भर में अस्थमा पर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल मई के पहले मंगलवार यानी इस साल 3 मई 2022 को विश्व अस्थमा दिवस आयोजित किया जाएगा।

अस्थमा की बीमारी आखिर है क्या?

अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है जिसमें सांस लेने में कठिनाई होती है और पीड़ितों को अलग-अलग स्तर तक प्रभावित करती है। अस्थमा ब्रोन्कियल ट्यूबों में सूजन आने के कारण होता है, कभी-कभी एलर्जी, व्यायाम, तनाव या तापमान में बदलाव से यह तेज हो जाता है।

अस्थमा का आमतौर पर इलाज नहीं होता है, लेकिन इसे कुछ हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह पीड़ित को यह कैसे प्रभावित करता है। यदि अस्थमा को नियंत्रित कर लिया जाए तो रोगी अपेक्षाकृत सामान्य जीवन जी सकते हैं, हालांकि इसको कुछ बढ़ाने वाले कारणों से बचना होगा।

विश्व अस्थमा दिवस पीड़ा से राहत और मौतों को कम करने की आशा में स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 2021 तक भारत में लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित थे, जिसमें हर आयु वर्ग के रोगी शामिल हैं।

विश्व अस्थमा दिवस की थीम

ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा ने 2022 विश्व अस्थमा दिवस के लिए थीम के रूप में ‘अस्थमा की देखभाल के अंतर को कम करना’ को चुना है।

अस्थमा की देखभाल में कई कमियां हैं जिन्हें रोकने तथा पीड़ा को कम करने के साथ-साथ अनियंत्रित अस्थमा के इलाज में होने वाली लागत को कम करने के लिए हस्तक्षेप की जरूरत है।

हालांकि, वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सिफारिशों को लागू करना दुनिया भर में चुनौतीपूर्ण है। सभी स्थानीय समाधान विश्व स्तर पर लागू नहीं होते हैं और इसी तरह वैश्विक सिफारिशें स्थानीय रूप से लागू नहीं हो सकती हैं।

इस वर्ष की थीम के तहत अंतरराष्ट्रीय श्वसन समुदायों के लिए सहयोगियों, रोगियों और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के साथ मिलकर काम करना और अस्थमा देखभाल में कमी की पहचान करना, स्थानीय और वैश्विक स्तर पर अभिनव समाधानों को लागू करने और साझा करने में मदद करना है।

Rajesh Pandey

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