मशरक की खबरें :  राम जानकी पथ निर्माण को लेकर अधिकारियों ने किया कार्यस्थल का निरीक्षण, अड़चनें दूर करने का निर्देश

 

मशरक की खबरें :  राम जानकी पथ निर्माण को लेकर अधिकारियों ने किया कार्यस्थल का निरीक्षण, अड़चनें दूर करने का निर्देश

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श्रीनारद मीडिया, विक्‍की बाबा, मशरक, सारण (बिहार):

मशरक प्रखंड के आठ गांवों से होकर गुजरने वाली बहुप्रतीक्षित राम जानकी पथ परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से डीसीएलआर मढ़ौरा धनंजय त्रिपाठी ने बुधवार को कार्यस्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बसोही और चैनपुर गांव में चल रहे सड़क निर्माण कार्य का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मौके बीडीओ सह प्रभारी सीओ पंकज कुमार, भू-अर्जन पदाधिकारी, पंचायत सचिव राकेश कुमार, राजस्व अधिकारी जय कर्ण कुमार समेत अन्य मौजूद रहें। मौके पर निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य में आ रही बाधाओं की जानकारी ली गई । उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में कार्य की गति धीमी नहीं होनी चाहिए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा किया जाए। आपकों बता दें कि एन एच 227 ए राम जानकी पथ भगवान राम और माता सीता से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक धार्मिक मार्ग हैं,जो उतर प्रदेश के अयोध्या से लेकर नेपाल के जनकपुर तक जाता है। यह पथ न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मार्ग हैं, बल्कि बिहार और नेपाल के बीच सामाजिक व व्यापारिक सेतु की भी भूमिका निभाता है।

 

उच्च माध्यमिक विद्यालय धवरी में छात्राओं को निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन किट का वितरण

श्रीनारद मीडिया, विक्‍की बाबा, मशरक, सारण (बिहार):


उच्च माध्यमिक विद्यालय धवरी, बनियापुर (सारण) में किशोरियों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए एक सराहनीय पहल के अंतर्गत छात्राओं के बीच निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन किट का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें सुरक्षित एवं स्वच्छ साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रधानाध्यापक रविचंद्र प्रकाश दास द्वारा छात्राओं को मासिक धर्म से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई एवं स्वच्छता बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। वही शिक्षक पिंटू रंजन ने कहा कि सेनेटरी नैपकिन का नियमित एवं सुरक्षित उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे छात्राओं का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक संतोष कुशवाहा, आनंद चौहान सहित कई अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। उन्होंने इस पहल को छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

विद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि छात्राएं बिना किसी संकोच के स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।

 

शब-ए-बारात पर मस्जिदों, कब्रिस्तानों में उमड़ी भीड़:मुस्लिम समुदाय ने पूरी रात की इबादत, मांगी गुनाहों से माफी

श्रीनारद मीडिया, विक्‍की बाबा, मशरक, सारण (बिहार):

मशरक के विभिन्न गांवों में मंगलवार रात शब-ए-बारात का पर्व मुस्लिम समुदाय ने पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया। इस दौरान मस्जिदों और कब्रिस्तानों में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां लोगों ने पूरी रात अल्लाह की इबादत की और अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर दुआएं मांगीं। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीएसपी संजय कुमार सुधांशु, थानाध्यक्ष रंजीत कुमार पासवान दल बल के साथ इलाके में गश्त लगाते दिखें।पर्व से पहले ही मुस्लिम समुदाय ने कब्रिस्तानों की साफ-सफाई और पुताई का कार्य पूरा कर लिया था। शब-ए-बारात की रात को मुस्लिम समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें लोगों ने नफिल नमाज़ अदा की और अपने गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की रहमत की दुआएं मांगीं। मस्जिदों में देर रात तक इबादत करने वालों की भीड़ लगी रही। मुस्लिम समाज से पूर्व उप प्रमुख साहेब हुसैन उर्फ टुनटुन ने शब-ए-बारात के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पर्व शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और मुसलमानों के लिए बेहद फज़ीलत की रात मानी जाती है। इस रात दुनिया भर के मुसलमान अल्लाह की इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। मौलाना करामात उल्लाह ने ‘शब’ और ‘बारात’ शब्दों का अर्थ भी समझाया।’शब’ का अर्थ रात और ‘बारात’ का अर्थ बरी (मुक्ति) होना है। यह रात जहन्नुम से निजात और अल्लाह की रहमत पाने की रात मानी जाती है। हदीसों के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस रात जन्नतुल बकी (अल-बकी कब्रिस्तान) गए थे और वहां दफन मुसलमानों के लिए दुआ की थी। इसी परंपरा का पालन करते हुए मुसलमान इस रात अपने प्रियजनों की कब्रों पर जाकर उनकी मगफिरत की दुआ करते हैं। शहर इमाम ने यह भी बताया कि शब-ए-बारात की रात के बाद, अगले दिन यानी 15 शाबान को रोज़ा रखना सवाब का काम माना जाता है। यह रात इबादत, रहमत और माफी की होने के साथ-साथ पवित्र रमज़ान महीने के आगमन का संकेत भी देती है।

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