पुराना जर्जर भवन इतिहास बना, नए एसएनसीयू में संवर रही नवजातों की सांसें
• जहाँ कभी संसाधनों की कमी थी, अब वहीं मिल रहा नवजातों को जीवनदान
• सरकारी अस्पताल में निजी से बेहतर व्यवस्था
• एसएनसीयू में बढ़ायी गयी बेड की संख्या
• एक साल में 1498 नवजात शिशुओं का हुआ इलाज
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर/छपरा (बिहार):

छपरा सदर अस्पताल में संचालित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) अब जिले के नवजातों के लिए जीवनदान साबित हो रही है। कुछ महीने पहले तक जर्जर और संकुचित भवन में चलने वाला एसएनसीयू अब नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य भवन (एमसीएच) में पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रहा है। स्थान की कमी और सीमित संसाधनों से जूझ रहे इस यूनिट को अब न सिर्फ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिला है, बल्कि बेड की संख्या भी 14 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।
नए एमसीएच भवन में शिफ्ट होने के बाद अब प्रसव से लेकर नवजात की गहन देखभाल तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। जन्म के समय कमजोर, समय से पूर्व जन्मे या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात शिशुओं को यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, इनक्यूबेटर, फोटोथेरेपी समेत अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सीधा असर शिशु मृत्यु दर में कमी के रूप में देखा जा रहा है।
पहले इलाज के लिए भटकते थे परिजन
एसएनसीयू इंचार्ज ज्योति आइजक ने बताया कि जिले में पहले सरकारी स्तर पर ऐसी उन्नत नवजात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार शिशुओं को इलाज के अभाव में जान गंवानी पड़ती थी। अब सदर अस्पताल में एसएनसीयू की सुविधा मिलने से परिजनों को निजी अस्पतालों या दूसरे जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यहां निमोनिया, पीलिया (जॉन्डिस), श्वसन संबंधी बीमारियों और कुपोषित नवजातों का आधुनिक तरीके से इलाज किया जा रहा है।
प्रशिक्षित स्टाफ, 24 घंटे सेवा:
एसएनसीयू के सुचारू संचालन के लिए चिकित्सकों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित नर्सें चौबीसों घंटे सेवा भाव से नवजातों की निगरानी और देखभाल में लगी रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सुविधाएं कई निजी अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं।
मेरे बच्चों को मिला जीवनदान:
एसएनसीयू में भर्ती एक नवजात के पिता गड़खा निवासी राजेश कुमार ने बताया मेरे बच्चे का जन्म समय से पहले हो गया था। सांस लेने में दिक्कत थी। अगर यहां एसएनसीयू की सुविधा नहीं होती तो हम इलाज के लिए बाहर जाने को मजबूर होते। डॉक्टरों और नर्सों की मेहनत से आज मेरा बच्चा सुरक्षित है। यह हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
आंकड़ों में एसएनसीयू की उपलब्धि:
जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक एसएनसीयू में कुल 1498 नवजात शिशुओं का इलाज किया गया। सदर अस्पताल में जन्मे 569 नवजात और अन्य अस्पतालों से रेफर 929 नवजात को बेहतर इलाज की सुविधा मिली है।
क्या है एसएनसीयू:
अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) नवजात शिशुओं के लिए एक विशेष गहन चिकित्सा इकाई है, जहां आधुनिक चिकित्सकीय उपकरणों की सहायता से गंभीर रूप से बीमार या कमजोर शिशुओं का इलाज किया जाता है।
इन रोगों का होता है उपचार
• समय से पूर्व जन्मे शिशु (प्री-मैच्योर बेबी)
• निमोनिया
• पीलिया (जॉन्डिस)
• श्वसन संबंधी बीमारियां
• कमजोर और कुपोषित नवजात शिशु
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